Delhi

  • Dec 11 2019 10:58AM
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राज्यसभा LIVE : नागरिकता बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजने का विपक्ष का प्रस्ताव गिरा

राज्यसभा LIVE : नागरिकता बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजने का विपक्ष का प्रस्ताव गिरा
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नयी दिल्लीः संसद के शीतकालीन सत्र के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है. गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को नागरिकता संशोधन विधेयक चर्चा के लिए राज्यसभा में पेश किया. उन्‍होंने कहा, भारत के मुसलमान देश के नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान वाले इस विधेयक को पेश करते हुए उच्च सदन में गृह मंत्री ने कहा कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों के पास समान अधिकार नहीं हैं. 

उन्होंने कहा कि इन देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम से कम 20 फीसदी कम हुई है. शाह ने कहा कि इन प्रवासियों के पास रोजगार और शिक्षा के अधिकार नहीं थे. गृह मंत्री ने इस विधेयक के पीछे वोटबैंक की राजनीति के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस संबंध में घोषणा की थी.

राज्यसभा में कुल 245 सांसद होते हैं, लेकिन मौजूदा संख्या 240 है. ऐसे में बिल को पास कराने के लिए सरकार को 121 सांसदों का समर्थन चाहिए. भाजपा के पास कुल 83 सदस्य हैं. उसे 38 अन्य सांसदों का समर्थन चाहिए. पढ़ें लाइव अपडेट्स

* नागरिकता संशोधन बिल को सिलेक्ट कमिटी में भेजने का विपक्ष का प्रस्ताव गिरा. पक्ष में 99 और विपक्ष में 124 वोट पड़े.

 

* राज्‍य सभा में विपक्ष के सवालों के जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, शिवसेना ने लोकसभा में नागरिकता विधेयक का समर्थन किया, रातोंरात ऐसा क्या हो गया कि वे अब इसका विरोध कर रहे हैं. उन्‍होंने आगे कहा, यह विधेयक नागरिकता प्रदान करने के लिए है, किसी की नागरिकता लेने के लिए नहीं.

असम में नागरिकता बिल के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारियों ने राजधानी दिसपुर में जनता भवन के पास बस में आग लगा दी. गौरतलब हो विधेयक के खिलाफ असम में व्यापक विरोध प्रदर्शन के दौरान बुधवार को राज्य सचिवालय के निकट छात्रों के एक बड़े समूह और पुलिस के बीच झड़प हो गयी.

* नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच ऐहतियातन सेना की दो टुकड़ियों को त्रिपुरा में तैनात किया गया है जबकि सेना की दो अन्य टुकड़ियों को असम में स्टैंडबाय पर रखा गया है. 

* राज्यसभा में AAP सांसद संजय सिंह ने नागरिकता पर संशोधन बिल के बारे में कहा, मैं इस विधेयक का विरोध कर रहा हूं क्योंकि यह बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान के खिलाफ है. यह संविधान की प्रस्तावना के खिलाफ है. यह महात्मा गांधी और भगत सिंह के सपनों के भारत के खिलाफ है.

* शिवसेना के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पर उच्च सदन में लोकसभा से भिन्न स्थिति होने का हवाला देते हुये बुधवार को कहा कि सरकार को इस विधेयक पर उनकी पार्टी से समर्थन की अपेक्षा करने से पहले उनके सवालों का जवाब देना होगा.

यह विधेयक बुधवार को राज्यसभा में पेश होने वाला है. शिवसेना ने लोकसभा में इस विधेयक का समर्थन किया था. राउत ने कहा, लोकसभा में आंकड़े अलग हैं और राज्यसभा में स्थिति भिन्न है.

सरकार को हमारे सवालों का जवाब देना होगा. वोटबैंक की राजनीति सही नहीं है. आप एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्‍होंने कहा, हमें कोई राष्ट्रवाद न सिखाये. जिस स्कूल में आप पढ़ रहे हैं हम उसके हेडमास्टर हैं. हमारे स्कूल के बाला साहेब ठाकरे हैं, अटल जी भी हैं, श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं.

