दूध पहुंचाने वाला बना असिस्टेंट कमांडेंट, दीपक लखारा ने UPSC CAPF में हासिल की AIR 106

Deepak Lakhara Success Story: राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले दीपक लखारा ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर UPSC CAPF 2025 परीक्षा में सफलता हासिल की है. उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 106 प्राप्त की. डेयरी फार्मिंग की बिजनेस करने वाले दीपक को बचपन में BSF जवानों की जिंदगी और अनुशासन देखकर अफसर बनने की प्रेरणा मिली.

Deepak Lakhara Success Story: कहते हैं न कि अगर संकल्प सच्चा हो, तो कोई भी मुश्किल आपकी कामयाबी का रास्ता नहीं राेक सकती है. इसी बात को राजस्थान के जोधपूर के रहने वाले दीपक लखारा ने सच साबित कर दिखाया है. उन्होंने अपनी मेहनत के बदौलत UPSC CAPF 2025 परीक्षा क्रैक की है. आइए उनकी सक्सेस स्टाेरी के बारे में डिटेल में जानते हैं.

UPSC CAPF 2025 Rank Scored: जानिए कितने रैंक लाकर क्रैक की परीक्षा

हाल ही में UPSC CAPF 2025 की जारी रिजल्ट में पता चला है कि दीपक लखारा ने AIR रैंक 106 हासिल किया है. अब वह असिस्टेंट कमांडेंट पद पर कार्यरत हैं. यह उनकी पेशेंस के साथ लगातार मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम है.


Deepak Lakhara Family Background: क्या है उनका फैमिली बैकग्राउंड?

दीपक लखारा की सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार उनका डेयरी-फार्मिंग का फैमिली बिजनेस है. वह इस काम में अपने परिवार की मदद भी करते हैं. इसके साथ ही वह अपने सपने को पूरा करने के लिए भी काफी लगन और मेहनत के साथ लगे हुए थे.

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Deepak Lakhara Motivation: कैसे जगा अफसर बनने का सपना?

दीपक अक्सर BSF फ्रंटियर कैंपस में दूध पहुंचाने जाते थे. बचपन में ही उन्होंने BSF जवानों की जिंदगी, उनकी ट्रेनिंग, अनुशासन और उनके मकसद को बहुत करीब से देखा. यहीं से उनके मन में यह सपना जगा कि वह एक वरिष्ठ अफसर बनेंगे.

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Deepak Lakhara Story: जानिए उनका एक यादगार पल

उन्हें बचपन के वे पल याद हैं, जब कैंपस के पास खेलते हुए वे रिस्ट्रिक्टेड इलाकों में जाने की कोशिश करते थे और ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल उन्हें रोकते थे. उस समय ये छोटी-छोटी घटनाएं लगती थीं, लेकिन इनका उन पर गहरा असर पड़ा. वहीं एक दिन, एक आम से लगने वाले पल ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी.

दीपक सादे सफेद कपड़ों में दूध पहुंचाने कैंपस गए थे. जब वे वहां खड़े थे, तो ट्रेनिंग से लौट रहे रिक्रूट्स (नए जवानों) का एक ग्रुप उनके पास से गुजरा. उन्होंने उन्हें सैल्यूट किया और कहा, "जय हिंद, सर." उसी पल एक सोच ने जन्म लिया और उन्होंने अफसर बनने की ठान ली.

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By प्रगति सिन्हा

मैं प्रगति सिन्हा पिछले लगभग 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी हूं। मुझे मुख्य रूप से शिक्षा से जुड़ी खबरों और उसमे हो रहे बदलावों व अपग्रेडेशन को समझना एवं उसे लोगों तक पहुंचाना पसंद है। प्रभात खबर डिजिटल के माध्यम से मेरा प्रयास रहता है कि शिक्षा जगत में हो रहे महत्वपूर्ण घटनाक्रम, विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे और नई योजनाओं की जानकारी रीडर्स तक पहुंचा सकूं। मैं इससे पहले कोलकाता स्थित सन्मार्ग हिंदी डेली में एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुकी हूं.

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