Viral Video : पार्टनर को इंप्रेस करने के लिए अपने औरा का ऐसा इस्तेमाल, हैरान कर देगा आपको

Viral Video : अपनी मादा साथी को इंप्रेस करने के लिए हिमालयन मोनाल अपनी खूबसूरत पंखों को फैलाकर कोर्टशिप डांस करता है. उसकी ख्वाहिश यह होती है कि मादा मोनाल उसके डांस से प्रभावित होकर उसे अपना जोड़ीदार बना ले. हिमालयन मोनाल का यह डांस इतना सुंदर होता है कि देखने वाला बस वाह-वाह करता रह जाता है.

Viral Video : अपने पार्टनर को इंप्रेस करने के लिए इंसान तो नए-नए आइडियाज निकालते ही हैं, जानवर भी कम जुगत नहीं भिड़ाते हैं. सोशल मीडिया में एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक हिमालयन मोनाल पक्षी अपनी मादा को प्रेम के लिए आकर्षित करने के लिए आकर्षक डांस कर रहा है. हिमालयन मोनाल तीतर प्रजाति का पक्षी है, जो भारत, नेपाल और भूटान में हिमालय के इलाकों में पाए जाते हैं.

हिमालयन मोनाल का कोर्टशिप डांस देखकर रह जाएंगे दंग

हिमालयन मोनाल एक रंगीन पक्षी है, जिसके पंख बहुत ही खूबसूरत होते हैं. वायरल वीडियो में नर मोनाल अपनी मादा के सामने एक बहुत ही खूबसूरत नृत्य पेश कर रहा है. हिमालयन मोनाल अपने प्रजनन काल के वक्त अपनी मादा को रिझाने के लिए इस तरह का नृत्य करते हैं. नर बहुत ही खूबसूरत होता है और उसके पंख रंगीन होते हैं. अपने इन्हीं पंखों को फैलाकर वह खूबसूरत तरीके से डांस कर रहा है और यह बताने की कोशिश कर रहा है कि वह कितना प्रभावशाली है. हालांकि मादा मोनाल उसकी ओर विशेष ध्यान देती नजर नहीं आ रही है, लेकिन नर अपने औरा का प्रदर्शन कर रहा है.

कोर्टशिप डांस का क्या होता है असर

नर मोनाल अपने ब्रीडिंग सीजन यानी प्रजनन काल के वक्त में ही कोर्टशिप डांस करता है. यह समय अप्रैल से जून के वक्त का होता है. उस समय हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने लगते हैं और मौसम अच्छा हो जाता है. घास, पौधे और फूल नजर आने लगते हैं. मौसम के सुंदर रूप का फायदा मोनाल भी उठाता है और अपनी मादा को आकर्षित करने के लिए अपने नीले, हरे और भूरे पंखों को फैलाकर बहुत ही खूबसूरत नृत्य करता है. वह मादा के आसपास और चारों ओर मादक आवाज निकालकर नृत्य करता है, ताकि मादा उसे जोड़ी बनाने के लिए स्वीकृति दे दे. जब मादा को नर मोनाल का नृत्य पसंद आता है, तो वह उसके साथ जोड़ी बनाती है और वे प्रजनन करते हैं.

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Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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