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lucknow

  • May 23 2019 10:14PM
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अमेठी में राहुल गांधी को चित करने वाली स्मृति ईरानी के बारे में जानें ये बातें...

अमेठी में राहुल गांधी को चित करने वाली स्मृति ईरानी के बारे में जानें ये बातें...

नयी दिल्ली : छोटे पर्दे की हर दिल अजीज बहू ‘तुलसी' और ‘गांधी परिवार' के गढ अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली स्मृति ईरानी ने एक बड़ा उलटफेर करके राजनीति के गलियारों में अपना कद काफी ऊंचा कर लिया है. केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पिछली बार राहुल से अमेठी में एक लाख से अधिक मतों से हार गयी थी. 

 

इस बार फिर उसी संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और पिछले पांच साल से अमेठी में सक्रिय ईरानी ने गांधी से उस हार का बदला ले लिया. राहुल ने औपचारिक नतीजे घोषित होने से पहले ही अपनी हार स्वीकार करते हुए प्रेस वार्ता में स्मृति को जीत की बधाई भी दे डाली. 

 

ईरानी ने अपनी जीत के बाद ट्वीट करके दुष्यंत कुमार की कविता की पंक्तियां लिखी, ‘कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता.' राजनीतिक विश्लेषकों का तो यह भी कहना है कि अमेठी में अपनी हार की सुगबुगाहट पाने के बाद ही गांधी ने केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ने का फैसला किया था. पिछली बार चुनाव हारने के बावजूद उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया गया और बाद में वह सूचना प्रसारण और फिर कपड़ा मंत्री रही. 

 

ईरानी को उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर या बतौर मंत्री कार्यकाल में कई विवादों का सामना करना पड़ा. अपने नामांकन पत्र में उन्होंने कहा था कि वह स्नातक नहीं है. वहीं 2014 चुनाव में उन्होंने कहा था कि वह 1994 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हैं जिससे उनके दावे की विश्वसनीयता को लेकर विवाद पैदा हो गया था. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि वह स्नातक नहीं है. 

 

सूचना प्रसारण मंत्री रहते भी वह कभी प्रसार भारती बोर्ड से लड़ाई तो कभी ‘फेक न्यूज' को लेकर अधिसूचना जारी करने को लेकर विवादों के घेरे में रही जो बाद में पीएमओ के दखल के बाद वापिस ली गयी. अमेठी में चुनाव अभियान के दौरान अक्सर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से उनका वाकयुद्ध भी हुआ जिन्होंने उन्हें ‘बाहरी' करार दिया था. 

 

पिछले महीने प्रियंका ने उन पर आरोप लगाया था कि राहुल का अपमान करने के लिए उन्होंने जूते बांटे और कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष की लोकसभा सीट के मतदाता भिखारी नहीं है. चुनावी राजनीति में उनका पदार्पण 2004 में हुआ जब दिल्ली के चांदनी चौक इलाके से वह कांग्रेस के कपिल सिब्बल से हार गयी थी.

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