Uttarakashi Tunnel Collapse: सुरंग के अंदर वॉकी-टॉकी से भोजपुरी में हुई बात, पाइप से पहुंचाया जा रहा है खाना

Uttarakashi Tunnel Collapse: मंगलवार रात साढ़े 12 बजे तक मलबे में माइल्ड स्टील पाइप डालने के लिए ड्रिलिंग का काम किया जा रहा था, लेकिन भूस्खलन होने की वजह से इसे रोकना पड़ा. आज सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने में सफलता मिल सकती है. जानें वहां का ताजा हाल

Uttarakashi Tunnel Collapse: उत्तराखंड में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग के एक हिस्से के ढहने के बाद से वहां राहत बचान कार्य जारी है. रविवार सुबह यह हादसा हु आ था. पिछले तीन दिन से उसके अंदर फंसे 40 मजदूरों को निकालने का काम जारी है. इस बीच खबर आ रही है कि ‘एस्केप टनल’ बनाने के लिए शुरू की गई ड्रिलिंग को ताजा भूस्खलन की वजह से रोकना पड़ा है. एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि ढही सुरंग के अंदर बचाव कार्य में शामिल अधिकारी फंसे हुए मजदूरों से लगभग हर घंटे बात करके लगातार संपर्क बनाने में कामयाब रहे हैं. सिल्कयारा सुरंग के अंदर बचाव प्रयासों की निगरानी कर रहे एसडीआरएफ कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि सभी कर्मचारी ठीक हैं और स्वास्थ्य के लिहाज से भी खबर अच्छी है. मैंने उनसे दिन भर में कई बार बात की है.

सुरंग के अंदर बिजली, भेजे जा रहे हैं राशन

एसडीआरएफ कमांडेंट मणिकांत मिश्रा ने कहा कि मैंने झारखंड के कुछ श्रमिकों से बातचीत की. मैंने उन्हें शांति के साथ रहने को कहा है और उनका उत्साह बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि मैंने मजदूरों से भोजपुरी में बात की और उन्हें बताया कि उन्हें जल्द ही सुरक्षित निकाल लिया जाएगा. हमने सुरंग में फंसे मजदूरों को यह भी बताया कि सभी विशेषज्ञ और इंजीनियर यहां हैं और उन्हें बचाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं. खबरों की मानें तो एहतियात के तौर पर एसडीआरएफ ने पानी के पाइप के जरिए सुरंग के अंदर सिरदर्द और बुखार की दवाएं भी भेजी हैं. यही नहीं फंसे लोगों को सूखे मेवे सहित सूखा राशन भी भेजने का काम किया गया है. एक अधिकारी ने कहा कि फंसे हुए श्रमिकों के परिजन भी उनसे वॉकी-टॉकी पर बात कर रहे हैं. एसडीआरएफ कमांडेंट ने यह भी बताया कि सुरंग के अंदर बिजली है, जिससे उन अफवाहों पर विराम लग गया है कि फंसे हुए कर्मचारी अंधेरे से जूझ रहे हैं.

फंसे हुए मजदूरों को बुधवार तक निकाल लिया जाएगा

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में एक निर्माणाधीन सुरंग के मलबे में फंसे 40 मजदूरों को बचाने के लिए लगभग 70 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद, अधिकारियों को उम्मीद है कि फंसे हुए सभी मजदूरों को आज निकालने में कामयाबी मिल सकती है. अंग्रेजी वेबसाइट हिंदुस्तान टाइम्स ने जो खबर प्रकाशित की है वो उत्तरकाशी के जिला मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला की बातचीत का है. बातचीत में अभिषेक रुहेला ने बताया कि यदि सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो फंसे हुए मजदूरों को बुधवार तक निकाल लिया जाएगा.

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इस बीच न्यूज एजेंसी पीटीआई ने खबर दी है कि उत्तरकाशी में अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार रात साढ़े 12 बजे तक मलबे में माइल्ड स्टील पाइप डालने के लिए ड्रिलिंग का काम किया जा रहा था, लेकिन भूस्खलन होने की वजह से इसे रोकना पड़ा. इस बीच, सिलक्यारा सुरंग में ड्रिलिंग के लिए स्थापित की गई आगर मशीन भी खराब होने की सूचना है. इससे पहले मंगलवार रात को भी सुरंग में भूस्खलन होने से बचाव कार्यों में जुटे दो मजदूर मामूली रूप से घायल हो गए थे.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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