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कांग्रेस में शामिल पूर्व जज ने नीरव मोदी के लिए लंदन कोर्ट में दी गवाही, बीजेपी ने राहुल गांधी को घेरा

Updated at : 14 May 2020 1:20 PM (IST)
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कांग्रेस में शामिल पूर्व जज ने  नीरव मोदी के लिए लंदन कोर्ट में दी गवाही, बीजेपी ने राहुल गांधी को घेरा

भगोड़े हीरा कोराबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की लंदन की एक अदालत में चल रही सुनवाई को लेकर देश में सियासी घमासान तेज हो गयी है. कांग्रेस में शामिल बंबई और इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज अभय थिप्से की नीरव के पक्ष में गवाही देने के बाद से इस मामले ने तूल पकड़ ली है

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भगोड़े हीरा कोराबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की लंदन की एक अदालत में चल रही सुनवाई को लेकर देश में सियासी घमासान तेज हो गयी है. कांग्रेस में शामिल बंबई और इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज अभय थिप्से की नीरव के पक्ष में गवाही देने के बाद से इस मामले ने तूल पकड़ ली है. भाजपा इस मामले को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर ले लिया है.

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भाजपा ने कहा है कि नीरव मोदी के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही में कांग्रेस के एक सदस्य, उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बचाव पक्ष के गवाह के तौर पर पेश हुए, यह विपक्षी पार्टी का असली चेहरा दिखाता है. केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस की ओर से एक पूर्व न्यायाधीश ब्रिटेन में न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए काम कर रहे हैं, हमारी जांच एजेंसी प्रभावी तरीके से इसका जवाब देगी.

अभय थिप्से की इस गवाही पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट किया. उन्होंने कहा, ‘यहां भारत में राहुल गांधी नीरव मोदी को लेकर सरकार से सवाल पूछते हैं दूसरी तरफ राहुल के खास एवं कांग्रेस के अभय थिप्से (पूर्व जज) नीरव मोदी के पक्ष में गवाह बनते हैं. आखिर क्या है जो राहुल नहीं चाहते कि नीरव भारत आए. उस रात पार्टी में राहुल और नीरव में क्या लेन-देन हुई थी?

अभय थिप्से ने गवाही में क्या कहा 

टीओआई के मुताबिक, अभय थिप्से ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिए गवाही में लंदन की कोर्ट को बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो के नीरव पर लगाए गए आरोप भारतीय कानूनों के तहत नहीं टिक पाएंगे. अभय थिप्से ने कहा, भारतीय कानून के मुताबिक जब तक कि किसी के साथ धोखा न हो, तब तक धोखाधड़ी नहीं होगी. धोखाधड़ी के अपराध में धोखा अनिवार्य हिस्सा है. अगर एलओयू जारी होने से किसी के साथ धोखा नहीं हुआ है तो किसी कॉर्पोरेट बॉडी के साथ धोखाधड़ी का सवाल ही नहीं है. बैंक के अधिकारियों को एलओयू जारी करने का जो अधिकार दिया गया है, उसे प्रॉपर्टी नहीं कहा जा सकता और उन्हें संपत्ति के साथ सुपुर्द करने के लिए भी नहीं कहा जा सकता. लिहाजा यह भरोसा तोड़ने वाला अपराध नहीं हो सकता.

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