इस बिल का विरोध धार्मिक आधार पर नहीं मानवता के आधार पर होना चाहिए. लाखों-करोड़ों लोग को आप ला रहे हैं तो क्या उनको वोटिंग राइट दे रहे हैं.

* कपिल सिब्बल ने शाह के उस बयान पर अपनी प्रति‍क्रिया दी, जिसमें कहा था कि सीएबी की जरूरत नहीं होती अगर कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन की अनुमति नहीं दी होती. सिब्‍बल ने कहा, मुझे समझ नहीं आता कि गृह मंत्री ने कौन सी इतिहास की किताबें पढ़ी हैं. दो-राष्ट्र सिद्धांत हमारा सिद्धांत नहीं है. यह सावरकर द्वारा बनाई गई थी.

* आरजेडी के सांसद मनोज झा ने बिल कर विरोध करते हुए कहा, हम सैद्धांतिक, ऐतिहासिक और व्यवहारिक तौर पर इस बिल के विरोध में हैं

* बीएसपी सांसद सतीश चंद्र मिश्र ने कहा, मुसलमानों को इस बिल में जगह नहीं देना संविधान के खिलाफ है, यह आर्टिकल 14 का उल्लंघन है. यह कानून फेल है.

-  चिदंबरम ने सवाल उठाया- आपने कैसे यह तय किया कि केवल तीन पड़ोसी देशों के ही नागरिक इसमें शामिल होंगे? दूसरे पड़ोसियों को शामिल किया गया है. केवल छह धर्मों को इसमें शामिल क्यों किया गया? अहमदिया, हजारा, रोहिंग्या आदि को क्यों छोड़ा गया है. यहूदी, मुसलमानों, श्रीलंकाई हिंदू और भूटानी क्रिश्चियन आदि को क्यों शामिल नहीं किया गया? केवल धर्म के आधार पर प्रताड़ित लोगों को ही क्यों शामिल किया गया. राजनीतिक समेत अन्य वजहों से प्रताड़ित लोगों को क्यों शामिल नहीं किया गया.

 
- कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार जो बिल ला रही है, ये पूरी तरह से गैर-संवैधानिक है. हमारी जिम्मेदारी बनती है कि वही पास करें जो सही हो, अगर गैर-संवैधानिक बिल को हम पास करते हैं तो बाद में सुप्रीम कोर्ट इस बिल का भविष्य तय करेगी. उन्होंने कहा-  मुझे पूरा विश्वास है कि ये बिल अदालत में नहीं टिकेगा. अगर कानून मंत्रालय ने इस बिल की सलाह दी है तो गृह मंत्री को कागज रखने चाहिए, जिसने भी इस बिल की सलाह दी है उसे संसद में लाना चाहिए.

 
-  बीपीएफ के विश्वजीत दैमारी ने कहा- उत्तर पूर्व के लोगों को इस बिल को लेकर शंका है, इसलिए वहां विरोध प्रदर्शन चल रहा है. बाहरी लोगों की वजह से वहां स्थानीय लोग हाशिए पर चले गए थे. 35 साल बीतने के बाद भी असम अकॉर्ड के वादों को लागू नहीं किया गया. उम्मीद करता हूं कि गृह मंत्री उत्तर पूर्व के लोगों की शंकाओं को दूर करेंगे. मैं इस बिल का समर्थन करता हूं.

 
-  मनोनीत सांसद स्वपन दास गुप्ता ने कहा कि सभी को शरणार्थी और घुसपैठियों में अंतर करना होगा, सिर्फ अफवाह फैलाना ठीक नहीं होगा. ये बिल कुछ गलत नहीं करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है. ये बिल बांग्लादेश से आए बंगाली हिंदुओं को उनका अधिकार देता है.
 
-  राज्यसभा में सीपीआई (एम) ने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया.
- टीआरएस के केशव राव ने कहा इस बिल को वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने इस बिल का विरोध किया. 
 
