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bhojpur

  • Aug 21 2019 6:10AM
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आरा कोर्ट ब्लास्ट : मुख्य आरोपित लंबू शर्मा को फांसी, सात को उम्रकैद

आरा कोर्ट ब्लास्ट : मुख्य आरोपित लंबू शर्मा को फांसी, सात को उम्रकैद
चार साल बाद फैसला
आरा (भोजपुर) : आरा सिविल कोर्ट बम विस्फोट कांड में तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्रिभुवन यादव ने बुधवार को मुख्य आरोपित लंबू शर्मा को फांसी और सात आरोपितों को  उम्रकैद की सजा सुनायी है. अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक नागेश्वर दुबे व अपर लोक अभियोजक प्रशांत रंजन ने बहस की थी.  
 
अपर लोक अभियोजक रंजन व नागेंद्र सिंह ने बताया कि 23 जनवरी, 2015 को सुबह करीब 11:30 पर सिविल कोर्ट परिसर स्थित जेल हाजत के पास बम विस्फोट हुआ था,  जिसमें एक पुलिसकर्मी अमित कुमार व एक महिला नगीना देवी की मौत हो गयी थी.  बम विस्फोट के होने पर जेल से कोर्ट लाया गया कैदी लंबू शर्मा व अखिलेश उपाध्याय ने कैदी वाहन से कोर्ट हाजत जाने के दौरान भाग गये. आरोप का गठन 29 जुलाई, 2016 को हुआ था. अभियोजन की ओर से 39 गवाहों की गवाही कोर्ट में हुई थी. 
 
कोर्ट ने आरोपित पीरो निवासी लंबू शर्मा को भादवि की धारा 302 के तहत मृत्युदंड तथा आरोपित नोनार निवासी अखिलेश उपाध्याय, पावरगंज नवादा रिंकू यादव, धरहरा निवासी चांद मियां नइम मियां, कड़रा निवासी अंशु कुमार, एकवारी निवासी  प्रमोद सिंह व चौरी निवासी श्याम विनय शर्मा को उम्रकैद 307 के तहत दस वर्ष के सश्रम कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड, कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड, 115 के तहत  दस वर्ष सश्रम कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड, 120बी के तहत दो वर्ष व 353 के तहत दो वर्षों के सश्रम कैद तथा आरोपित  लंबू शर्मा व  अखिलेश उपाध्याय को 216 बी में पांच वर्ष के सश्रम कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा 224 में दो वर्षों के कैद की सजा सुनायी. 
 
वहीं  आरोपित लंबू शर्मा व अखिलेश उपाध्याय को छोड़कर शेष छह आरोपितों को विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा तीन के तहत सात वर्ष, चार के तहत दस वर्ष व पांच के तहत तीन वर्षों के कैद की सजा सुनायी. 2010 में भी आरा सिविल कोर्ट परिसर स्थित अधिवक्ता भवन में बम ब्लास्ट किया गया था, जिसमें मानव बम एवं एक अधिवक्ता विनय तिवारी की मौत हो गयी थी. जबकि आधा दर्जन अधिवक्ता जख्मी हुए थे. 
 
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