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जरूरी है माहवारी स्वच्छता प्रबंधन

By प्रसांता दास
Updated Date
जरूरी है माहवारी स्वच्छता प्रबंधन
जरूरी है माहवारी स्वच्छता प्रबंधन
File Photo

माहवारी तथा स्वच्छता प्रथाओं के बारे में समुदायों में आम जानकारी है. इसके बावजूद प्रजनन आयु के दौरान लड़कियों एवं महिलाओं में होनेवाली जैविक प्रक्रिया और जीवन के इस वास्तविक तथ्य के प्रति चुप्पी की संस्कृति अभी भी बरकरार है. यह ज्यादातर संदर्भों में अभी भी कलंक और शर्म का विषय बना हुआ है, जोकि लैंगिक समानता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी बाधा है.

हाल के वर्षों में दुनियाभर में माहवारी की प्रोग्रामिंग में वृद्धि हुई है, क्योंकि यह लड़कियों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा और समाज में उनकी भागीदारी को प्रभावित करता है. सुरक्षित माहवारी स्वच्छता गतिविधियों को बढ़ावा देना न केवल सकारात्मक लैंगिक समानता की दिशा में एक सक्षम वातावरण प्रदान करता है, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी योगदान देता है, विशेष रूप से एसडीजी- तीन, चार, पांच और छह. भारत एसडीजी-17 एवं 169 से संबंधित लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु प्रतिबद्ध है, जो कि व्यापक रूप से विकास के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आयामों को कवर करता है.

हमारा देश 35.5 करोड़ माहवारी वाली महिलाओं और लड़कियों का घर है. झारखंड राज्य में स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत कक्षा छठी से 12वीं में कुल 11,78,240 किशोरियों का नामांकन है, जिन्हें सीधे राज्य के जल एवं स्वच्छता तथा माहवारी स्वच्छता कार्यक्रमों के माध्यम से कवर किया जा रहा है.

हाल के वर्षों में माहवारी की समस्या को दूर करने की दिशा में सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं. वर्ष 2018 में प्रारंभ किये गये माहवारी स्वच्छता प्रबंधन स्टेट एक्शन प्लान के माध्यम से माहवारी स्वच्छता के तीन आयामों- जागरूकता, पहुंच और उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित करते हुए इसके प्रचार-प्रसार को औपचारिक रूप से सभी संबंधित विभागों की एक प्रमुख जिम्मेदारी के रूप में शामिल किया गया था. यूनिसेफ दुर्गम इलाकों में समुदायों के बीच स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की आपूर्ति, स्वच्छता एवं शौचालय के साथ-साथ महत्वपूर्ण स्वच्छता संदेशों के प्रचार तथा स्वच्छता किट के वितरण में सरकार और परिवारों का समर्थन कर रहा है.

कोविड-19 महामारी के दौरान जल एवं स्वच्छता, स्वच्छता सामग्री तथा निपटान की बुनियादी सुविधा तक पर्याप्त पहुंच के अभाव में किशोरियां एवं महिलाएं मासिक धर्म के प्रबंधन की अत्यधिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं. इसके कारण वे असम्मानजनक वातावरण तथा सामाजिक समर्थन की कमी का अनुभव कर रही हैं. इस मुद्दे का एकमात्र हल स्वच्छता उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करके लड़कियों के बीच स्वच्छता अभ्यासों के प्रति जागरूकता पैदा करना है.

इस चुनौती को दूर करने के लिए यूनिसेफ ने कोविड-19 लॉकडाउन अवधि के दौरान आपूर्ति की बाधा के समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किशोरियों के लिए सैनिटरी पैड के मुफ्त वितरण की वकालत की है. इसके अलावा यूनिसेफ ने स्थानीय टाइ-अप के माध्यम से भी वितरण को प्रोत्साहित किया है तथा स्कूल में बनाये गये पैड बैंकों के माध्यम से सामुदायिक स्तर पर वितरण को कार्ययोजना में शामिल किया है.

यूनिसेफ महामारी के दौरान संसाधनों की आपूर्ति के माध्यम से माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने में प्रमुख विभागों का सहयोग कर रहा है. शिक्षकों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण ने समुदायों के अंदर सही ज्ञान और जानकारी पहुंचायी है. ये प्रशिक्षण हितधारकों को एक मंच पर ला रहे हैं तथा माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, कोविड-19 उपयुक्त व्यवहार तथा पोषण से संबंधित उनकी समझ एवं जानकारियों को मजबूत बना रहे हैं.

हमने झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को राज्य स्तरीय अभियान- ‘चुप्पी तोड़ो स्वस्थ रहो’ शुरू करने में सहयोग दिया है, ताकि इस संदेश को प्रत्येक वर्ष 28 मई को माहवारी स्वच्छता प्रबंधन दिवस के अवसर पर प्रारंभ होनेवाले महीने भर के अभियान के माध्यम से बड़ी आबादी तक पहुंचाया जा सके. यह अभियान लड़कियों की जरूरतों को पूरा करने तथा अधिक संसाधनों के आवंटन, सुविधाओं में सुधार तथा बड़े पैमाने पर प्रोग्रामिंग को सुनिश्चित करने की वकालत करता है. इस साल महामारी की दूसरी लहर के बीच पूरे राज्य में एक सप्ताह के लिए डिजिटल माध्यम से अभियान चलाया जायेगा.

निकट भविष्य में राज्य स्तरीय सहयोग से यूनिसेफ राज्य के सभी प्रमुख विभागों को व्यावहारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर माहवारी प्रबंधन योजना कार्यक्रम लायेगा, ताकि बजटीय आवंटन और पर्याप्त संसाधनों के माध्यम से स्कूलों में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन का संचालन किया जा सके. नयी खोजों एवं प्रयोगों के माध्यम से माहवारी से संबंधित चुनौतियों से निपटने पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों द्वारा स्थानीय स्तर पर पैड के उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ, अधिक से अधिक जरूरतमंदों तक पहुंच और आवश्यक जानकारी पहुंचाना शामिल है.

इस तरह के प्रयासों के अलावा सुरक्षित निपटान के लिए सीमेंटेड इंसीनरेटर, माहवारी स्वच्छता लैब तथा स्कूलों में पैड बैंकों के निर्माण को भी बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है. यूनिसेफ झारखंड सरकार के सहयोग से बेहतर स्वच्छता सुविधाएं और स्वच्छता शिक्षा प्रदान करके किशोरियों एवं महिलाओं की सहायता कर रहा है, ताकि हर किशोरी एवं महिला को सीखने तथा अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में समर्थ और सशक्त बनाया जा सके.

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