इंश्योरेंश और बैंकिंग सेक्टर में निवेश से हो सकता है फायदा
Updated at : 08 Jul 2019 9:03 AM (IST)
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शशांक भारद्वाज, वीपी व जोनल हेड, च्वाइस ब्रोकिंग शेयर बाजार यूं तो अत्यधिक संवेदनशील होता है, पर बजट प्रस्तावों पर उसकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है. दूसरी मोदी सरकार के पहले बजट से शेयर बाजार ने भी काफी अपेक्षाएं पल रखी थी. इनमें सबसे प्रमुख शेयरों से होनेवाले लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स […]
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शशांक भारद्वाज, वीपी व जोनल हेड, च्वाइस ब्रोकिंग
शेयर बाजार यूं तो अत्यधिक संवेदनशील होता है, पर बजट प्रस्तावों पर उसकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है. दूसरी मोदी सरकार के पहले बजट से शेयर बाजार ने भी काफी अपेक्षाएं पल रखी थी.
इनमें सबसे प्रमुख शेयरों से होनेवाले लाभ पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का प्रावधान वापस लेना था, क्योंकि यह सीधे तौर पर शेयर में निवेश को प्रभावित करते हैं. ऊपर से कंपनियों में पब्लिक की न्यूनतम शेयर होल्डिंग 25 प्रतिशत से बढ़ा कर 35 प्रतिशत का प्रस्ताव किया गया. इससे शेयर बाजार बहुत निराश हुआ और अभी सामान्य निवेशकों का विश्वास शेयर बाजार के प्रति डगमगाया हुआ है. फलस्वरूप शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गयी और सेंसेक्स बजट के दिन 394 अंक गिर कर बंद हुआ.
अभी बहुतायत शेयरों के मूल्य काफी कम हुए हैं. ऐसे में प्रोमोटरों को अपनी होल्डिंग घटाने और पब्लिक की शेयर होल्डिंग को बढ़ा कर न्यूनतम 35 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को फलीभूत करने के लिए अपने शेयर बाजार में बेचने पड़ेंगे.
आम निवेशक हाथ जला कर बैठे हैं. आशंका है, वे शेयर लेने आगे नहीं आनेवाले हैं. ऐसे में प्रोमोटरो को सस्ते मूल्य पर अपने शेयर का ऑफर देना पड़ेगा. इससे भविष्य में इन कंपनियों के शेयर के मूल्य में कमी की संभावना होगी, जहां अभी पब्लिक की होल्डिंग 35 प्रतिशत से कम है.
दीर्घ अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक पहल
शेयर की पुनर्खरीद पर टैक्स बढ़ाना और एसटीटी में परिवर्तन न करना भी शेयर बाजार के लिए निराशाजनक रहा. हालांकि थोड़ी दीर्घ अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए बजट काफी सकारात्मक है. आधारभूत संरचनाओं के लिए विदेशों से बड़ा धन जुटाने का आधार तैयार करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सड़क, सिंचाई, ग्रामीण क्षेत्रों के उन्नयन हेतु काफी धन की व्यवस्था, तीन लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाना, हाउसिंग सेक्टर के लिए प्रोत्साहन, रेल सुविधाओं का विस्तार, प्रौद्योगिकी परिवर्तन हेतु प्रोत्साहन, डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा, एफडीआइ में वृद्धि को प्रोत्साहन आदि अनेकों अच्छे प्रस्ताव इस बजट में हैं.
कम लागत और नीची ब्याज दरों की अर्थव्यवस्था के लिए भी आधार तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है. एमएसएमइ के लिए ब्याज दरों में कमी, हाउसिंग लोन पर सब्सिडी इत्यादि ऐसे ही प्रस्ताव हैं.
वित्त मंत्री ने वित्तीय घाटा का लक्ष्य 3.3 प्रतिशत रखा है. साथ ही एक लाख करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश से आने की बात कही है. इतनी बड़ी राशि वे तभी जुटा पायेंगे जब शेयर बाजार में तेजी रहेगी. पर अभी तो वित्त मंत्री महोदय ने शेयर के लाभ पर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का प्रावधान वापस न कर शेयर बाजार का मूड बिगाड़ दिया है.
शेयर की पुनर्खरीद पर टैक्स बढ़ाना, एसटीटी में परिवर्तन न करना भी शेयर बाजार के लिए निराशाजनक रहा. हालांकि थोड़ी दीर्घ अवधि में अर्थव्यवस्था के लिए बजट काफी सकारात्मक है.
बजट की घोषाओं के बाद से इंश्योरेंश, इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और कुछ चुनी हुई एनबीएफसी कंपनियों के शेयर अच्छे लग रहें हैं. इनसे निवेशकों को अच्छे रिटर्न की संभावना है.
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