दुनिया में भारत की छवि खराब करने की कहीं साजिश तो नहीं रच रहा WHO? चीन के वुहान वायरस का नहीं करता कभी जिक्र
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 12 May 2021 12:21 PM
चीन के वुहान शहर से फैले इस कोरोना संक्रमण को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे कोरोना की जगह वुहान वायरस कहकर संबोधित करते थे या चीनी वायरस कहते थे, उन्होंने स्पष्ट तौर पर इस संक्रमण के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया लेकिन अब डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट में भारत का जिक्र है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे कोरोना संक्रमण का भारतीय वेरियंट अब दुनिया भर में फैल रहा है.
दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के इस फैलाव के लिए जिम्मेदार चीन अब संक्रमण की तबाही के आरोपों से पल्ला झाड़ रहा है, दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया है कि कोरोना संक्रमण का इंडियन वेरिएंट दुनिया के कई देशों में फैल रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं भारत को बदनाम करने की साजिश तो नहीं है ?
चीन के वुहान शहर से फैले इस कोरोना संक्रमण को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसे कोरोना की जगह वुहान वायरस कहकर संबोधित करते थे या चीनी वायरस कहते थे, उन्होंने स्पष्ट तौर पर इस संक्रमण के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया लेकिन अब डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट में भारत का जिक्र है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे कोरोना संक्रमण का भारतीय वेरियंट अब दुनिया भर में फैल रहा है.
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डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह वेरिएंट 44 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. कोरोना का B.1.617 वेरिएंट भारत में सबसे पहले अक्टूबर के महीने में सामने आया था. डब्ल्यूएचओ की यह रिपोर्ट इसलिए ज्यादा चर्चा में है कि इन देशों में कोरोना संक्रमण के फैलवा के लिए भारतीय वेरिएंट को जिम्मेदार ठहराया गया है.
चीन में संक्रमण के बाद आये सुधार की स्थिति को लेकर डब्ल्यूएचओ ने इसकी जमकर तारीफ की थी और कहा था कि दुनिया के देशों को वुहान से सीखना चाहिए कि किस तरह से वायरस के केंद्रबिंदु होने के बावजूद वहां पर सामान्य स्थिति बहाल की गयी है.
ट्रंप खुलकर डब्ल्यूएचओ के खिलाफ बोलते रहे उन्होंने यहां तक कह दिया था कि डब्ल्यूएचओ चीन की पीआर एजेंसी की तरह काम कर रही है. इस महामारी के लिए जर्मनी, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने सीधे- सीधे चीन को जिम्मेदार ठहराया लेकिन डब्ल्यूएचओ ने खुलकर इस मामले पर कुछ नहीं कहा अब भारत के वेरिएंट को जोड़कर नये आंकड़े जारी किये जा रहे हैं जिससे भारत की छवि पर असर पड़ सकता है.
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किसी भी वायरस में म्यूटेशन का होना स्वाभाविक है. इसी के माध्यम से हर बार वह अपने आप को बढ़ाता है हालांकि कई बार वह खुद को कॉपी करने में गलती करता है और वायरस खत्म हो जाता है लेकिन म्यूटेशन अपने पूर्ववर्ती की तुलना में कोशिकाओं को बांधने और प्रवेश करने से या पहले से मौजूद प्रतिरक्षा को थोड़ा बेहतर करने में सफल हो जाता है. इससे यह और खतरनाक हो जाता है. यह एंटीबॉडी बनने से रोकता है. कुछ शोघ में यह भी पता चला है कि यह वैक्सीन से डिवेलप हुई एंटीबॉडी से भी बच निकलने की ताकत रखता है.
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