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भारत में कोरोना की दूसरी लहर का व्यापक प्रभाव, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने उठाए सवाल

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
भारत में कोरोना की दूसरी लहर का व्यापक प्रभाव
भारत में कोरोना की दूसरी लहर का व्यापक प्रभाव
पीटीआई फाइल फोटो

WHO On Corona 2nd Wave In India भारत में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंगलवार को भारत में कोरोना की दूसरी लहर के जारी कहर के बीच तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या को लेकर बड़ी बात कही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत में कोरोना वायरस के व्यापक प्रभाव के पीछे लोगों के अस्पताल भागने की अनावश्यक कोशिशों को जिम्मेदार ठहराया है.

डब्लूएचओ ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के लिए अस्पतालों में भीड़, ज्यादा संक्रामक कोरोना वायरस के न्यू स्ट्रेन और कम रफ्तार के साथ कोविड वैक्सीनेशन जिम्मेदार हैं. संगठन ने कहा कि लोगों के अस्पताल भागने की जल्दबाजी और भीड़ भरी सभाओं ने इसे बेकाबू कर दिया है. गौर हो कि डब्ल्यूएचओ की ओर से कोरोना महामारी के समय भारत को क्रिटिकल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे है. इनमें चार हजार ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर्स भी शामिल हैं. जिनके इस्तेमाल के लिए सिर्फ इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत होगी.

इधर, भारत में कोरोना वायरस से सक्रमित होकर मरने वालों लोगों का आंकड़ा दो लाख को टच करने जा रहा है. इन सबके बीच, कई राज्यों में अस्पतालों के भीतर बेड मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड उपलब्ध नहीं हैं. अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के मद्देनजर कोरोना वायरस से सक्रमित मरीजों को वापस लौटा दिया जा रहा है. डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से पीड़ित कुल लोगों में सिर्फ पंद्रह प्रतिशत को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है और इनमें से भी बहुत कम को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है.

तारिक जसारेविक ने कहा कि भारत में समस्या यह है कि लोग इलाज के लिए मरीजों को लेकर बड़ी तेजी से अस्पताल भाग रहे हैं. क्योंकि, उन्हें सही सूचना नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि घर पर रहकर भी कोरोना संक्रमित मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज हो सकता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में जो स्थिति है, ऐसा किसी भी अन्य देश में हो सकता है. इस स्थिति से बचने के लिए अस्पतालों में भीड़ नहीं लगाने के साथ ही वैक्सीनेशन की रफ्तार को तेज करने से कोरोना वायरस के न्यू स्ट्रेन के प्रभाव को कम किया जा सकता है.

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