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ranchi

  • Feb 12 2019 7:54AM
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एक करोड़ के इनामी नक्सली सुधाकरण व पत्नी का सरेंडर, झारखंड पुलिस नहीं ले पायेगी रिमांड पर!

एक करोड़ के इनामी नक्सली सुधाकरण व पत्नी का सरेंडर, झारखंड पुलिस नहीं ले पायेगी रिमांड पर!

तेलंगाना के पुलिस मुख्यालय में हथियार डाला

झारखंड में सुधाकरण पर एक करोड़ व पत्नी नीलिमा पर है  25 लाख का इनाम, वहीं  तेलंगाना में सुधाकरण पर  25 लाख रुपये और नीलिमा पर पांच लाख का था इनाम

रांची : प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी सेंट्रल कमेटी का सदस्य सुधाकरण और उसकी पत्नी नीलिमा ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है. उसे सरेंडर कराने में वहां के एक नेता की अहम भूमिका बतायी जा रही है. सरेंडर करीब पांच दिन पूर्व छह फरवरी को किया गया है. सुधाकरण मूल रूप से तेलंगाना के अदिलाबाद और नीलिमा वारंगल की रहनेवाली है. 

झारखंड सरकार ने सुधाकरण पर एक करोड़ रुपये और पत्नी  नीलिमा पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. हालांकि तेलंगाना में सुधाकरण पर  25 लाख रुपये का ही इनाम था. जबकि नीलिमा पर पांच लाख का इनाम था. संगठन में इन दंपती को कई नामों से जाना जाता था. सुधाकरण को सुधाकर, ओगू सतवाजी, बुरयार और किरण सहित कई  छद्म नाम थे. वहीं पत्नी  नीलिमा को बैदुगुला, अरुणा, जया, पद्मा और माधव आदि नामों से जाना जाता था. 

बता दें कि शीर्ष नक्सली अरविंद जी की मौत के बाद झारखंड में लातेहार, लोहरदगा, गुमला और गढ़वा जिले से घिरे बूढ़ा पहाड़ को सुधाकरण अपने दस्ते के साथ ठिकाना बनाये हुए था. इसके आतंक को देखते हुए ही गृह विभाग के आदेश पर पुलिस ने बूढ़ा पहाड़ के 29  हार्डकोर  नक्सलियों पर अधिकतम एक करोड़ रुपये से लेकर पांच लाख  तक के इनाम की राशि घोषित की थी. हेलीकॉप्टर से कई जिलों में इनके खिलाफ पर्चे बंटवाये गये थे. 

झारखंड में खोजती रह गयी जांच एजेंसियां : सुधाकरण और उसके भाई बी. सत्यनारायण और उसका सहयोगी लेवी का पैसा और सोना लेकर लातेहार के बूढ़ा पहाड़ से रांची के रास्ते तेलंगाना जा रहे थे. इस क्रम में केंद्रीय एजेंसी की सूचना पर चुटिया पुलिस ने रांची रेलवे स्टेशन के समीप से उन्हें गिरफ्तार किया था. बाद में दोनों को बिरसा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया था. इसके बाद पुलिस मुख्यालय की अनुशंसा पर मामला एनआइए को सुपुर्द कर दिया गया.  

एनआइए ने  मामला दर्ज कर तेजी से जांच की और महज तीन माह में चार्जशीट  कर दी. इसी मामले में एनआइए  ने सुधाकरण और नीलिमा को फरार घोषित कर दिया. वहीं सुधाकरण दंपती को दबोचने के लिए कई बार झारखंड पुलिस ने अभियान चलाया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली.  

तेलंगाना की सरेंडर पॉलिसी नक्सलियों के लिए फायदेमंद 

जानकारी के अनुसार, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में सरेंडर करने के बाद  नक्सलियों को जेल नहीं भेजा जाता. साथ ही उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस ले लिया जाता है.  वहीं, सरेंडर किये नक्सली पुलिस की संरक्षण में रहते हैं लेकिन उन्हें कहीं भी आने-जाने की छूट होती है. 

नक्सली रंजीत पाल को सीबीआइ नहीं ले सकी रिमांड पर 

झामुमो के पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड का आरोपी भाकपा माओवादी रंजीत पाल ने भी करीब दो साल पहले पश्चिम बंगाल में सरेंडर कर दिया था. लेकिन आज तक सीबीआइ उसे रिमांड पर नहीं ले सकी. वह आज भी वहां की पुलिस की देखरेख में खुला घूम रहा है. 

झारखंड पुलिस सुधाकरण को नहीं ले पायेगी रिमांड पर! 

माओवादी संगठन ने अरविंद जी की मौत के बाद छत्तीसगढ़ और झारखंड की कमान सुधाकरण को सौंपी थी. वह एक-दो नहीं बल्कि तीन दर्जन से ज्यादा मामलों में झारखंड के विभिन्न जिलों गुमला, लोहरदगा, लातेहार, रांची, चाईबासा आदि में दर्ज मामलों में वांटेड है. लेकिन पुलिस सूत्र बताते हैं कि तेलंगाना पुलिस की सरेंडर पॉलिसी के कारण झारखंड पुलिस सुधाकरण को रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं कर पायेगी. 

अब कौन करेगा झारखंड में नक्सलियों का नेतृत्व

सुधाकरण के सरेंडर के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अब संगठन में सुधाकरण की जगह कौन लेगा. अनल दा, पतिराम मांझी, मोछू या कोई और. हालांकि माओवादी संगठन की ओर से अभी तक कोई जानकारी साझा नहीं की गयी है.

 
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