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patna

  • Sep 12 2019 8:56AM
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विस सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी के 150 पदों के लिए साढ़े पांच लाख आये आवेदन, एमए डिग्री वाले भी कतार में

विस सचिवालय में चतुर्थ श्रेणी के 150 पदों के लिए साढ़े पांच लाख आये आवेदन, एमए डिग्री वाले भी कतार में
मिथिलेश
पटना : सरकारी नौकरियों के प्रति आकर्षण कहें या बेरोजगारों की बढ़ती फौज, बिहार विधानसभा सचिवालय के चतुर्थ श्रेणी के करीब 150 पदों के लिए साढ़े पांच लाख से अधिक युवाओं के  आवेदन आये हैं. एक पद के लिए 3666 उम्मीदवारों की कतार है. 10वीं पास की शैक्षणिक योग्यता वाले इन पदों के लिए बीए और एमए की डिग्रीवालों ने भी बड़ी संख्या में आवेदन किया है.  
 
इतनी बड़ी संख्या में आये आवेदन को लेकर विधानसभा सचिवालय खुद हैरान है. इतने आवेदकों के इंटरव्यू के लिए नया रास्ता ईजाद किया गया है. खुद आवेदकों से अपनी सुविधा के अनुसार इंटरव्यू का समय निर्धारित करने को कहा गया. करीब सवा लाख आवेदकों ने इंटरव्यू के लिए समय लिया है. इस हिसाब से एक हजार आवेदकों में किसी एक को नौकरी मिल पायेगी. 
 
बुधवार से इसका इंटरव्यू शुरू हुआ है. नियमित रूप से प्रतिदिन 150 अावेदकों का इंटरव्यू लिया जायेगा. आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि अगले साल जनवरी महीने तक सभी आवेदकों का इंटरव्यू हो पायेगा. इसके बाद चयन समिति बैठेगी और टेबलेशन के बाद मेधा सूची तैयार की जायेगी. प्रावधान के अनुसार सात तरह के चतुर्थ श्रेणी के इन पदों के लिए सिर्फ इंटरव्यू लिया जाना है. 
 
महिलाओं के आरक्षित ड्राइवर के सभी पांच पद रह गये खाली 
 
पिछले महीने विधानसभा सचिवालय में चालक के 14 पदों के लिए महिलाओं के आरक्षित सभी पांच पद खाली रह गये. इन पदों के लिए महिलाओं  के आवेदन नहीं आये, जबकि, बाकी के नौ पदों में एक पद सामान्य जाति के उम्मीदवार को प्राप्त हुआ और आठ पदों में चार के लिए अनुसूचित जाति व चार के लिए अति पिछड़ी जाति के आवेदक चयनित किये गये.
 
यूपीएससी और बीपीएससी के तर्ज पर इंटरव्यू बोर्ड 
 
विधानसभा सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि आवेदकों की इतनी बड़ी संख्या के बावजूद पूरी तरह पारदर्शी तरीके से इंटरव्यू का प्रबंध किया गया है. यूपीएससी और बीपीएससी के तर्ज पर इंटरव्यू बोर्ड गठित किये गये हैं. आखिरी आधे घंटे में अावेदक और बोर्ड को रौल नंबर उपलब्ध कराये जाते हैं. इससे आवेदक को भी अपना रौल नंबर इंटरव्यू के लिए कतार में लगने के बाद ही पता चल पा रहा. अधिकारी बताते हैं, पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था अपनायी गयी है. 
 
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