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asansol

  • Aug 23 2019 1:22AM
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विरोध कर रहे ग्रामीणों पर लाठी चार्ज, छह को लिया हिरासत में

 रूपनारायणपुर :  14 साल के लंबे इंतजार के बाद गुरुवार को सालानपुर एरिया प्रबंधन ने पहाड़गोड़ा गांव की जमीन पर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की. कोलकाता उच्च न्यायालय और आसनसोल फर्स्ट कोर्ट सीनियर डिवीजन के निर्देश पर मजिस्ट्रेट सह स्थानीय बीडीओ तपन सरकार की उपस्थिति में कार्रवाई की गई.

 
 पुलिस, सीआईएसएफ और इसीएल के सुरक्षा कर्मियों ने मोहनपुर कोलियरी के विस्तार को लेकर पहाड़गोड़ा गांव में  गुरुवार को 12 आवासों को तोड़कर जमीन पर कब्जा लिया. 
 
आवासों को तोड़ने के कार्य में बाधा उत्पन्न करने वाले ग्रामीणों पर लाठियां चली. जिसमें कुछ लोगों को चोटें लगी. सरकारी कार्य में बाधा देने के आरोप में छह लोगों-  मुकुंदलाल राय, कृष्णेन्दू राय, अर्जुन राय, दामोदर राय, सौमित्र राय और संतू राय को िहरासत में िलया गया. 
 
प्रथम घर मुकुंदलाल राय का तोड़ने के दौरान ग्रामीणों के विरोध से निपटने के बाद कार्य में नये सिरे से बाधा नहीं आयी और एक के बाद एक 12 घरों को शाम तक तोड़ दिया गया. 28 डेसिमल जमीन ग्रामीणों ने रोक कर रखा था. उसपर भी प्रबंधन ने कब्जा किया. चार जेसीबी कार्य में लगे थे. चार सौ की संख्या में सुरक्षा बल के जवान अधिकारी तैनात थे.
 
क्या है पूरा मामला
सनद रहे कि सालानपुर एरिया अंतर्गत मोहनपुर कोलियरी के विस्तारीकरण को लेकर पहाड़गोड़ा गांव के अधिग्रहण के लिए वर्ष 2005 में प्रक्रिया आरम्भ हुई. रूपनारायणपुर नांदनिक हॉल में तत्कालीन एडीएम, बीडीओ और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को लेकर जन सुनवाई की थी. 
 
कुछ ग्रामीण मुआवजे की राशि को लेकर तो कुछ ग्रामीण किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देने पर अड़े रहे. जमीन न मिलने पर मोहनपुर कोलियरी पर बंदी का खतरा को देखते हुए  प्रबंधन ने केंद्र सरकार से कोल बियरिंग एक्ट (सीबीए) के तहत पहाड़गोड़ा मौजा में 57.71 एकड़ जमीन वर्ष 2012 में प्राप्त की.
 
 इस जमीन पर बसे 38 परिवारों को मुआवजा देकर जमीन पर अधिग्रहण करना था.  कंपनी ने कुल 21 परिवारों को मुआवजा देकर 27 एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया. बचे 17 परिवारों में से 12 परिवारों के बीच आपस में जमीन विवाद को लेकर टाईटल सूट का मामला आसनसोल जिला अदालत में मामला संख्या 107/2009 वर्ष 2009 से चल रहा है. 
 
जिसमें इसीएल प्रबंधन को भी प्रतिवादी बना दिया है. टाईटल सूट के मामले में वर्ष 2015 में अदालत ने निर्णय दिया कि उक्त जमीन पर किसी प्रकार की मुआवजा की राशि भुगतान नहीं किया जा सकेगा. कंपनी ने इस निर्णय को कोलकाता उच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए कहा कि जमीन सीबीए में उसे मिल चुकी है. 
 
12 परिवारों की सात एकड़ जमीन को लेकर आपसी विवाद के कारण जमीन न मिलने से माइन्स बंद होने के कगार पर है. कोलकाता उच्च न्यायालय ने तीन जुलाई 2019 को आदेश दिया उक्त जमीन की कुल मुआवजा की राशि निचली अदालत में जमा कर कंपनी जमीन पर अपना कब्जा ले सकती है. अदालत ने जमीन पर कब्जा करने में पुलिस और प्रशासन को सहयोग करने का निर्देश दिया.
 
कोर्ट के आदेश पर जमा की गयी राशि कोर्ट में
कोलकाता उच्च न्यायालय के इस आदेश पर कंपनी ने 12 परिवारों के घर और कुल जमीन का मुआवजा राशि दो करोड़ 84 लाख 60 हजार 516 रुपये संबंधित अदालत में जमा करा दिया. 31 जुलाई, 2019 को जिला अदालत के फर्स्ट कोर्ट सीनियर डिवीजन ने पुलिस और जिला प्रशासन को निर्देश जारी किया कि पहाड़गोड़ा गांव में 12 परिवारों की मुआवजा की राशि अदालत में जमा हो गयी. 
 
इसीएल प्रबंधन को जमीन पर कब्जा दिलाने में सहयोग किया जाय. यह आदेश मिलने के बाद इसीएल प्रबंधन ने पुलिस और प्रशासन को उक्त जमीन खाली कराने के लिए सुरक्षा मुहैया कराने की अपील कर पत्र लिखा. निर्धारित दिन को सीआईएसएफ और प्रबंधन के सुरक्षा कर्मी जमीन पर कब्जा लेने गए. पुलिस और प्रशासन के अधिकारी नहीं पहुंचे. ग्रामीणों के उग्र विरोध के कारण प्रबंधन को वापस लौटना पड़ा.
 
कोर्ट की अवमानना के मामले की धमकी कारगर
कम्पनी की उच्च न्यायालय की अधिवक्ता संचिता बर्मन राय में जिलाशासक, पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (वेस्ट) और सालानपुर थाना प्रभारी को नौ अगस्त 2019 को नोटिस भेजा. जिसमें उन्होंने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971 का हवाला देते हुए कहा कि उक्त मामले में कोलकाता उच्च न्यायालय के आदेश को लागू करने में लाने में जरूरी कम्पनी को जरूरी सहायता मुहैया कराने को कहा. 
 
इस नोटिस के मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आया. आदेश के आधार पर इसीएल को जमीन पर कब्जा दिलाने को लेकर गुरुवार को मजिस्ट्रेट की नियुक्ति के साथ पुलिस बल मुहैया कराया गया. 
 
स्थानीय मुकुंदलाल राय का कहना है कि उनके जमीन के बंटवारे को लेकर अदालत में मामला चल रहा है. मुआवजा की राशि सेंट्रल पर वेजेज (सीपीडब्ल्यू) 2012 के आधार पर दी जा रही है. जो काफी कम है. वे लोग इस मुआवजा को स्वीकार नहीं कर रहे है. इसके बावजूद सरकार के सहयोग से कंपनी उनलोगों को जबरन घर से बाहर निकाल दिया.
 
जिन लोगों का घर तोड़ गया
मुकुंदलाल राय, दामोदर राय, कृष्णेन्दू राय, अल्पना राय, चैतन्य राय, लीला राय, शंभूनाथ राय, चिन्मय राय, रामानुज राय, नारायण चंद्र राय, शांतिपद राय और नित्यगोपाल राय का मकान तोड़ा गया.
 
 
 
 
 
 
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