- जद (यू) सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि इस बिल को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है. इस बिल में संविधान का उल्लंघन नहीं हुआ है, ना ही आर्टिकल 14 का उल्लंघन हुआ है. जदयू ने राज्यसभा में इस बिल का समर्थन किया है. उन्होंने कहा- हमारा देश रिपब्लिक है, यहां के नागरिकों को समान अधिकार है. हमारे देश में सीजेआई, राष्ट्रपति भी अल्पसंख्यक समाज से हुए हैं लेकिन क्या पड़ोसी मुल्क में ऐसा हुआ क्या. यहां एनआरसी की बात हो रही है लेकिन सी के आगे डी भी होता है, हमारे लिए डी का मतलब डेवलेपमेंट है.

 
-  समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान बोले कि अगर सदन में किसी विशेष समुदाय के नाम लेने पर आपत्ति हो सकती है, लेकिन ये जो बिल आया है वो इसका उल्लंघन करता है. भारत का संविधान किसी धर्म विशेष के लिए नहीं है, ऐसे में जो भी इस देश को किसी एक धर्म का राष्ट्र बनाना चाहता है तो उसका खंडन होना चाहिए. उन्होंने कहा, अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि इस बिल से मुस्लिमों का कोई लेना देना नहीं. गृहमंत्री ने लेना देना शब्द उपयोग किया. मैं पूछता हूं कि  क्या मुसलमान इस देश के नागरिक नहीं हैं? खान ने कहा कि इस नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी के माध्यम से हमारी सरकार जिन्ना के सपने को पूरा करने की कोशिश कर रही है. 
 
- राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि इस बिल पर संसद में संग्राम होगा लेकिन उसके बाद ये बिल सुप्रीम कोर्ट में भी जाएगा. उन्होंने इस दौरान कहा कि ये बिल भारत विरोधी, बंगाल विरोधी है. उन्होंने कहा कि  बीजेपी की नींव तीन बातों पर है सिर्फ झूठ, झांसा और जुमला. आप घुसपैठियों पर अधिकार छीनने का आरोप लगाते हैं लेकिन आपकी सरकार ने दो करोड़ लोगों का रोजगार छीन लिया.
 
- जेपी नड्डा बोले- मनमोहन सिंह की बात आप मानतें है, 18 दिसंबर 2003 में मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में बयान दिया था. मनमोहन सिंह तब अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार हो रहा है. हम मनमोहन सिंह की बात ही मान रहे हैं, जो आप नहीं कर पाए.
 
- जेपी नड्डा बोले कि आजादी के बाद पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यकों की संख्या घटी है जबकि भारत में अल्पसंख्यकों की संख्या बढ़ी है. उन्होंने कहा कि कई बार कुछ लोग समझना नहीं चाहते हैं, विपक्ष ऐसा ही कर रहा है. आर्टिकल 14 को बार-बार उठाया जा रहा है, जो कि गलत तर्क है. कांग्रेस पार्टी को राजनीति नहीं बल्कि देशहित के बारे में सोचना चाहिए. 
 
-  भाजपा सांसद जेपी नड्डा ने कहा कि आज इस बिल से लाखों लोगों को सम्मान मिलेगा. आनंद शर्मा का भाषण विद्युतापूर्ण था, जब वकीलों के पास तथ्य की कमी होती है तो उसका मूल से संबंध कम होता है. उनके भाषण में आवाज बहुत लेकिन तथ्य कम. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान-बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ प्रताड़ना हुई, धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ. जेपी नड्डा बोले कि तब भारत में हिंदू बहुसंख्यक थे और पाकिस्तान में मुस्लिम, इस बात को मान लीजिए.
 
- जेपी नड्डा बोले- नागरिकता संशोधन बिल का आधार यह है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना झेल रहे अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जाए.
- कांग्रेस नेता आनंद शर्मा के सवालों पर भाजपा की ओर से जेपी नड्डा जवाब दे रहे हैं.
 
- आनंद शर्मा ने कहा- कांग्रेस ने '2 नेशन' थिअरी नहीं दी, विनायक सावरकर की हिंदू महासभा ने 1937 में इसके लिए प्रस्ताव पारित किया. 1938 में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में भारत के विभाजन का रेजॉलूशन पास किया गया.
 
