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Human Web Series Review: एंगेजिंग है ये डार्क मेडिकल ड्रामा

मेडिकल थ्रिलर कहानियां हमारे हिंदी सिनेमा से लगभग अछूती सी रही हैं. डिज्नी प्लस हॉटस्टार की वेब सीरीज ह्यूमन इसी जॉनर का प्रतिनिधित्व करते हुए मेडिकल फील्ड के स्याह पक्ष को उजागर करती है.

By उर्मिला कोरी
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Human Web Series Review
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Human Web Series Review

  • वेब सीरीज- ह्यूमन

  • निर्माता- विपुल शाह

  • निर्देशक-विपुल अमृत शाह और मोज़ेज़ सिंह

  • कलाकार- शेफाली शाह,कीर्ति कुल्हारी,विशाल जेठवा,राम कपूर,इंद्रनील सेनगुप्ता,आदित्य श्रीवास्तव और अन्य

  • रेटिंग- तीन

मेडिकल थ्रिलर कहानियां हमारे हिंदी सिनेमा से लगभग अछूती सी रही हैं. डिज्नी प्लस हॉटस्टार की वेब सीरीज ह्यूमन इसी जॉनर का प्रतिनिधित्व करते हुए मेडिकल फील्ड के स्याह पक्ष को उजागर करती है .जहां इंसान और गिनी पिग के बीच कोई फर्क नहीं रह जाता है.

कहानी का बैकड्रॉप भोपाल का एक मल्टी फंक्शनल अस्पताल है. वहां डॉक्टर सायरा सभरवाल (कीर्ति कुल्हारी) ने जॉइन किया है.वह बहुत खुश हैं क्योंकि इस अस्पताल की प्रमुख गौरी नाथ (शेफाली शाह) है.जिसे सायरा अपनी प्रेरणा मानती हैं. कहानी में फिर दवा ट्रायल का मुख्य पहलू आ जाता है.अस्पताल में ड्रग टेस्टिंग का अवैध कारोबार चलाया जा रहा है. जिसका परीक्षण गरीब इंसानों पर किया जा रहा है. जिनके जान की कीमत अस्पताल से लेकर प्रसाशन तक किसी के लिए कुछ नहीं है.

मंगू ( विशाल जेठवा) पैसों के लालच में अपने परिवार को ड्रग टेस्टिंग के लिए राजी लेता है लेकिन कहानी में इससे नया ट्विस्ट आ जाता है. उसकी मां पर दवा का रिएक्शन हो जाता है और उसकी मां तड़प तड़प कर दम तोड़ देती है. क्या दोषियों को सजा मिल पाएगी? सायरा किसका साथ देती है.यह लड़ाई आसान नहीं है क्योंकि ड्रग टेस्टिंग के सिंडिकेट में डॉक्टर्स ही नहीं बल्कि बिजनेसमैन,राजनेता सभी शामिल है.

पहले ही दो एपिसोड में यह सीरीज मेडिकल फील्ड के स्याह पक्ष को स्थापित कर देती है. कहानी में ढेर सारे ट्विस्ट एंड टर्न और ग्रे किरदारों के साथ कहानी दिलचस्प तरीके से आगे बढ़ती रहती है. मेडिकल इंडस्ट्री में भ्रस्टाचार कितना जानलेवा और खतरनाक साबित हो सकता है. यह सीरीज इस पहलू को बखूबी रेखांकित करती है . यह सीरीज इस बात को भी उजागर करती है कि ड्रग ट्रायल के वैध तरीके भी हैं लेकिन फार्मा कंपनियां मुनाफाखोरी के चक्कर में गरीबों की जान को दांव पर लगा देते हैं क्योंकि गरीब के जान की कोई कीमत नहीं होती है.

अवैध ड्रग टेस्ट सिंडिकेट की कहानी के साथ साथ लेखक और निर्देशक दूसरी समस्याओं को भी अपनी कहानी में जगह दी है. कोविड १९ वैक्सीन बनाने की खोज में दिवालिया हो रही फार्मा कम्पनियाँ, भोपल गैस त्रासदी का शिकार इतने सालों बाद भी उस दर्द से जूझ रहे हैं. टॉप पर बैठे लोगों की लालच ने गरीबों को किस तरह से पीड़ित बना दिया है १० एपिसोड्स की इस सीरीज में डॉक्टर गौरी ,डॉक्टर सायरा और मंगू की निजी जिंदगियों की उधेड़बुन को भी बुना गया है. कहानी के सब प्लॉट्स सीरीज को दिलचस्प बनाते हैं. खामियों की बात करें तो क्लाइमेक्स थोड़ा कमज़ोर रह गया है.कुछ सवालों के जवाब अधूरे रह गए हैं शायद दूसरे सीजन के साथ इसका जवाब दिया जाए.

कीर्ति कुल्हारी ने शेफाली मौजूदगी के बावजूद अपने अभिनय से प्रभावित करती हैं. मर्दानी के अपने किरदार से बिलकुल अलग किरदार में विशाल जेठवा दिखें हैं लेकिन यहाँ भी वह छाप छोड़ गए हैं.

राम कपूर और आदित्य श्रीवास्तव अपनी सीमित स्क्रीन स्पेस में याद रह जाते हैं इंद्रनील सेनगुप्ता सहित बाकी के किरदार अपनी भूमिका के साथ न्याय कर जाते हैं. सीरीज की सिनेमेटोग्राफी अच्छी है. संवाद किरदारों को दिलचस्प बनाते हैं. कुलमिलाकर अलहदा विषय और जानदार परफॉरमेंस वाली यह वेब सीरीज सभी को देखनी चाहिए.

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