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  • Nov 8 2018 7:36AM

अमरीका मध्यावधि चुनाव 2018: हाउस में हार के बाद ट्रंप की वो मुश्किलें जो बढ़ेंगी

अमरीका मध्यावधि चुनाव 2018: हाउस में हार के बाद ट्रंप की वो मुश्किलें जो बढ़ेंगी

डोनल्ड ट्रंप

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अमरीका में मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा यानी कांग्रेस के लोवर चेंबर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर कब्ज़ा कर लिया है.

अमरीकी कांग्रेस में प्रतिनिधि सभा की कुल 435 सीटों में से 218 के बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी ने 245 के क़रीब सीटें जीती हैं.

हालांकि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बरकरार है. रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट में कुल 100 सीटों में से 51 के बजाए अब 54 सीटें मिल गई हैं.

आठ वर्षों के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में फिर से बहुमत हासिल किया है. डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता नेनसी पलोसी, जो अब प्रतिनिधि सभा में स्पीकर का पद भी संभाल सकती हैं, ने कहा कि अब डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन पर लगाम लगाएंगे.

नेनसी पलोसी का कहना था, "अब डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत के ज़रिए अमरीकी संविधान के तहत ट्रंप प्रशासन पर सारी क़ानूनी रोक लगाएगी. अब आम लोगों के हित में काम करने के लिए पार्टी काम करेगी. नए क़ानून बनाए जाएंगे और पार्टी स्वास्थ्य, शिक्षा, और अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में बढ़ चढ़कर काम करेगी."

लेकिन पलोसी ने यह भी कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी सबको साथ लेकर चलने की कोशिश ज़रूर करेगी. डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के लिए राजनीतिक तौर पर धक्का माना जा रहा है.

अभी तक राष्ट्रपति ट्रंप के दो साल में सीनेट और प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत हासिल था और प्रशासन आसानी से कई क़ानून और नीतियां मंज़ूर कराने में कामयाब रहा था. लेकिन अब ट्रंप प्रशासन के लिए ऐसा करना आसान नहीं होगा.

अब प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक पार्टी ट्रंप प्रशासन की हर नीति की गहन छानबीन कर सकती है, इससे पहले की नीतियों पर फिर से गौर कर सकती है, ख़ुद राष्ट्रपति ट्रंप के निजी व्यापार और वित्तीय मामलो की जांच कर सकती है. यहां तक कि रूस के साथ कथित तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप के संबंधों के आरोपों के बारे में भी गहन छानबीन कर सकती है.

डोनल्ड ट्रंप
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सबसे अहम बात यह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी अब प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की कार्रवाई भी शुरू कर सकती है. डेमोक्रेट्स इन चुनावों से पहले तो यह कहते रहे थे कि वह ट्रंप और ट्रंप प्रशासन की हर नीति और मामले की बारीकी से छानबीन करेगी, लेकिन अब यह देखना है कि चुनाव जीतने के बाद डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर और ख़ुद ट्रंप के रवैये को बदलने में किस हद तक असरदार साबित होंगे.

राष्ट्रपति ट्रंप ने देर रात चुनावी नतीजे काफ़ी हद तक साफ़ हो जाने क बाद एक ट्वीट में लिखा, "बहुत अच्छी कामयाबी रही...सबका धन्यवाद"शायद ट्रंप सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी को अच्छे बहुमत मिलने की ओर इशारा कर रहे थे.

रिपब्लिकन पार्टी ने इंडियाना, नॉर्थ डकोटा और मिज़ूरी जैसे प्रांतो में अहम जीत करके अब सीनेट में कम से कम 54 सीटों के साथ पकड़ मज़बूत कर ली है. अभी अरीज़ोना और मोनटेना में नतीजे नहीं आए हैं जहां कांटे की टक्कर है.

अमरीका
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प्रशासन के कुछ उच्च पदों पर नियुक्ति के लिए अधिकारियों की सीनेट में मंज़ूरी ज़रूरी होती है. इसके अलावा अदालतों के जजों की नियुक्ति भी सीनेट को मंज़ूर करना ज़रूरी होता है. इसलिए अब राष्ट्रपति ट्रंप अपने पसंद के रूढ़िवादी जजों की नियुक्ति आसानी से कर सकेंगे.

रिपब्लिकन पार्टी के अहम सीनेटर लिंडज़ी ग्रेहेम ने सीनेट में पार्टी की जीत पर संतोष जताया. उनका कहना था, "हमें सीनेट में तो बहुत अच्छी कामयाबी मिली है और हम अपना रूढ़िवादी एजेंडा आगे बढ़ा सकते हैं.

प्रतिनिधि सभा में अगर डेमोक्रेट्स हमारे साथ काम करते हैं तो ठीक नहीं तो अगर उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप पर अधिक दबाव बनाने की कोशिश की तो उसका नतीजा वह 2020 के आम चुनाव में भुगतेंगे."

उधर डेमोक्रेट्स ने गवर्नरो के चुनाव में भी कई प्रांतों में कामयाबी हासिल की है. मंगलवार को हुए मध्यावधि चुनावों में अधिकतर डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के ख़िलाफ़ अपनी नाराज़गी जताने के लिए वोट देने भारी संख्या में निकले. इसका असर चुनाव के नतीजों पर दिखा भी.

अमरीका
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दूसरी तरफ़ सीनेट की सीटों पर कामयाबी यह भी साफ़ करती है कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए रिपब्लिकन पार्टी में उनके समर्थक उनकी हिमायत में डटे हुए हैं.

उधर भारतीय मूल के जो 12 उम्मीदवार प्रतिनिधि सभा के चुनावों में शामिल थे उनमें से मौजूदा सांसदों में वॉशिंगटन प्रांत से प्रमिला जयपाल, इलिनॉय ले राजा कृष्णमूर्ति और कैलिफ़ोर्निया से रो खन्ना और अमी बेरा फिर से चुनाव जीत गए हैं.

लेकिन अरीज़ोना में दो महीला उम्मीदवार हीरल तिपिर्नेनी और अनीता मलिक चुनाव हार गई हैं. प्रांतीय स्तर पर अरीज़ोना, मिशिगन, कैंटकी जैसे प्रांतों में कई भारतीय मूल के उम्मीदवार असेंबली औऱ प्रांतीय सीनेट के चुनाव में जीत गए हैं.

वहीं दो मुस्लिम महिलाओं ने भी अमरीकी प्रतिनिधि सभा के लिए एतिहासिक जीत दर्ज की है. मिनेसोटा से सोमाली मूल की अमरीकी इलान उमर और फ़लस्तीनी मूल की अमरीकी रशीदा तालिब ने मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर अपने अपने चुनाव जीत लिए हैं.

अमरीकी मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के लोगों का दबदबा

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