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महिलाओं में गर्भपात और मृत शिशु के जन्म के बाद बढ़ रहा है स्ट्रोक का खतरा, जानिए कारण और बचाव

एक नए शोध में पता चला है कि जिन महिलाओं का गर्भपात हो गया हो या जिन्हें मृत शिशु पैदा हुआ हो उन्हें स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. स्ट्रोक होने से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, जितना संभव हो उतना स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, धूम्रपान छोड़ना, शराब का अधिक सेवन नहीं करना और नियमित व्यायाम करना.

By Prabhat khabar Digital
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Risk Of Stroke In Women
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जिन महिलाओं का गर्भपात हो गया हो या जिन्हें मृत शिशु पैदा हुआ हो उन्हें स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है और यह जोखिम प्रत्येक गर्भपात या मृत शिशु जन्म के साथ बढ़ता है. गीता मिश्रा, चेन लियांग और जेनी डौस्ट, क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के नए शोध में इसका पता चला है. स्ट्रोक वह स्थिति है, जब धमनी (Artery) के अवरूद्ध या फटने के कारण मस्तिष्क तक रक्त नहीं पहुंच पाता है. इस कड़ी को स्थापित करने का प्रयास कठिन है, क्योंकि इसके लिए लंबी अवधि में बड़ी संख्या में महिलाओं का अध्ययन करने और महिलाओं के अनुभवों पर विश्वसनीय डेटा रखने की आवश्यकता होती है.

इन कारणों से बढ़ता है स्ट्रोक का जोखिम

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की ओर से आज प्रकाशित अध्ययन, गर्भावस्था के नुकसान और स्ट्रोक के बीच की कड़ी को निर्णायक रूप से दिखाने वाला पहला है. कई महिलाएं इस बात से अनजान होती हैं कि गर्भावस्था के दौरान उनके अनुभव बाद में होने वाले स्वास्थ्य खतरों का शुरुआती संकेत हो सकते हैं. हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि उनके डॉक्टरों को बढ़ते जोखिम के प्रति सतर्क रहना चाहिए. यह संभव है कि बांझपन, गर्भपात, और मृत शिशु जन्म अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है. इनमें अंतःस्रावी विकार (कम एस्ट्रोजन या इंसुलिन प्रतिरोध), सूजन, एंडोथेलियल कोशिकाओं के साथ समस्याएं, जो रक्त प्रवाह में सहायता करती हैं. मनोवैज्ञानिक विकार, अस्वास्थ्यकर व्यवहार (जैसे धूम्रपान) या मोटापा शामिल हो सकते हैं.

32 से 73 साल की महिलाओं को स्ट्रोक का ज्यादा खतरा

यह शोध 618,851 महिलाओं के एकत्रित डेटा पर आधारित है, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, नीदरलैंड, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका में आठ अलग-अलग अध्ययनों में भाग लिया. महिलाओं की उम्र 32 से 73 के बीच थी, जब उन्हें पहली बार इस अध्ययन में नामांकित किया गया था और उनका औसतन 11 साल तक अध्ययन किया गया था. अध्ययन से पता चला कि जिस समय उनका अध्ययन किया गया, उस समय 9,265 (2.8%) महिलाओं को कम से कम एक गैर-घातक स्ट्रोक था और 4,003 (0.7%) महिलाओं को घातक स्ट्रोक हुआ था.

तीन से ज्यादा गर्भपात पर स्ट्रोक का खतरा अधिक

कुल मिलाकर, 91,569 (16.2%) महिलाओं का गर्भपात का इतिहास रहा है, जबकि 24,873 (4.6%) का मृत शिशु जन्म का इतिहास रहा है. उन महिलाओं में, जो कभी गर्भवती हुई थीं, जिन महिलाओं ने गर्भपात की सूचना दी थी, उनमें गर्भपात न होने वाली महिलाओं की तुलना में गैर-घातक स्ट्रोक का 11% अधिक जोखिम और घातक स्ट्रोक का 17% अधिक जोखिम था. प्रत्येक गर्भपात के साथ जोखिम बढ़ता गया, जिससे तीन या अधिक गर्भपात वाली महिलाओं में गैर-घातक स्ट्रोक का 35% अधिक जोखिम था (प्रति 100,000 ''व्यक्ति वर्ष'' की घटना दर से 58 प्रति 100,000 तक) और 82% अधिक जोखिम उन महिलाओं की तुलना में घातक स्ट्रोक (11.3 प्रति 100,000 व्यक्ति वर्ष से 18 प्रति 100,000तक) में, जिनका कभी गर्भपात नहीं हुआ था.

