कॉरपोरेट कंपनियों को टैक्स में छूट पर कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया

By Prabhat Khabar Digital Desk
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<figure> <img alt="रणदीप सिंह सुरजेवाला" src="https://c.files.bbci.co.uk/022E/production/_108885500_5bdd7b66-2082-415c-be20-78d7c17dd5ac.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कॉरपोरेट कंपनियों को टैक्स में छूट देने की घोषणा की. वित्त मंत्री की घोषणा के बाद कांग्रेस की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है.</p><p>सरकार ने घरेलू कंपनियों, नयी स्थानीय विनिर्माण कंपनियों के लिये कॉरपोरेट टैक्स को कम करते हुए इसे 25.17 फ़ीसदी कर दिया है. वित्त मंत्री ने कहा कि यदि कोई घरेलू कंपनी किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं ले तो उसके पास 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प होगा. जो कंपनियां 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प चुन रही हैं, उन्हें न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान करने की ज़रूरत नहीं होगी.</p><p>सरकार के इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा ​कि सावन के अंधे की कहावत भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा सरकार के लिए सच साबित हो रही है. </p><p>सुरजेवाला ने कहा कि अर्थव्यवस्था डूब रही है, देश मंदी की मार से जूझ रहा है और कंपनियां बंद हो रही हैं. उन्होंने कहा कि जीडीपी गिर रही है, निर्यात फेल हो गया है और भाजपा के मंत्री और सरकार ये कह रहे हैं कि सब ठीक है. उनके अनुसार सब कुछ ग़लत है लेकिन यह सत्ता में कुर्सी पर बैठे हुक्मरानों को समझ नहीं आ रहा. </p><p>कांग्रेस ने मोदी सरकार पर ज़ोरदार निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार एक क़दम आगे और चार क़दम पीछे है. कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वह देश की अर्थव्यवस्था नौसिखियों की तरह चला रहे हैं.</p><p>उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा लिया गया हालिया निर्णय केवल डगमगाते संसेक्स इंडेक्स को बचाने के लिए लिया गया है. इसके निर्णय के तहत कॉरपोरेट जगत को सालाना एक लाख 45 हज़ार करोड़ रूपये की छूट दी गई है. </p><p>इसके अलावा कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पाँच सवाल पूछे.</p><p>1. कॉरपोरेट टैक्स की दरों को 30 प्रतिशत से कम कर 22 प्रतिशत और 25 प्रतिशत से कम कर 15 प्रतिशत करने से सालाना एक लाख 45 हज़ार करोड़ रूपये का नुक़सान होगा. प्रधानमंत्री जी और वित्त मंत्री जी देश को यह बताएं कि इस वित्तीय घाटे की भरपाई कहां से होगी. क्या इसके लिए एक बार फिर वेतनभोगियों, मध्यम वर्ग के लोगों, ग़रीब, किसान, छोटे दुकानदार, छोटे-छोटे व्यवसायियों पर कर लगा कर और पेट्रोल, डीज़ल, बिजली के दामों में बढ़ोतरी कर किया जाएगा. या फिर देश की मुनाफ़े वाली पीएसयू का ख़ून निचोड़ कर किया जाएगा.</p><figure> <img alt="सोनिया गांधी" src="https://c.files.bbci.co.uk/7CEA/production/_108887913_bbb95105-8db9-42f7-9955-3eae6d9441fb.jpg" height="351" width="624" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>2. क्या प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बताएंगे कि कॉरपोरेट टैक्स के तहत जो एक लाख 45 हज़ार करोड़ रूपये का सालाना छूट दिया गया है उससे जो फिस्कल डिफिसिट यानि वित्तीय घाटा जो बढ़ जाएगा उसके लिए आपके पास क्या उपाय है. अब जब ​वित्तीय घाटा सात प्रतिशत तक पहुंच जाएगा जिसका सीधा असर देश की प्रगति, देश की तरक़्क़ी और महंगाई पर पड़ेगा तो उसके लिए आपके पास क्या उपाय हैं. </p><p>3. प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बजट पास करने वाले संसद की बार-बार अवहेलना और उसे दरकिनार क्यों कर रहे हैं. 70 सालों में यह पहली सरकार है जिसने बजट पेश करने के 45 दिनों के अंदर ख़ुद के पेश किए हुए बजट को ही ख़ारिज कर दिया या संशोधन कर दिया या उसे वापस ले लिया. क्या देश की संसद और संसदीय प्रणाली की इस प्रकार व्यापक अवहेलना उचित है. </p><p>4. अगर आपको इनकम टैक्स में राहत ही देना था तो फिर इस देश के साधारण जनता, नौकरीपेशा लोगों और मध्यम वर्ग को इसमें राहत क्यों नहीं दिया गया. आज भी जब आर्थिक मंदी की मार पड़ रही है तो इसका सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग और साधारण व्यक्ति पर पड़ रहा है. तो फिर सरकार इस वर्ग को कोई राहत नहीं देती है, ऐसा क्यों. </p><p>5. क्या केवल टैक्स राहत देने से ही मंदी की मार ठीक जो जाएगी. क्या यही आपका आर्थिक ​विज़न और दृष्टि है. और अगर टैक्स राहत देने से मंदी की मार दूर हो जाती है तो फिर व्यक्तिगत इनकम टैक्स देने वाले जो लोग हैं वो 30 प्रतिशत पर टैक्स देंगे और हज़ारों-करोड़ों रूपये का मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनियां वो 22 और 15 प्रतिशत की दर से टैक्स देंगी, यह इस देश में कौन सी न्यायसंगत और उचित बात है. </p><p>ये भी पढ़ें— </p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49765655?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में रियायत की घोषणा की</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-49772019?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">साल भर में अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आएगी</a></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49541222?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">मनमोहन सिंह बोले- अर्थव्यवस्था की हालत बेहद गंभीर</a></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong> और </strong><a 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