Covishield Vaccine: एस्ट्राजेनेका का बड़ा फैसला, दुनिया भर से वापस मंगा रही अपनी कोरोना वैक्सीन

Published by : Pritish Sahay Updated At : 08 May 2024 10:19 AM

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Covishield Vaccine

Covishield Vaccine: एस्ट्राजेनेका कंपनी ने ऐलान किया है कि वो दुनियाभर से अपना कोरोना का टीका वापस मंगाएगी,. एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन वापसी की बात ऐसे समय में कही है जब वैक्सीन से खून में थक्का जमने की संभावना जताई गई है.

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Covishield Vaccine: एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन को लेकर जारी चिंता के बीच कंपनी ने बुधवार को बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने दुनिया भर से अपने टीकों को वापस लेने की बात कही है. एस्ट्राजेनेका कंपनी ने कहा है कि वह यूरोप से वो अपनी वैक्सीन वापस लेगी. बता दें यूरोप में एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन वैक्सजेवरिया नाम से दी जा रही है. जबकि, भारत में इसे कोविशील्ड के नाम से जाना जाता है. एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन वापसी की बात ऐसे समय में कही है जब हाल के दिनों में इसको लेकर बवाल मचा है. वैक्सीन से खून में थक्का जमने की संभावना जताई गई है. बता दें, भारत में भी अधिकांश लोगों को कोविशील्ड का ही टीका लगा है.

एस्ट्राजेनेका बंद कर रही है वैक्सीन की सप्लाई
ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने दुनिया भर में अपनी कोविड-19 वैक्सीन की खरीद और बिक्री बंद करने का फैसला किया है. गौरतलब है कि इससे पहले एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटेन की कोर्ट में यह बात माना था कि इस वैक्सीन के साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जिसके खून का थक्का जमना शामिल है. इस कारण पीड़ित व्यक्ति को स्ट्रोक, दिल का दौरा जैसे गंभीर खतरे हो सकते हैं.

कंपनी ने वैक्सीन वापसी का बताया यह कारण
वहीं, एस्ट्राजेनेका कंपनी का कहना है कि यूरोप से टीकों को वापस मंगाने का कारण टीकों की अधिकता है. उनका कहना है कि अत्यधिक सप्लाई होने के कारण वैक्सीन की मांग काफी कम हो गई है. ऐसे में कंपनी ने फैसला किया है कि वो अपने टीकों को वापस लेगी. हालांकि कई लोगों ने वैक्सीन के खिलाफ मामले दर्ज किये हैं. उनका कहना है कि टीका लेने के बाद उन्हें कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है.

एस्ट्राजेनेका के खिलाफ 51 मामले दर्ज
बता दें, एस्ट्राजेनेका पर टीके के दुष्प्रभाव को लेकर 51 मामले दर्ज किए गए हैं. केस करने वाले लोगों के प्रतिनिधित्व लॉ फर्म ली डे ने कहा है कि 51 वादियों में शामिल 12 ने अपने प्रियजनों को खो दिया है. लॉ फर्म में साझेदार सारा मूर ने इस बारे में कहा है कि सभी वादियों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र या मेडिकल साक्ष्य हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि टीके के कारण मौतें हुईं या शरीर को नुकसान पहुंचा. उन्होंने यह भी कहा कि एस्ट्राजेनेका को यह स्वीकार करने में एक साल लग गया कि उसके टीके ने यह नुकसान पहुंचाया, जबकि 2021 के अंत से क्लिनिकल समुदाय में यह तथ्य व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया गया था.

दिल का दौरा पड़ने का खतरा
गौरतलब है कि ब्रिटेन स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार ब्रिटिश कोर्ट में स्वीकार किया है कि उनके कोविड टीका रक्त के थक्के जमाने संबंधी दुष्प्रभाव उत्पन्न कर सकता है. एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया था कि कोविड-19 से बचाव के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा ईजाद किया गया टीका बहुत दुर्लभ मामलों में रक्त को थक्के जमा सकता है और प्लेटलेट की संख्या को घटा सकता है. इसी कड़ी में ‘द डेली टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के अनुसार 51 वादियों द्वारा एक सामूहिक कार्रवाई के अनुरोध पर फरवरी में लंदन स्थित हाईकोर्ट में एक कानूनी दस्तावेज सौंपा गया था. 

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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