ट्रांस लोगों को पढ़ाई और नौकरी में विशेष श्रेणी में वर्गीकृत करने का आदेश

madras high court ease hiring education criteria: मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि ट्रांसजेंडरों को उनकी जाति से परे केवल एक विशेष श्रेणी के रूप में माना जाना चाहिए, तथा तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि शिक्षा और रोजगार के लिए उन्हें महिला या पुरुष श्रेणी में न लाया जाए.

मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा है कि ट्रांसजेंडरों को उनकी जाति से परे केवल एक विशेष श्रेणी के रूप में माना जाना चाहिए, तथा तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह उन्हें शिक्षा और रोजगार के लिए महिला या पुरुष श्रेणी में न लाए. न्यायमूर्ति वी भवानी सुब्बारायन ने 12 जून, 2024 को पारित आदेश में कहा कि ‘प्रत्येक रोजगार और शैक्षिक अवसरों’ में सरकार ट्रांसजेंडरों के लिए अलग मानदंड निर्धारित करेगी.

कट-ऑफ अंक के लिए अलग मानदंड होगी निर्धारित

सरकार सभी राज्य भर्ती एजेंसियों को ट्रांसजेंडरों को एक विशेष श्रेणी के रूप में निर्दिष्ट करने और उनके कट-ऑफ अंक के लिए अलग मानदंड निर्धारित करने का निर्देश देगी.

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आदेश में कहा कि ट्रांसजेंडरों को अलग श्रेणी में माना जाना चाहिए


2014 में एनएलएसए मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए जज ने कहा कि न तो राज्य और न ही केंद्र ट्रांसजेंडरों के लिए रोजगार के अवसरों का एक समान तरीका तैयार करने के लिए आगे आए हैं, जबकि शीर्ष अदालत के आदेश में कहा गया है कि ट्रांसजेंडरों को अलग श्रेणी में माना जाना चाहिए.


कई मामलों में, एनएएलएसए मामले में जारी दिशा-निर्देशों को गलत तरीके से समझा गया है. न्यायमूर्ति भवानी सुब्बारायन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया है कि वे ट्रांसजेंडरों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े नागरिकों के रूप में मानने के लिए कदम उठाएं और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सार्वजनिक नियुक्तियों के मामले में सभी प्रकार के आरक्षण का विस्तार करें.

अदालत ने यह आदेश ट्रांसजेंडर व्यक्ति आर अनुश्री की याचिका पर पारित किया, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (टीएनपीएससी) द्वारा आयोजित 2017-18 ग्रुप II भर्ती को चुनौती दी थी. उसने आरोप लगाया कि हालांकि उसने 90 अंकों की कट-ऑफ के मुकाबले 121.5 अंक हासिल किए, लेकिन उसे भर्ती के लिए नहीं माना गया क्योंकि आयोग ने उसे विशेष श्रेणी के तहत विचार करने से इनकार कर दिया था. उसकी याचिका को स्वीकार करते हुए, अदालत ने टीएनपीएससी को निर्देश दिया कि वह उसे काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दे और अगर सूची में और ट्रांसजेंडर हैं तो उसे पहली वरीयता दी जाए.

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By Shaurya punj

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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