मृत शिशु जन्म ने भी स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाया

मृत शिशु जन्म ने भी स्ट्रोक के खतरे को काफी बढ़ा दिया. उन महिलाओं में, जो कभी गर्भवती हुई थीं, जिन महिलाओं का मृत शिशु जन्म का इतिहास था, उनमें गैर-घातक स्ट्रोक का जोखिम 31% अधिक था (प्रति 100,000 व्यक्ति वर्ष में 42 की दर से 69.5 प्रति 100,000 तक) और घातक स्ट्रोक होने का 7% अधिक जोखिम था. इसी तरह, मृत शिशु जन्म की संख्या जितनी अधिक होगी, बाद के स्ट्रोक का जोखिम उतना ही अधिक होगा, जिन महिलाओं में दो या दो से अधिक मृत शिशु पैदा हुए थे, उनमें घातक स्ट्रोक का 26% अधिक जोखिम था (11 प्रति 100,000 व्यक्ति वर्ष से बढ़कर 51.1 प्रति 100,000). स्ट्रोक उपप्रकारों के साथ संबंध दिखाने वाला यह पहला अध्ययन है: स्टिलबर्थ को गैर-घातक इस्केमिक (ब्लॉकेज) स्ट्रोक या घातक रक्तस्रावी (रक्तस्राव) स्ट्रोक से जोड़ा गया, जबकि गर्भपात स्ट्रोक के दोनों उपप्रकारों से जुड़े थे.

इन कारणों की वजह से होता है स्ट्रोक

शोध के मुताबिक महिलाओं में स्ट्रोक के बढ़ने का कारण बॉडी मास इंडेक्स, महिलाएं धूम्रपान करती हैं या नहीं, उन्हें उच्च रक्तचाप या मधुमेह था. संख्याओं को जातीयता और शिक्षा स्तर के लिए भी समायोजित किया गया था. जोखिम कारकों के लिए समायोजन करके, हम महिलाओं के गर्भपात या मृत शिशु जन्म की संख्या से जुड़े संभावित जोखिम को अलग कर सकते हैं. महिलाओं और उनके डॉक्टरों को इस जानकारी के साथ क्या करना चाहिए? जब डॉक्टर हृदय स्वास्थ्य जांच करते हैं, तो वे हृदय रोग के जोखिम को समग्र रूप से देखते हैं, यानी हृदय रोग, हृदय गति रुकना और स्ट्रोक. इन जोखिमों पर विचार करके, डॉक्टर भविष्य की बीमारी के जोखिम का आकलन और भविष्यवाणी करते हैं. वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई दिशानिर्देश सलाह देते हैं कि 45 से 74 वर्ष की आयु के लोगों के लिए या 30 वर्ष की आयु के बाद से आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों की नियमित रूप से हृदय स्वास्थ्य जांच की जानी चाहिए. यही वह समय होता है, जब हृदय रोग का खतरा बढ़ना शुरू हो जाता है.

स्ट्रोक में ले सकते हैं ये दवा

दिशा-निर्देश दवा (रक्तचाप की दवा और/या लिपिड कम करने वाली दवा जैसे स्टैटिन) की सलाह देते हैं, जब अगले पांच वर्षों में हृदय रोग का जोखिम 15% से अधिक हो. इन दिशा-निर्देशों को वर्तमान में ऑस्ट्रेलियन क्रॉनिक डिजीज प्रिवेंशन एलायंस (जिसमें कैंसर काउंसिल ऑस्ट्रेलिया, डायबिटीज ऑस्ट्रेलिया, किडनी हेल्थ ऑस्ट्रेलिया, नेशनल हार्ट फाउंडेशन ऑफ ऑस्ट्रेलिया और स्ट्रोक फाउंडेशन शामिल हैं) द्वारा अपडेट किया जा रहा है.

स्ट्रोक से बचने का तरीका

कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके हृदय रोग का खतरा कितना भी है. स्ट्रोक होने से बचने का सबसे अच्छा तरीका है, जितना संभव हो उतना स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, धूम्रपान छोड़ना, पांषक आहार लेना, शराब का अधिक सेवन नहीं करना और नियमित व्यायाम करना. ये जीवनशैली हर किसी के लिए हृदय रोग के जोखिम को कम करती है, लेकिन डॉक्टरों को विशेष रूप से उन लोगों की मदद करने के लिए मेहनत करनी होगी, जो दीर्घकालिक जोखिम में हैं. हमारे शोध से पता चलता है कि गर्भपात और मृत शिशु जन्म इस बात का संकेत हैं कि एक महिला को हृदय रोग का खतरा बढ़ गया है. जब कोई महिला अन्य जोखिम कारक विकसित करती है, जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह या उच्च कोलेस्ट्रॉल, तो उन्हें आगे जाकर हृदय रोग हो सकता है. जिन महिलाओं को गर्भपात या मृत शिशु जन्म का अनुभव हुआ है, उन्हें अपने डॉक्टर से इन पर चर्चा करनी चाहिए. यह जानते हुए कि आपको स्ट्रोक का अधिक जोखिम है, आपके स्वास्थ्य की निगरानी करने और जीवन शैली में बदलाव करना जरूरी है. डाक्टर को महिलाओं के प्रजनन इतिहास के बारे में पूछने की जरूरत है और स्ट्रोक जोखिम की संभावित भविष्यवाणियों के रूप में बार-बार गर्भपात और मृत शिशु जन्म के बारे में पता होना चाहिए. (भाषा)

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