नरेंद्र मोदी ने की आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत कहा, विकास की प्रक्रिया में बदलाव की आवश्‍यकता

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नयी दिल्‍ली : नरेंद्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में सांसद आदर्श ग्राम योजना का की शुरुआत की. प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार केन्‍द्र सरकार सांसदों को अपने क्षेत्र के गावों के विकास के लिए प्रेरित कर रही है. उसी प्रकार राज्‍य सरकारें भी पहल करें और विधायक आदर्श ग्राम योजना चलाये. मोदी ने […]

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नयी दिल्‍ली : नरेंद्र मोदी ने आज विज्ञान भवन में सांसद आदर्श ग्राम योजना का की शुरुआत की. प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार केन्‍द्र सरकार सांसदों को अपने क्षेत्र के गावों के विकास के लिए प्रेरित कर रही है. उसी प्रकार राज्‍य सरकारें भी पहल करें और विधायक आदर्श ग्राम योजना चलाये. मोदी ने कहा कि समय के साथ विकास की प्रक्रिया में बदलाव की आवश्‍यकता है. आजादी के बाद जितनी भी सरकारें बनीं है सभी ने अपने-अपने तरीके से गांवों के विकास के लिए काम किये हैं. उन्‍होंने कहा कि सरकार की योजनाओं से अलग भी कोई चीज है जो हमें विकास से जोड़ती है. इसका उदाहरण हर राज्‍य में पांच-छह गांवों के रूप में देखा जा सकता है.

इस योजना के तहत प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के एक गांव ककरहिया को गोद लेंगे. प्रधानमंत्री ने लाल किले के प्राचीर से 15 अगस्‍त को इस बात की घोषणा की थी. आज लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर इस योजना का शुभारंभ किया गया. प्रधानमंत्री 14 अक्‍टूबर को ककरहिया गांव का दौरा कर सकते हैं. प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इस गांव को गोद लेने की बात से ग्रामीणों में खासा उत्‍साह है. प्रधानमंत्री के साथ-साथ भाजपा के कई सांसदों ने भी आज ही के दिन अपने संसदीय क्षेत्र के किसी गांव को गोद लेंगे और एक साल के अंदर उस गांव का विकास करेंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर सांसद वर्ष 2019 तक तीन गांवों में बुनियादी एवं संस्थागत ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी उठाएंगे. इसका उद्देश्य गांवों में रहने वाले लोगों को उन्नत बुनियादी सुविधाएं और बेहतर अवसर मुहैया कराना है. महात्मा गांधी के सिद्धांतों एवं मूल्यों से प्रेरित होकर इस योजना के तहत राष्ट्रीय गौरव, देशभक्ति, सामुदायिक भावना एवं आत्मविश्वास के मूल्यों को अपनाने और आवश्यक ढांचा विकसित करने पर भी समान जोर दिया गया है.

इस योजना के तहत हर सांसद को मार्च 2019 तक तीन आदर्श गांवों को विकसित करना है जिनमें से एक आदर्श गांव को वर्ष 2016 तक विकसित किया जाना है. इसके बाद पांच ऐसे आदर्श गांवों (हर साल एक गांव) का चयन किया जाएगा और उनके विकास को वर्ष 2024 तक अंजाम दिया जाएगा. विज्ञप्ति के अनुसार सांसद ही इस योजना के स्तंभ हैं और ग्राम पंचायतें विकास के लिए बुनियादी इकाई होंगी.

अगर हर सांसद तीन गांवों को गोद लेते हैं तो इस योजना के तहत अगले पांच साल में 2379 ग्राम पंचायतों का विकास किया जा सकता है. लोकसभा में 543 और राज्य सभा में 250 सांसद हैं. इस प्रकार कुल 795 सांसदों की ओर से पहले चरण में 795 गांवों को विकसित किया जायेगा.

योजना के अनुसार सांसद आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करने के लिए किसी भी उपयुक्त ग्राम पंचायत का चयन अपनी मर्जी से कर सकेंगे. लेकिन पहले चरण में सांसदों का अपनी पैत्रिक गांव को चुनने की स्‍वतंत्रता नहीं है. हालांकि कई सांसदों ने पहले चरण में अपने पैत्रिक गांवों का ही चयन किया है. उमा भारती ने इस योजना के तहत पहले चरण में दो गांवों को चुना है. उमा ने संसदीय क्षेत्र झांसी के ललितपुर जिले के सड़कपुर और श्रीनगर वार्ड को आदर्श ग्राम बनाने का संकल्‍प लिया है.

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