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calcutta

  • Jan 20 2019 9:34PM

पश्चिम बंगाल : राज्य के आयुष कॉलेज में अबतक नहीं लगा बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम

पश्चिम बंगाल : राज्य के आयुष कॉलेज में अबतक नहीं लगा बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम
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- सीसीआईएम के निर्देश की अनसुनी

- गुरुजी की हाजरी सिस्टम से आयुष छात्र खुश

- घोस्ट शिक्षकों की खैर नहीं

- दिल्ली से होगी मॉनिटरिंग

शिव कुमार राउत, कोलकाता

सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसीन (सीसीआईएम) ने देश के सभी सरकारी व प्राइवेट आयुष कॉलेजों में कर्मचारियों, शिक्षकों व छात्रों की उपस्थिति की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए जीपीएस आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की शुरुआत की है. गत वर्ष 28 दिसंबर को सीसीआईएम के द्वारा जारी निर्देशिका में सभी आयुर्वेद, यूनानी व सिद्धा के कॉलेजों को 7 जनवरी 2019 तक इस बायोमेट्रिक अटेंडेंस डिवायस को इंस्टाल करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था. 

 

लेकिन राज्य के किसी भी सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज में अब तक इसे नहीं लगाया गया है. विदित हो कि पश्चिम बंगाल में गिनती के मात्र चार ही आयुर्वेदिक कॉलेज हैं. जिनमें दो सरकारी व दो प्राइवेट हैं. वहीं एक प्राइवेट यूनानी मेडिकल कॉलेज भी है. हालांकि प्राइवेट आयुर्वेदिक कॉलेजों ने सीसीआईएम के निर्देशों का बखूबी पालन किया है. 

 

बेले शंकरपुर राजीव गांधी मेमोरियल आयुर्वेद कॉलेज एण्ड हॉस्पीटल के प्रिंसिपल डॉ तापस मंडल ने बताया कि, 'कॉलेज प्रबंधन ने अपने खर्च पर इस मशीन को इंस्टॉल कराया है. इसके लिए दो मोबाइल फोन व मशीन खरीदने में करीब 50 हजार रुपये की लागत आयी. कॉलेज के करीब 30 शिक्षकों ने भी पूरा सहयोग किया. फिलहाल मशीन से चेक इन व चेक आउट करने में काफी परेशानी हो रही है.' 

 

वहीं पश्चिम बंगाल आयुष डिपार्टमेंट के ज्वाइंट सेक्रेटरी श्यामल मंडल का कहना है कि, 'इस निर्देशिका के बारे में हमें पूरी जानकारी है. जल्द ही बायोमेट्रिक डिवायस लगा दिया जायेगा.' शैक्षणिक संस्थानों में पादर्शिता के प्रति राज्य सरकार का ढुलमूल रवैया कई सवाल खड़े करता हैं.

 

गुरुजी की भी लगेगी हाजिरी से आयुष छात्र खुश

सरकारी संस्थानों में ऐसे कुछ चिकित्सक हैं, जो बतौर शिक्षक एक साथ देश के कई मेडिकल कॉलेजों से जुड़े हुए हैं. ऐसे घोस्ट शिक्षक यानि फर्जी शिक्षकों पर नकेल कसने की सीसीआईएम की पहल का आयुष छात्रों ने तहेदिल से स्वागत किया है. कुछ छात्रों का कहना है कि कई तो ऐसे शिक्षक हैं जिनका नाम कागज पर होता है या फिर ऐसे घोस्ट प्रोफेसर हमें पढ़ाने के बदले या तो अन्य मेडिकल कॉलेज या प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे होते हैं. फ्री-फंड में हर महीने तनख्वाह ले जाते हैं. जबकि आयुष में शिक्षकों की बहुत कमी है. कम से कम अब गुरुजी! कागज से निकलकर बाहर तो दिखेंगे और हाजिरी भी लगायेंगे. 

 

बायोमेट्रिक डिवायस पर दिल्ली से रखी जायेगी नजर 

जीपीएस आधारित यह बायोमेट्रिक एटेंडेंस डिवायस आधार कार्ड से जुड़ा होगा. पहचान के तौर पर फेशियल और कॉर्निया इंप्रेशन ली जायेगी. उपस्थिति रजिस्टर की चेकिंग सीसीआईएम के अधिकारी दिल्ली में बैठकर करेंगे.

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