जादवपुर विश्वविद्यालय क्यों रहा है विवादों के घेरे में?

By Prabhat Khabar Digital Desk
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<p>वामपंथी छात्र संगठनों का गढ़ समझे जाने वाले कोलकाता के प्रतिष्ठित जादवपुर विश्वविद्यालय में वृहस्पितवार को बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ जो कुछ हुआ, वह अप्रत्याशित ज़रूर है, लेकिन इस विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति और हिंसा का इतिहास बहुत पुराना है. </p><p>किसी दौर में देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शुमार जादवपुर बीते पांच-छह वर्षों के दौरान अक्सर विवादों में रहा है. वह चाहे छेड़छाड़ के विरोध में 'होक कलरव' अभियान हो या 'किस ऑफ़ लव' का मुद्दा या फिर कक्षाओं का बायकॉट. </p><p>पहले टीएमसी छात्र परिषद और ख़ासकर वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बढ़ते वर्चस्व की वजह से यहां टकराव का सिलसिला चलता रहा है.</p><p>अब ताज़ा घटना ने जहां बाबुल सुप्रियो के रवैए पर सवाल खड़ा किया है, वहीं उनको बचाने के लिए राज्यपाल जगदीप धनकड़ के मौक़े पर जाने को लेकर सत्तारुढ़ टीएमसी और राज्यपाल के बीच ठन गई है. इसके साथ ही एबीवीपी के समर्थकों ने परिसर में जिस तरह तांडव मचाया और आगज़नी की, उसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. </p><p>दूसरी ओर, इस घटना पर अब सियासत तेज़ हो रही है. उस घटना के विरोध में दोनों पक्षों यानी वामपंथी छात्र संगठनों और एबीवीपी की ओर से शुक्रवार को विरोध रैली का आयोजन किया गया है. वामपंथी संगठनों ने राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री की भूमिका के विरोध में अपना आंदोलन तेज़ करने का ऐलान किया है. </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49759472?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बाबुल सुप्रियो को वामपंथी छात्रों ने घेरा, राज्यपाल ने बचाया</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-42199250?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">एकसाथ कई मोर्चों पर लड़ रही है जादवपुर यूनिवर्सिटी</a></li> </ul><h1>वामपंथी छात्र आंदोलन का गढ़</h1><p>गुरुवार की घटना के बाद शुक्रवार को विश्वविद्यालय में हालात सामान्य ज़रूर हैं लेकिन परिसर में काफ़ी तनाव है. एहतियात के तौर पर परिसर के गेट पर पुलिस का भारी इंतज़ाम है. लेकिन शुक्रवार को ज़्यादातर छात्र कक्षाओं से दूर रहे.</p><p>महानगर के बीचो बीच स्थित यह विश्वविद्यालय अपनी स्थापना के समय से ही छात्र राजनीति और हिंसा का गवाह रहा है. सत्तर के दशक में बंगाल में नक्सल आंदोलन के चरम पर विश्वविद्यालय के तत्कालीन वाइस चांसलर गोपाल सेन की परिसर में स्थित उनके आवास से महज़ सौ मीटर दूर ही हत्या कर दी गई थी.</p><p>उस समय नक्सली छात्रों ने परीक्षा के बायकॉट की अपील की थी. लेकिन सेन ऐसा नहीं करने के लिए कृतसंकल्प थे. नतीजा उनको अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. उनकी हत्या रिटायर होने से पहले दफ़्तर में आख़िरी कामकाजी दिन को हुई थी. </p><p>उसके बाद अस्सी और नब्बे के दशक में भी यह विश्वविद्लाय छात्र संघों पर क़ब्ज़े की लड़ाई के लिए सुर्ख़ियां बटोरता रहा. वाममोर्चा के 34 साल के शासन के दौरान वामपंथी संगठनों ने यहां छात्र राजनीति में अपनी जड़ें इतनी मज़बूत कर ली थीं कि वर्ष 2011 में ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद टीएमसी छात्र परिषद को भी यहां पैठ बनाने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा.</p><p>उसके बाद कभी 'किस ऑफ़ लव' अभियान तो कभी 'होक कलरव' की वजह से इस विश्वविद्यालय ने महीनों तक सुर्ख़ियां बटोरीं. उसके बाद साल 2015 में छात्रों ने तत्कालीन वाइस चांसलर अभिजीत चक्रवर्ती के इस्तीफ़े की मांग में लगभग चार महीने तक आंदोलन किया और कक्षाओं का बायकॉट किया.</p> <ul> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/11/141105_kiss_of_love_kolkata_du?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कोलकाता में सरेआम 'किस ऑफ़ लव'</a></li> <li><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/04/120414_jadavpur_professor_tb?