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siliguri

  • Feb 12 2019 5:09AM

जलपाईगुड़ी : उत्तर बंगाल में वक्फ की 18 हजार बीघा जमीन बेदखल

 जलपाईगुड़ी :  राज्य वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने के बावजूद अभी भी हजारों बीघा जमीन बेदखल हो गयी है. इस वजह से उन्हें रिकार्ड में शामिल करने में दिक्कत आ रही है. इसके लिये बोर्ड ने सीएम के निर्देश पर रविवार से दो दिवसीय सर्वे का काम शुरु किया है. सूत्र ने बताया है कि पूरे उत्तर बंगाल में बोर्ड की करीब 18 हजार बीघा जमीन बेदखल हो चुकी है. 

वहीं, जलपाईगुड़ी जिले में ही सोनाउल्ला वक्फ स्टेट के मातहत करीब तीन हजार बीघा जमीन का अधिकतर हिस्से पर अभी तक वैध कब्जा नहीं हो पाया है जो बोर्ड के लिये चिंतनीय बना हुआ है. इस बीच सीएम का निर्देश है कि वक्फ की जमीन को दखलमुक्त करने के लिये किसी तरह के राजनैतिक दबाव को आड़े आने नहीं दिया जायेगा. 
 
 लोकसभा चुनाव के बाद राज्य के सभी जिलों में डीएम, एसपी, राजस्व अधिकारी और वक्फ बोर्ड के सदस्यों को लेकर कार्यशाला की जायेगी. सोमवार को यह जानकारी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल गनी ने दी है. 
 
 
रविवार से लेकर सोमवार के बीच अब्दुल गनी ने जलपाईगुड़ी जिले के पातकाटा सरदारपाड़ा में बने चाय बागान, राजगंज ब्लॉक के गाडरा के नवग्राम के चाय बागान, माल ब्लॉक के नेपुचापुर, बड़ोदिघी चाय बागान की जमीन समेत जलपाईगुड़ी शहर की वक्फ बोर्ड के अधीन वाले सोनाउल्ला वक्फ स्टेट की दखल हो चुकी एक हजार बीघा जमीन का जायजा लिया. 
 
   चेयरमैन ने बताया कि 30-100 साल पहले विभिन्न लोगों ने अपनी संपत्ति वक्फ के नाम कर दी थी. लेकिन अरसे तक उनके वंशजों ने उन संपत्तियों की देखरेख ठीक से नहीं की जिससे वे बेदखल हो गयीं. कई लोगों ने वक्फ की जमीन को फ्लैट बनवाने के लिये प्रमोटर को दे दिया है जो कि गैरकानूनी है.
 
 जलपाईगुड़ी के शिल्पसमितिपाड़ा में इस तरह की 23 कट्ठा और बेगुनटारी में आठ कट्ठा जमीन में बने मल्टीप्लेक्सों को बोर्ड ने नोटिस जारी की है. इस तरह की समस्या पूरे राज्य में है. उन्होंने बताया कि वामफ्रंट के कार्यकाल में 2007 में सर्वे के जरिये बताया गया था कि बोर्ड के नाम से एक लाख 43 हजार बीघा जमीन है.
 
 इनमें से आठ हजार बीघा खास और 10 हजार बीघा बेदखल हो गयी है. सरकार बदलने के बाद अब नये सिरे से सर्वे के जरिये जमीन का रिकार्ड तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीन की बिक्री, खरीद या हस्तांतरण नहीं हो सकता. ऐसा करने वालों को दो साल की जेल और जुर्माना हो सकता है. ऐसे लोगों से कहा जा रहा है कि वे या तो वे जमीन छोड़ दें या जमीन की मालगुजारी दें. इस रकम से बोर्ड के उत्तराधिकारियों को रुपए दिये जायेंगे.                               
 
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