Economy

  • Oct 12 2019 10:03PM
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भारत-चीन के बीच व्यापार, निवेश से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बनेगा नया तंत्र

भारत-चीन के बीच व्यापार, निवेश से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बनेगा नया तंत्र

महाबलीपुरम : भारत और चीन ने व्यापार, निवेश और सेवा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए एक मंत्री स्तरीय व्यवस्था स्थापित करने का शनिवार को फैसला किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता के बीच यह फैसला किया गया.

विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा, बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने चीन के साथ व्यापार में बढ़ते घाटे को लेकर भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने पर भी सहमति जतायी. उन्होंने चीन में सूचना प्रौद्योगिकी और औषधि क्षेत्र में अधिक भारतीय निवेश का स्वागत किया. उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जतायी कि व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर एक नया तंत्र स्थापित किया जायेगा. भारत की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री हु छुन ह्वा इसका नेतृत्व करेंगे. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के तहत होने वाले प्रस्तावित व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दों पर भी संक्षिप्त में बातचीत की.

गोखले ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खासतौर से कहा कि भारत को आरसीईपी समझौता होने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा कि यह संतुलित होना चाहिए. गोखले ने कहा कि शी ने इस पर गौर किया और कहा कि चीन और भारत इस मुद्दे पर आगे बातचीत के लिये तैयार है. चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि आरसीईपी को लेकर भारत की चिंताओं पर गौर किया जायेगा. आरसीईपी के तहत आसियान समूह के 10 देश (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड , फिलीपींस, लाओस तथा वियतनाम) तथा छह अन्य देश भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, आॅस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आपस में मुक्त व्यापार समझौता करने के लिये बातचीत कर रहे हैं. इनके बीच नवंबर 2012 से वृहत व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है.

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, आर्थिक सहयोग और भागीदारी को मजूबत करने की कोशिशों के रूप में दोनों नेताओं ने उच्च स्तरीय आर्थिक एवं व्यापार संवाद व्यवस्था स्थापित करने का फैसला किया है. इससे दोनों देशों के बीच कारोबार में संतुलन बनाये रखने में भी मदद मिलेगी. चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार में भारत घाटे की स्थिति में है. चीन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2017 में 51.72 अरब डॉलर से बढ़कर 2018 में 57.86 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. इस दौरान हालांकि भारत का चीन को निर्यात 2017 के मुकाबले 15.2 प्रतिशत बढ़कर 18.84 अरब डाॅलर पर पहुंच गया.

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