रूस जाने के बाद कितने रूबल का हो जाता है रुपया, 1000 रुपये का कितना गिर जाता है भाव

Rupee vs Ruble: भारतीय रुपया रूस पहुंचकर कितना मूल्य खो देता है? पुतिन की भारत यात्रा के बीच 1 रुपये के बदले 0.856 रूबल मिलने से यात्रियों और आयात पर बड़ा असर दिख रहा है. 1000 रुपये बदलने पर सिर्फ 856 रूबल मिलते हैं, जिससे विदेश यात्रा और रूसी आयात दोनों महंगे पड़ते हैं.

Rupee vs Ruble: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिनों की यात्रा पर हैं. यूक्रेन के साथ छिड़ी जंग और भारत पर लगे भारी-भरकम अमेरिकी टैरिफ के बाद उनकी यह पहली भारत यात्रा है. तकरीबन चार सालों के बाद यह उनकी आधिकारिक यात्रा है. इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत होने की संभावना है. इसके साथ ही, तेल खरीद पर भी बातचीत हो सकती है. लेकिन, पुतिन की भारत यात्रा आने पर लोगों के मन में एक अहम सवाल पैदा हो रहा है कि भारत का 1 रुपया जब भारत पहुंचता है, तो वह वहां पहुंचकर कितने रूबल का हो जाता है या हम यह भी कह सकते हैं कि भारत के 100 रुपये के बदले में कितना रूबल मिलता है? आइए, दोनों देशों की मुद्रा की विनिमय दरों के बारे में विस्तार से जानते हैं.

रुपया-रुबल की विनिमय दर

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में गुरुवार को भारतीय मुद्रा रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे टूटकर अबतक के सबसे निचले स्तर 90.43 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. वहीं, हम रूसी मुद्रा रुबल की बात करें, तो 4 दिसंबर 2025 को भारतीय रुपये और रुबल की विनिमय दर 1 रुपया=0.8561 रूबल है. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय दर को बताने वाली वेबसाइट वाइज के अनुसार, अगर आप भारत के 1000 रुपये को रूसी रूबल में बदलेंगे, तो आपको 856.00 रुबल मिलेंगे. यानी भारतीय रुपये के मुकाबले रूसी रूबल की विनिमय दर काफी कम है.

रूस में 1000 रुपये में कितने रुबल का मिलेगा सामान

अब अगर आप रूस की यात्रा पर गए हुए हैं और वहां जाकर भारत के 1000 रुपये के बराबर सामान खरीदने जा रहे हैं, तो आपको इन 1000 रुपये के बदले 856.00 रुपये ही मिलेंगे और आप इन 1000 रुपयों में केवल 856.00 रूबल के मूल्य के बराबर के सामान खरीदेंगे. यानी रूस में जाकर रुपया नुकसान में चला जाता है और भारत के लोगों काफी खर्च करना पड़ता है.

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आयात भी पड़ता है महंगा

अगर भारत रूस से तेल और उर्वरक जैसा कोई सामान खरीदता है, तो भुगतान रूबल में करना पड़ता है. जब रूबल महंगा हो, तो भारत को ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इससे सरकार पर खर्च बढ़ जाता है और आखिरकार इसका असर जनता तक महंगाई के रूप में सामने आता है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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