- आनंद शर्मा ने कहा कि असम में आज बच्चे सड़क पर क्यों हैं, जो डिटेंशन सेंटर बनाया गया है तो वहां पर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को भेजना चाहिए. किसी राजनीतिक दल का घोषणापत्र देश का संविधान नहीं हो सकता है. असम में आज लोग जल रहे हैं, उनके मन में असुरक्षा है लेकिन आप पूरे देश में एनआरसी लाने की बात कह रहे हैं. कहा कि गांधी-पटेल का नाम लेने से कुछ नहीं होगा, अगर सरदार पटेल पीएम मोदी से मिलते तो बहुत नाराज होते..गांधी का चश्मा सिर्फ विज्ञापन के लिए नहीं है.
 
- कांग्रेस नेता ने कहा कि अभी तक 9 संशोधन आए, गोवा, दमन-दीव, पुड्डूचेरी, युंगाडा, श्रीलंका, केन्या से आए लोगों को भारत की नागरिकता दी गई. 6 साल देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी थे, क्या उनपर भी सवाल खड़ा करेंगे. नागरिकता देते वक्त संसद ने धर्म को आधार नहीं बनाया, ये बिल आर्टिकल 14 का उल्लंघन है. आनंद शर्मा ने कहा कि आपका ये बिल संविधान की परीक्षा में फेल होता है.
 
-  भारत ने सदियों से लोगों को शरण दी है, यहूदी-पारसी-ईसाई सभी को भारत ने शरण दी थी. कांग्रेस नेता ने इस दौरान 9/11 का जिक्र किया, लेकिन 126 साल में 9/11 पर चार घटनाएं हुई हैं. महात्मा गांधी का सत्याग्रह भी 9/11 को शुरू हुआ था. 9 सितंबर को ही स्वामी विवेकानंद ने भाषण दिया था, उन्होंने कहा था कि मैं ऐसे देश से संबंध रखता हूं जो हर धर्म के लोगों को शरण देता है.
 
- आगे आनंद शर्मा ने कहा कि 1955 में सिटिजनशिप ऐक्ट आया जिसके बाद 9 बार इसमें बदलाव किये गये, लेकिन संविधान से इसका कोई टकराव नहीं हुआ.

-शर्मा ने कहा कि यह बिल संविधान की मूल भावना पर हमला करने की तरह है. यह लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है. बिल विभाजनकारी बिल है जिसकी वजह से मैं इसका विरोध करता हूं. इतिहास को बदलने का काम नहीं किया जा सकता है. कई लोगों ने प्रयास किया, लेकिन वे बदल नहीं पाए. कभी न कभी जब परिवर्तन होते हैं, तो सच्चाई और इतिहास प्रचंड रूप में खुद को प्रकट करता है. टू नेशन थिअरी जो बंटवारे की है, वह कांग्रेस नहीं लाई, वह 1937 में अहमदाबाद में हिंदू महासभा ने प्रस्ताव पारित किया था. उसकी अध्यक्षता सावरकर जी ने की थी. उसके एक साल बाद 1938 में मुस्लिम लीग का अधिवेशन हुआ, इसमें पार्टिशन ऑफ इंडिया प्रस्ताव पेश किया गया.

-आनंद शर्मा ने कहा कि 2016 में भी यह बिल लाया गया था, उस बिल में और इसमें अंतर है. बिल के बदलावों की स्क्रूटनी होना जरूरी है. इस बिल को पहले दिखाना चाहिए था, संसद की कमिटी के पास भेजा जाता.

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सदन में कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि हम इस बिल का विरोध करते हैं. विरोध का कारण राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक है. सरकार बिल पर जल्दबाजी क्यों कर रही है ? उन्होंने कहा कि ये नागरिकता बिल भेदभाव पैदा करता है. ये बिल संविधान की नींव पर हमला है. नागरिकता का मतलब भूगोल से नहीं है. विभाजन की पीड़ा सबको है. 
 
- अमित शाह बोले- इस बिल के बारे में भ्रांति फैलाई जा रही है. कहा जा रहा है कि यह बिल मुसलमानों के खिलाफ है. इस देश के मुसलमानों के लिए चिंता की कोई बात नहीं है. वे नागरिक थे, हैं और रहेंगे.
 