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">जबरन कोरे पन्ने पर लिखवाया- प्रोफेसर</a></li> </ul><h1>वीसी और बाबुल सुप्रियो में कहासुनी</h1><p>एबीवीपी ने नए छात्रों के स्वागत के लिए गुरुवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक कार्यक्रम रखा था. वहां बाबुल सुप्रियो को एक कलाकार के तौर पर न्योता दिया गया था. लेकिन उनके परिसर में पहुंचते ही सैकड़ों छात्रों ने उनका घेराव कर दिया और दोनों के बीच कहासुनी होने लगी. </p><p>कुछ छात्रों ने उनके साथ धक्का मुक्की और मारपीट शुरू कर दी. इससे उनका कपड़ा फट गया. कुछ देर बाद मौक़े पर पहुंचे वाइस चांसलर सुरंजन दास के साथ भी बाबुल की कहासुनी हो गई. बाबुल ने उन पर वामपंथी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनको पहले ही मौक़े पर आना चाहिए था. </p><p>बाबुल ने दास से पुलिस बुलाने को कहा. लेकिन उन्होंने परिसर में पुलिस बुलाने से साफ़ इनकार कर दिया. बाबुल ने कहा कि वह किसी भी शर्त पर परिसर से बाहर नहीं जाएंगे. दोनों पक्षों के अड़ियल रवैए की वजह से विवाद बढ़ता रहा. यह विवाद लगभग चार घंटे तक जारी रहा. </p><p>दूसरी ओर, राज्यपाल धनकड़ ने इस मामले पर पहले वाइस चांसलर से पुलिस बुला कर केंद्रीय मंत्री को बाहर निकालने को कहा. लेकिन दास ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इस पर राज्यपाल ने उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा. </p><p>उसके बाद राज्यपाल ने मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से बातचीत की. शाम को बाबुल को बाहर निकालने परिसर में पहुंचे राज्यपाल को भी वामपंथी छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा और वे लगभग डेढ़ घंटे तक वहां फंसे रहे. बाद में दूसरे गेट से उनको बाहर निकाला गया.</p><p><a href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/05/120520_mamata_taniya_letter_ms?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">माफ़ करिएगा मैम, मैं माओवादी नहीं हूँ- तानिया</a></p><h1>एबीवीपी के सदस्यों का तांडव</h1><p>उधर, वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों की ओर से बाबुल सुप्रियो के साथ हुई मारपीट के विरोध में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने परिसर के भीतर और बाहर जम कर तांडव मचाया. उन्होंने वाम संगठन एसएफ़आई के दफ़्तर में तोड़-फोड़ और आगज़नी की और वहां दीवारों पर अपने संगठन का नाम लिख दिया. लेकिन एबीवीपी की जादवपुर विश्विवद्यालय शाखा के महासचिव सुमन दास इन आरोपों को निराधार बताते हैं. </p><p>दास कहते हैं, &quot;वामपंथी समर्थकों ने ही तोड़-फोड़ और आगज़नी की और अब इसका दोष हमारे सिर पर मढ़ रहे हैं. उलटे उन लोगों ने हमारे समर्थकों के साथ मार-पीट की है.&quot; </p><p>लेकिन हाथों में लाठी लिए वहां मौजूद लोग कौन थे? इस सवाल पर उनका दावा है कि वे इस बारे में नहीं जानते. </p><p>दूसरी ओर, एसएफ़आई ने भी बाबुल के साथ मार-पीट में हाथ होने से इनकार किया है. एसएफ़आई के एक प्रवक्ता ने कहा, &quot;इसमें हमारे संगठन के सदस्य शामिल नहीं थे.&quot; </p><p>लेकिन टीवी फुटेज में तो तमाम वामपंथी नेता ही नज़र आ रहे थे? इस सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की.</p><p>इस बीच, इस घटना पर सियासत भी तेज़ हो गई है. मुख्यमंत्री ममता के मना करने के बावजूद राज्यपाल के मौक़े पर जाने के लिए टीएमसी ने उनकी खिंचाई की है. टीएमसी महासचिव पार्थ चटर्जी कहते हैं, &quot;राज्यपाल धनकड़ बीजेपी की मदद करने विश्वविद्यालय परिसर में गए थे. हम इसकी आलोचना करते हैं.&quot; </p><h1>राज्यपाल पर बीजेपी की मदद करने का आरोप</h1><p>दूसरी ओर, राज्यपाल ने अपने एक बयान में गुरुवार की घटना के लिए राज्य में क़ानून और व्यवस्था की स्थिति और सुरक्षा एजेंसियों को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने वाइस चांसलर के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर उन्होंने (वीसी ने) समय रहते समुचित कार्रवाई की होती तो हालात बेक़ाबू नहीं होते. </p><p>टीएमसी का सवाल है कि राज्यपाल बाक़ी मुद्दों पर तो विचार व्यक्त कर रहे हैं लेकिन एबीवीपी की ओर से की गई हिंसा और आगज़नी पर उन्होंने कोई टिप्पणी क्यों नहीं की है?</p><p>विपक्षी राजनीतिक दलों ने भी इस मामले की निंदा की है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, &quot;जादवपुर विश्वविद्यालय अब तक राष्ट्रविरोधियों का अड्डा था और अब समाज विरोधियों का अड्डा बन गया है. लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन या राज्य प्रशासन में ऐसे समाज विरोधियों की पिटाई कर बाहर निकालने की हिम्मत नहीं है. यही वजह है कि परिसर में अराजकता चरम पर पहुंच गई है.