Viral Video : नहीं-नहीं माताजी मुझे नहीं नहाना है, मां ने नहीं सुनी गुहार; सीने से खींचकर अलग किया और पटक कर नहलाया

Viral Video : बंदरों को इंसानों का पूर्वज यूं ही नहीं कहा जाता है, इसके पीछे बड़ी वजह है. इस वायरल वीडियो में मां बंदरिया जिस तरह की हरकत अपने बच्चे के साथ कर रही है, उस तरह की हरकत आम मां अपने बच्चे के साथ रोज करती रहती है.

Viral Video : सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक मां अपने सीने से चिपके बच्चे को खींचकर अलग करती है और उसे पानी में पटक कर नहलाती है. बच्चा भागने की पूरी कोशिश करता है, लेकिन मां बंदरिया उसे सफल नहीं होती है और छोटे बंदर को पानी में डुबकी लगानी ही पड़ती है. यह वीडियो Nature is Amazing द्वारा शेयर किया गया है और अबतक इस वीडियो को 5 लाख 71 हजार से अधिक लोगों ने देख लिया है.

बंदरिया अपने बच्चे को पानी में डूबा-डूबा कर नहलाती है

मात्र 23 घंटा पहले शेयर किए गए इस वीडियो को लोग काफी पसंद कर रहे हैं. दरअसल वीडियो काफी रोचक है. आमतौर पर जैसे इंसानों के बच्चे नहाने से भागते हैं और अपनी मां को बहुत परेशान करते हैं, उसी प्रकार यह बंदर भी अपनी मां को परेशान कर रहा है. वीडियो जंगल का है, जिसमें पेड़ों के आसपास कई बंदर नजर आ रहे हैं. पेड़ों के पास ही एक छोटा तालाब नजर आ रहा है, जिसके किनारे पर बैठकर मां बंदरिया अपने बच्चे को खींचकर खुद से अलग करती है और बच्चे को पानी में डुबोती है. बच्चा बंदर भागने की पूरी कोशिश करता है, लेकिन बंदिरया उसे भागने नहीं देती है और उसे पानी में डूबा-डूबा कर नहलाती है.

बंदर करते हैं इंसानों की नकल

आमतौर पर बंदर को इंसानों की नकल करने वाला जानवर बताया जाता है. बचपन में बंदर और टोपी वाली कहानी सबने पढ़ी होगी, जो इस बात को पुख्ता करते हैं. लेकिन इस वायरल वीडियो को देखने के बाद तो आपको पक्का यकीन हो जाएगा कि बंदर इंसानों की नकल करता है. कई बार छोटे बच्चे जो नहाने से मना करते हैं उन्हें उनकी मां इसी तरह से जबरदस्ती नहलाती है, जहां बच्चा भागने की कोशिश करता है, लेकिन वह मां की गिरफ्त से बच नहीं पाता है. इस वीडियो को खूब पसंद किया जा रहा है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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