बिहार: भू-माफियाओं ने बेच दी रेलवे की 283 बीघा जमीन, 2020 से चल रहा था जमीन म्यूटेशन का काम, जानें पूरी बात

Updated at : 01 Nov 2023 4:01 AM (IST)
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बिहार: भू-माफियाओं ने बेच दी रेलवे की 283 बीघा जमीन, 2020 से चल रहा था जमीन म्यूटेशन का काम, जानें पूरी बात

बेगूसराय जिले के साहेबपुरकमाल अंचल के मौजा मल्हीपुर बरारी में 283 बीघा जमीन बेच दी गयी है. यह जमीन मुंगेर जिले में अवस्थित पुरानी रेलवे स्टेशन लाल दरवाजा की सीमा से सटी हुई है. इस जमीन की कीमत 50 करोड़ रुपये के आस-पास आंकी जा रही है.

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अजय कुमार, साहेबपुरकमाल (बेगूसराय). अंचल क्षेत्र में भू-माफियायों ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर रेलवे की 283 बीघा गैरमजरुआ आम भूमि को बेच दिया. इस जमीन की कीमत लगभग 50 करोड़ रुपये बतायी जा रही है. प्लॉटिंग कर बेची गयी जमीन की जमाबंदी भी हो गयी और कई खरीदारों ने पक्का निर्माण कर लिया है. वहीं, कई प्लॉट में निर्माण कार्य चल रहे हैं. यह मामला सामने आने के बाद अपर समाहर्ता राजेश कुमार सिंह ने फर्जी जमाबंदी के रद्दी करण को लेकर वाद शुरू करते हुए सीओ और अन्य कर्मियों को नोटिस जारी किया है.

भू-माफियाओं ने बेच दी रेलवे की 283 बीघा जमीन

यह मामला तब सामने आया, जब श्रीनगर निवासी मुकेश यादव और अन्य लोगों ने कुछ माह पूर्व जिलाधिकारी को आवेदन देकर बताया था कि साहेबपुरकमाल अंचल के मौजा मल्हीपुर बरारी में 283 बीघा जमीन बेच दी गयी है. यह जमीन मुंगेर जिले में अवस्थित पुरानी रेलवे स्टेशन लाल दरवाजा की सीमा से सटी हुई है. यहां पर खगड़िया-मुंगेर रेल पुल परियोजना के लिए गंगा की तरफ से एक रेलवे गाइड बांध का निर्माण भी किया गया है. पुरानी रेलवे स्टेशन और रेलवे गाइड बांध के बीच में यह जमीन स्थित है.

2020 से जमीन के म्यूटेशन का कार्य चल रहा था

जब जांच शुरू हुई तो पता चला कि वर्ष 2020 से भू- माफियाओं की सांठगांठ से जमीन के म्यूटेशन का कार्य चल रहा था. लगभग दो वर्षों तक चले इस खेल पर से पर्दा उठने लगा, तो जमीन कारोबारियों समेत इस कार्य में शामिल लोगों में हलचल शुरू हो गयी. इसके बाद अपर समाहर्ता ने सीओ के प्रतिवेदन और आवेदकों व फर्जी जमाबंदी कराने के आरोपित अंबरीश चंद्र सिंह की ओर से दिये गये कागजों की जांच में इस जमीन को गैरमजरुआ आम पाया.

मुंगेर शहर से सटे होने के कारण महंगी है जमीन

जमीन मुंगेर शहर से सटी होने से काफी महंगी है. भू-माफियाओं ने खाली पड़ी इस सरकारी जमीन को बेचने का षड्यंत्र रचना शुरू कर दिया. सबसे पहले भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पुल निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के लिए मुआवजे का दावा किया, लेकिन तत्कालीन जिला पदाधिकारी ने इसे खारिज करते हुए क्षतिपूर्ति एवं मुआवजे की राशि को सरकारी खाते में जमा करा दिया गया. इसके बाद कुछ दिनों तक भू-माफिया शांत रहे. तत्कालीन डीएम का स्थानांतरण हो जाने के बाद भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज और जमाबंदी खुलवा कर धड़ल्ले से इस जमीन को बेचना शुरू कर दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि साहेबपुरकमाल के सीओ और बलिया एसडीओ से मैखिक रूप से इसकी शिकायत की गयी थी, लेकिन भू-माफियाओं की पहुंच के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई और जमीन की बिक्री और दाखिल-खारिज तेजी से होने लगा.

त्रुटियों की अनदेखी कर की गयी भू-माफियाओं की मदद

भू-माफियाओं ने गैरमजरुआ आम भूमि को बेचने के लिए फर्जी रूप से जो हुक्मनामा और रिटर्न तैयार किया था, उसमें कई त्रुटियां पायी गयीं. साक्ष्य के साथ अंचल कार्यालय को संज्ञान में भी दिया गया, लेकिन त्रुटियों की अनदेखी कर भू-माफियाओं की मदद की गयी.

रेलवे करायेगा जमीन का सीमांकन

इस मामले में रेलवे के सेक्शन इंजीनियर ओमप्रकाश का कहना है कि रेलवे के नक्शा से जमीन की मापी कराने की तैयारी कर रहे हैं. जमीन का सीमांकन के बाद रेलवे की ओर से जमीन को अतिक्रमणमुक्त करने की कार्रवाई की जायेगी.

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