Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए 11 मार्च का दिन बेहद निराशाजनक रहा. चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ. जहां सेंसेक्स 1.72% (1342.27 अंक) टूटकर 76,863.71 पर आ गया, वहीं निफ्टी 1.63% (394.75 अंक) फिसलकर 23,866.85 के स्तर पर बंद हुआ. इस गिरावट ने कल की पूरी रिकवरी पर पानी फेर दिया है और बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
बैंकिंग और ऑटो में सबसे बड़ी मार
बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि निफ्टी के लगभग सभी प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में रहे. सबसे ज्यादा मार बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, आयशर मोटर्स और M&M के शेयरों पर पड़ी, जो निफ्टी के टॉप लूजर्स में शामिल रहे. दूसरी ओर, भारी गिरावट के बीच भी NTPC, जियो फाइनेंशियल, कोल इंडिया और फार्मा शेयरों (सन फार्मा, डॉ रेड्डीज) ने मामूली बढ़त दिखाई. ओवरऑल सेक्टर की बात करें तो ऑटो, FMCG, प्राइवेट बैंक और IT इंडेक्स 0.5% से 2% तक गिरे, जबकि मिडकैप इंडेक्स 1.2% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.36% नीचे बंद हुए.
गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
बाजार के इस तरह धड़ाम होने के पीछे मुख्य रूप से ग्लोबल तनाव और घरेलू महंगाई की चिंताएं रहीं. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने दुनिया भर के बाजारों का मूड बिगाड़ दिया है, जिससे एनर्जी सप्लाई रुकने की आशंका में निवेशकों ने जमकर बिकवाली की. इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और गैस सप्लाई में कटौती की खबरों ने भविष्य में महंगाई बढ़ने का डर पैदा कर दिया है. साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण भी घरेलू स्तर पर भारी दबाव देखा गया.
क्या आने वाली है और बड़ी मंदी?
एक्सपर्ट्स अब बाजार में डेथ क्रॉस (Death Cross) को लेकर चेतावनी दे रहे हैं. यह स्थिति तब बनती है जब शॉर्ट-टर्म औसत (50 DMA), लॉन्ग-टर्म औसत (200 DMA) को ऊपर से नीचे की तरफ काटता है. अगर ऐसा होता है, तो बाजार में लंबी अवधि की मंदी आने की संभावना बढ़ जाती है. फिलहाल निफ्टी के लिए 23,700 और 23,300 के स्तर बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट माने जा रहे हैं. बाजार को दोबारा संभलने के लिए 24,100 के ऊपर टिकना होगा और जब तक इंडेक्स 24,450 के पार नहीं जाता, तब तक हर उछाल पर बिकवाली का खतरा बना रहेगा.
इंवेस्टर्स के लिए रणनीति
फिलहाल बाजार का मिजाज काफी डिफेंसिव है और नई खरीदारी के लिए समय सही नहीं लग रहा है. विशेषज्ञों की सलाह है कि ट्रेडर्स अभी जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश न करें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें. जब तक ट्रेंड पूरी तरह नहीं पलटता, तब तक उछाल पर बिकवाली’ की रणनीति अपनाना और सही रिस्क मैनेजमेंट रखना जरूरी है. इंवेस्टर्स को आने वाले दिनों में अमेरिकी और घरेलू महंगाई के आंकड़ों पर भी पैनी नजर रखनी चाहिए.
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