विश्व कैंसर दिवस आज : हर साल कैंसर के 1.30 लाख नये मरीज, 30 प्रतिशत मरीजों की हो जाती है मौत
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Feb 2019 6:56 AM (IST)
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पटना : चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस पर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों में जागरूकता व नि:शुल्क इलाज कार्यक्रम होंगे. कैंसर को लेकर पूरे विश्व में जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाते हैं. हाल के वर्षों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ी हैं, लेकिन अब भी बहुत से मरीज कैंसर के दूसरे या तीसरे […]
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पटना : चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस पर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों में जागरूकता व नि:शुल्क इलाज कार्यक्रम होंगे. कैंसर को लेकर पूरे विश्व में जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाते हैं. हाल के वर्षों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता बढ़ी हैं, लेकिन अब भी बहुत से मरीज कैंसर के दूसरे या तीसरे स्टेज में इलाज कराने पहुंच रहे हैं.
महावीर कैंसर संस्थान के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) से मिले आकड़ों की मानें तो बिहार में हर साल कैंसर के एक लाख 30 हजार नये मरीज सामने आ रहे हैं. इनमें करीब 30 प्रतिशत मरीजों की मौत इस बीमारी से हो जाती है. विश्व कैंसर दिवस पर डॉक्टरों ने अपील की है कि बीमारी हो तो जांच अवश्य कराएं. शुरुआती कैंसर के लक्षण में ही मरीज अगर अस्पताल पहुंचें तो बीमारी से होने वाली मौत से बचाया जा सकता है.
गंगा किनारे वालों को अधिक खतरा : गंगा किनारे रहने वाले लोगों में पित्त की थैली के कैंसर की शिकायत सबसे अधिक पायी गयी है. पटना जिले में सबसे अधिक 16 फीसदी ऐसे मरीज पाये गये हैं. आइजीआइएमएस में हुए एक शोध से इसका खुलासा हुआ है. 2014-2018 के बीच सभी मरीजों का विश्लेषण किया गया. 38 जिलों के मरीजों में सबसे अधिक प्रभावित राजधानी पटना है, जहां 16% गॉल ब्लाडर कैंसर के मरीज हैं. वहीं, वैशाली 5.8% और सीतामढ़ी पांच प्रतिशत के साथ दूसरे व तीसरे नंबर पर है.
आर्सेनिक ज्यादा होना मुख्य वजह : आइजीआइएमएस के कैंसर एवं पेट रोग विभाग में हुए अध्ययन शोध के मुताबिक जो जिले गंगा से दूर हैं, वहां की तुलना में गंगा से सटे जिले में 1.7 गुना अधिक गॉल ब्लाडर कैंसर होने का जोखिम पाया गया है.
कहां कैसी हैै इलाज की व्यवस्था
पीएमसीएच : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कैंसर के इलाज की व्यवस्था है. यहां ओपीडी व इन्डोर में भी कैंसर मरीजों का इलाज हो रहा है. नयी कोबाल्ट मशीन लायी गयी है जिससे कीमोथरेपी की सुविधा दी जा रही है. ब्रेकी थेरेपी की सुविधा बहाल नहीं हो पायी है. नतीजा यहां ब्रेस्ट व बच्चेदानी कैंसर के इलाज की सुविधा नदारद है.
आइजीआइएमएस : आइजीआइएमएस के कैंसर रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 23 साल पुरानी लगी कोबॉल्ट 780 मशीन आये दिन खराब हो जाती है. इससे कैंसर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बीच में ही मरीजों की थेरेपी रोकनी पड़ती है. पुरानी मशीन होने की वजह से यहां रोजाना 20 से 25 मरीजों को वेटिंग दी जाती है.
महावीर व एम्स अस्पताल : एम्स पटना में कैंसर मरीजों के लिए सर्जरी व कीमोथरेपी की सुविधा उपलब्ध है. हालांकि संस्थान में अभी कई आवश्यक उपकरण नहीं लग पाये हैं. संस्थान में रेडिएशन सेंटर अभी सही से विकसित नहीं हो पाया है. ऐसे में कैंसर की बड़ी सर्जरी नहीं हो पाती है. छोटी सर्जरी यहां अधिक होती हैं. महावीर कैंसर अस्पताल में हर साल 26 हजार नये मरीज आते हैं.
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