‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के दो वर्ष, कोलकाता में नहीं दिखा असर, स्थिति और बिगड़ी, 1000/898

Updated at : 29 Jul 2017 2:23 PM (IST)
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‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के दो वर्ष, कोलकाता में नहीं दिखा असर, स्थिति और बिगड़ी, 1000/898

नयी दिल्ली : ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का अच्छा असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है, उक्त बातें महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने लोकसभा में कही है. उन्होंने सदन को बताया कि हमने 161 जिले का सर्वेक्षण किया है, जिसमें यह बात सामने आयी है कि 104 जिलों में लिंगानुपात […]

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नयी दिल्ली : ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान का अच्छा असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है, उक्त बातें महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने लोकसभा में कही है. उन्होंने सदन को बताया कि हमने 161 जिले का सर्वेक्षण किया है, जिसमें यह बात सामने आयी है कि 104 जिलों में लिंगानुपात में अच्छी वृद्धि देखने को मिली है. लेकिन उन्होंने बताया कि कोलकाता में लिंगानुपात का लगातार गिरना चिंताजनक बात है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में उत्तर-पूर्व में लिंगानुपात की स्थिति बहुत खराब थी, लेकिन आज उत्तर सिक्किम में स्थिति बहुत सुधरी है. पहले यहां प्रति एक हजार लड़कों पर 831 लड़कियां थीं, जबकि अब यहां आश्चर्यजनक ढंग से प्रति एक हजार पुरुषों पर 1009 लड़कियां हैं.

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लेकिन कोलकाता में स्थिति बहुत ही चिंताजनक है. जहां कोलकाता में प्रति एक हजार पुरुष पर 1022 लड़कियां थीं, वह घटकर 898 लड़कियां हो गयी हैं. उन्होंने बताया कि जिन 161 जिलों में सर्वेक्षण हुआ है, उनमें से सबसे खराब स्थिति कोलकाता की है. वहीं करनाल में लिंगानुपात बढ़ा है जहां प्रति एक हजार पुरुष पर पहले 758 महिलाएं थीं जो अब बढ़कर 884 हो गया है, वहीं मिजोरम के सैहा जिले में जहां पहले 915 लड़कियां थीं वह अब 1022 लड़कियां हो गयीं हैं. तमिलनाडु के कोयंबटूर में 856 से 957, गाजियाबाद में 899 से 977 वहीं हिमाचल प्रदेश के उना में 857 से 925 हुआ है.

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गौरतलब है कि 22 जुलाई 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में लिंगानुपात के घटते स्तर को देखते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, अभियान की शुरुआत की थी. वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार 0-6 वर्ष के आयु वर्ग में लिंगानुपात प्रति एक हजार लड़कों पर 927 था, जो 2011 में घटकर 918 हो गया. यूनिसेफ ने भी अपने आंकड़ों में इस बात पर चिंता जतायी थी. सरकार के इस अभियान में महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय और चिकित्सा विभाग भी सहयोगी रहा है. अभियान के दो वर्ष पूरे होने के बाद मंत्री मेनका गांधी ने संसद को बताया कि इस अभियान का फायदा देश में दिख रहा है.
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