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि इस सदन के सामने एक ऐतिहासिक बिल लेकर आया हूं, इस बिल के जो प्रावधान हैं उससे लाखों-करोड़ों लोगों को फायदा होगा. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में जो अल्पसंख्यक रहते थे, उनके अधिकारों की सुरक्षा नहीं होती थी उन्हें वहां पर समानता का अधिकार नहीं मिला था. जो अल्पसंख्यक धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत में आए, उन्हें यहां पर सुविधा नहीं मिली. पाकिस्तान में पहले 20 फीसदी अल्पसंख्यक थे, लेकिन आज 3 फीसदी ही बचे हैं. इस बिल के जरिए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को रियायत मिलेगी.
 
- राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह बोले- सरल भाषा में मैं बताना चाहता हूं कि यह बिल है क्या. पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान, जिन तीन देशों की सीमाएं भारत को छूती हैं, उन तीन देशों में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई, ये अल्पसंख्यक लोग जो भारत में आए हैं, किसी भी समय आए हैं, उनको नागरिकता प्रदान करने का इस बिल में प्रावधान है. इसका मतलब आजादी के बाद बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से जो भी हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के अनुसरण करने वाले आए हैं, उन्हें नागरिकता देंगे. इसके अलावा नॉर्थ ईस्ट के हितों की चर्चा गई है.
 
 
 
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल को पेश कर दिया है, अब इस बिल पर ऊपरी सदन में चर्चा शुरू होगी.
 
- राज्यसभा में आज कार्यवाही के दौरान चार सांसद उपस्थित नहीं रहेंगे. इन सभी सांसदों ने खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया है, इनमें माजिद मेनन, वीरेंद्र कुमार, अनिल बलूनी, अमर सिंह शामिल हैं.
 
- नागरिकता बिल पेश होने से पहले पूर्वोत्तर में प्रदर्शन तेज हो गया है. असम के दिब्रूगढ़ में भारी संख्या में पुलिसबल तैनात है.
 
- विपक्ष इस बिल का लगातार विरोध कर रहा है और संविधान विरोधी बता रहा है. इस बिल के खिलाफ असम समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहा है.
 
-  राज्यसभा  में चर्चा से पहले बुधवार की सुबह बीजेपी की संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने विपक्ष पर हमला किया. उन्होंने कहा कि 6 महीने का समय ऐतिहासिक रहा, जो काम वर्षों से नहीं हुआ वह हुआ. पाकिस्तान जो भाषा नागरिकता बिल को लेकर बोल रहा है वही बात यहां के कुछ दल बोल रहे हैं. इसे जनता तक ले जाइए. उन्होंने कर्नाटक की जीत पर ख़ुशी भी जताई.
 
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी ने बीजेपी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि वह नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जनता के बीच जाएं और उन्हें इसके बारे में बताएं. पीएम मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पार्टी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ी है.
 
- भाजपा संसदीय दल की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा नागरिकता संशोधन विधेयक एक ऐतिहासिक विधेयक है.

 
- राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान बोलने वाले विपक्षी नेताओं में कांग्रेस से कपिल सिब्बल, तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओ ब्रायन और समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव शामिल हैं.
 
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर नागरिकता संशोधन बिल का विरोध किया है.  कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक पूर्वोत्तर और वहां के लोगों के जीवन के तरीकों और भारत के विचार पर आपराधिक हमला है. उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक मोदी-शाह सरकार द्वारा पूर्वोत्तर को नस्ली तौर पर साफ करने की कोशिश. कहा कि मैं पूर्वोत्तर के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा हूं और उनकी सेवा में तत्पर हूं.
 
- राज्यसभा में मोदी सरकार के लिए नागरिकता संशोधन बिल को पास कराने की राह आसान हो गई है. टीडीपी, YSR कांग्रेस इस बिल के समर्थन में रहेंगी, जबकि टीआरएस इस बिल का विरोध करेगी
 
- लोकसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप के सुरेश ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर देश में अशांति और संघर्ष पर स्थगन प्रस्ताव दिया है. 
 
- भाजपा संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्लियामेंट लाइब्रेरी पहुंचे.
 
- दिल्ली: भाजपा संसदीय दल की बैठक पार्लियामेंट लाइब्रेरी में शुरू हो गई है.

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