&quot; </p><p>सीपीएम की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, &quot;अपने अंगरक्षकों के साथ परिसर के भीतर जाने वाले केंद्रीय मंत्री का रवैया बेहद उकसाने वाला था. बावजूद इसके विरोध जताने के लोकतांत्रिक तरीक़े हैं. इस घटना से बीजेपी को ही फ़ायदा होगा.&quot; </p><p>पार्टी के पोलितब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम कहते हैं, &quot;बीजेपी के तमाम नेता लगातार जैसी टिप्पणियां कर रहे हैं उससे छात्रों में भारी नाराज़गी थी.&quot; </p><p>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्र का कहना है, &quot;बंगाल में क़ानून और व्यवस्था की स्थिति इतनी बदहाल है कि यहां केंद्रीय मंत्री भी सुरक्षित नहीं हैं. लेकिन मंत्री के अंगरक्षकों ने छात्रों के साथ जैसा व्यवहार किया उसका भी समर्थन नहीं किया जा सकता.&quot;</p><p>बाबुल सुप्रियो के साथ हुई मारपीट के दौरान वामपंथी छात्रों के साथ कुछ ऐसे छात्र भी थे जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उनका सबंध नक्सली संगठनों से था. सीपीआई (एमएल) के प्रदेश सचिव पार्थ घोष पूरी घटना के लिए एबीवीपी को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. </p><h1>वीसी </h1><p>घोष कहते हैं, &quot;बाबुल के परिसर में पहुंचने के समय वामपंथी छात्र दूर खड़े होकर नफ़रत और ईर्ष्या की राजनीति के ख़िलाफ़ विरोध जता रहे थे. लेकिन मंत्री के धक्के से एक छात्रा के नीचे गिर जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया.&quot;</p><p>उनका दावा है कि बाबुल और उनके अंगरक्षकों ने इस घटना का सियासी फ़ायदा लूटने के लिए ही पहले छात्रों को उकसाया और फिर राज्यपाल उनको बचाने के लिए मौक़े पर पहुंच गए.</p><p>सीपीएम समर्थित जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने भी केंद्रीय मंत्री के रवैये पर अंगुली उठाई है. संघ के अध्यक्ष पार्थ प्रतिम विश्वास कहते हैं, &quot;जादवपुर जैसे विश्वविद्यालय में सबको अपने विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी है. लेकिन जिस तरह वाइस चांसलर से पुलिस बुलाने या फिर इस्तीफ़ा देने को कहा गया वह दुर्भाग्यपूर्ण है. यहां पहले कभी ऐसी कोई घटना नहीं हुई.&quot;</p><p>कला संकाय छात्र संघ के नेता देबराज देवनाथ कहते हैं, &quot;हम जादवपुर जैसे उदार संस्थान में बीजेपी, आरएसएस और एबीवीपी जैसे संगठनों को अपने विचारों का प्रचार प्रसार नहीं करने देंगे. फासीवादी ताक़तों को परिसर में नहीं रहने दिया जाएगा.&quot;</p><p>फ़िलहाल दोनों पक्षों ने कल की घटना को अपने हक़ में भुनाने के लिए कमर कस ली है. ऐसे में जादवपुर परिसर में शीघ्र सामान्य स्थित बहाल होने के आसार कम ही हैं.</p><p><strong>राज्यपाल ने दी सफ़ाई</strong></p><p>इस बीच, राजभवन से शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में राज्यपाल और जादवपुर विश्वविद्यालय के चांसलर ने कहा है कि आंदोलनरत छात्रों और लोगों द्वारा केन्द्रीय मंत्री बाबुल सु​प्रियो को लगातार बंधक बनाए रखे जाने के दौरान वाइस चांसलर और प्रो वाइस चांसलरविश्वविद्यालय छोड़ कर चले गए थे. इसके कारण उनका दौरा ज़रूरी था.</p><p>बयान में कहा गया है कि कुलपति होने के कारण सभी छात्रों के अभिभावक होने के नाते उन्होंने शिक्षा और संस्थान के हित में छात्रों से संपर्क कर यह क़दम उठाया.</p><p><strong>ये भी पढ़ें— </strong></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49690689?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">प. बंगाल: रोज़गार के मुद्दे पर वाम संगठनों और पुलिस में भिड़ंत</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49759472?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बाबुल सुप्रियो को वामपंथी छात्रों ने घेरा, राज्यपाल ने बचाया</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48055073?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">बाबुल सुप्रियो बनाम मुनमुन सेन का चुनावी घमासान</a></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong> और </strong><a 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