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monghyr

  • Feb 14 2018 6:08AM

एससीआरए बंद करने के फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार : आरके पचौरी

 जमालपुर : नोबेल पुरस्कार विजेता राजेंद्र कुमार पचौरी ने कहा है कि भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान में स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेंटिस (एससीआरए) की पढ़ाई बंद करने के फैसले पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए. पूरे देश में इस प्रकार के समुन्नत संस्थान कहीं नहीं है. वे मंगलवार को इरिमी में आयोजित वार्षिकोत्सव समारोह में भाग लेने के उपरांत पत्रकारों से  बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि एससीआरए की पढ़ाई को बंद करने का निर्णय बहुत बड़ी भूल है.

इस भूल को सुधार करना चाहिए. क्योंकि इस तरह की संस्था दुनिया भर में कहीं नहीं है. उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान को अपग्रेड करने की जरूरत है. ताकि यहां पढ़ाई के साथ-साथ रेलवे के विकास के बारे में अनुसंधान भी किया जाये. उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय बनाया जाये तो भी ठीक है. मनसा यह है कि इस संस्थान का कुछ न कुछ तो विकास होना ही चाहिए. उन्होंने एससीआरए को बंद करने के निर्णय को गलत बताया.

उन्होंने रेलवे को सेना से सीख लेने की सलाह दी. एससीआरए में मात्र 18 वर्ष के उम्र से लोग अगले 40 वर्ष तक रेलवे की बेहतरी के लिए ही केवल और केवल सोचते हैं और इस संस्थान से बेहतर जगह और कोई दूसरा इस तरह की पढ़ाई के लिए हो ही नहीं सकता. नोबेल पुरस्कार विजेता ने स्पष्ट कहा कि आज हम आंख बंद कर अमेरिका 

एससीआरए बंद करने
 
के बताये रास्ते पर चल रहे हैं जो हमारे लिए उचित नहीं है. हमारे देश की जो व्यवस्था है उसको ध्यान में रखकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो हर व्यक्ति को लाभ पहुंचा सके. रेल एक ऐसा साधन है जिसका उपयोग समाज के हर एक तबका के लोग करते हैं. इसलिए रेलवे का विकास सबसे पहले आवश्यक है. उन्होंने कहा कि वह पहली बार 1981 में चीन गए हुए थे. तब से लेकर वहां कायापलट हो चुका है. जबकि हम लोग वहीं के वहीं हैं. हम अपनी कल्पना के आधार पर आगे बढ़ने की सोच नहीं रखते.
 
विकास के लिए एक विजन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ठीक रास्ते से यदि यहां का विकास किया जाये तो बहुत कुछ हो सकता है. उन्होंने कहा इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी की बहुत बड़ी समस्या है. आर के पचौरी को इस बात की बेहद तकलीफ रही कि आज वह पटना से 7:15 बजे निकले थे और यहां पहुंचते-पहुंचते 2:45 बज गया.  मात्र बड़हिया क्रॉस करने में ही उन्हें 2 घंटे लग गये. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी जगह का विकास करना है तो सबसे पहले उस क्षेत्र में यातायात का विकास होना चाहिए. इस बिंदु पर काम करने की आवश्यकता है. इस मौके पर संस्थान के निदेशक गजानन माल्या मुख्य रूप से उपस्थित थे.
 

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