चाहे उन्हें पसंद हो या न हो, US कुछ न कुछ करेगा… नाटो को दरकिनार कर ट्रंप ने फिर दी धमकी; ग्रीनलैंड लेंगे

Donald Trump Annexe Greenland NATO Concerns: डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की धमकी दी. अपने रवैये पर अड़े रहते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका वहाँ कुछ करने जा रहा है, चाहे वे चाहें या न चाहें. ट्रंप ने ये टिप्पणी नाटो की चिंताओं को दरकिनार करते हुए, व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के दौरान की.

Donald Trump Annexe Greenland NATO Concerns: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी धमकी दोहराई. उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका वहाँ “कुछ न कुछ करेगा, चाहे उन्हें यह पसंद हो या नहीं.” ट्रंप ने यह टिप्पणी व्हाइट हाउस में तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक के दौरान की. मीडिया की मौजूदगी में बातचीत के दौरान ट्रंप ने अपने बयान को सही ठहराते हुए कहा कि अगर हम ऐसा नहीं करते, तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे और हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे. ट्रंप की यह ताजा धमकी ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और उसके नाटो सहयोगियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई है.

ग्रीनलैंड पर नियंत्रण रखने वाले डेनमार्क ने साफ तौर पर कह दिया है कि यह आर्कटिक क्षेत्र ‘बिक्री के लिए नहीं है’ और उसने ट्रंप के रुख को बार-बार खारिज किया है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन की कड़ी चेतावनियों के बावजूद ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि वह नाटो का समर्थन करते हैं. फ्रेडरिक्सन ने हाल ही में कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी हमला “नाटो और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था के अंत” के बराबर होगा. वहीं डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने 1952 के एक नियम की भी याद दिलाई, जो कहता है कि अगर कोई भी आक्रमण ग्रीनलैंड में होता है, तो सैनिक पहले गोली मारेंगे और सवाल बाद में पूछेंगे. इसके लिए उन्हें अपने अधिकारी से भी आज्ञा लेने की जरूरत नहीं है. 

रूस या चीन कर लेंगे ग्रीनलैंड पर कब्जा- ट्रंप

नाटो और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर बोलते हुए ट्रंप ने गठबंधन की अमेरिका पर निर्भरता को रेखांकित किया. शुक्रवार को उन्होंने कहा, “अगर मैं नहीं होता, तो आज नाटो मौजूद ही नहीं होता.” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन हम रूस या चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं करने देंगे और अगर हमने कुछ नहीं किया तो वही होने वाला है.”  ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड में रुचि दिखाते रहे हैं. उन्होंने पहली बार 2019 में, अपने पहले कार्यकाल के दौरान, सार्वजनिक रूप से इस विचार को सामने रखा था. उस समय भी उनके प्रस्ताव को डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों के नेताओं ने सख्ती से खारिज कर दिया था.

लीज काफी नहीं, मालिकाना हक चाहिए- ट्रंप

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि रूस और चीन के प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड का मालिक होना जरूरी है. शुक्रवार को वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि किसी क्षेत्र की रक्षा करने के लिए उस पर मालिकाना हक होना चाहिए. आप मालिकाना हक की रक्षा करते हैं, लीज की नहीं. ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है और अमेरिका को यह करना होगा. उन्होंने बिना कोई सबूत दिए दावा किया कि यह इलाका “हर जगह रूसी और चीनी जहाजों से भरा हुआ है.”

ग्रीनलैंड में तैनात है अमेरिका सेना

दरअसल, अमेरिका के पास उत्तर-पश्चिमी ग्रीनलैंड स्थित पिटुफिक स्पेस बेस में 100 से अधिक सैन्यकर्मी तैनात हैं. यह ठिकाना द्वितीय विश्व युद्ध के समय से अमेरिका द्वारा संचालित किया जा रहा है. डेनमार्क के साथ हुए समझौतों के तहत, जरूरत पड़ने पर अमेरिका वहाँ अतिरिक्त सैनिक भी तैनात कर सकता है. उत्तर अमेरिका और आर्कटिक के बीच स्थित होने के कारण ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति बेहद अहम मानी जाती है. यह मिसाइल हमलों की शुरुआती चेतावनी प्रणाली और क्षेत्र में जहाजों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है. हालाँकि, ट्रंप ने कहा कि केवल लीज समझौते पर्याप्त नहीं हैं. उन्होंने कहा, “देश नौ साल या यहाँ तक कि 100 साल के समझौते नहीं कर सकते. उन्हें मालिकाना हक चाहिए.”

चीन और रूस को पड़ोसी नहीं बनाना चाहता

ट्रंप ने आगे कहा, “मुझे चीन के लोग पसंद हैं. मुझे रूस के लोग पसंद हैं. लेकिन मैं उन्हें ग्रीनलैंड में अपना पड़ोसी नहीं बनाना चाहता.” उन्होंने यह भी कहा कि नाटो को अमेरिका के रुख को समझना होगा. डेनमार्क के नाटो सहयोगियों, प्रमुख यूरोपीय देश और कनाडा शामिल ने कोपेनहेगन के समर्थन में आवाज उठाई है. इन देशों ने कहा कि केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड को ही अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है और आर्कटिक की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को सहयोगी देशों को मिलकर सुलझाना चाहिए. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा के सम्मान पर भी जोर दिया.

सैन्य विकल्प का उपयोग कर सकता है अमेरिका

हाल के हफ्तों में ट्रंप ने इस मुद्दे को फिर से उठाया, खासकर वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन के बाद, जिसमें देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया था. ट्रंप ने कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड “बेहद जरूरी” है. ट्रंप प्रशासन ने इसके लिए अब तक कई विकल्पों की बात कही. इनमें बातचीत के अलावा सैन्य विकल्प और पैसे का लालच भी शामिल है. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिना लेविट ने बीते दिनों एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा था कि ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को लेने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें सैन्य विकल्प से इनकार नहीं किया जा सकता. 

ग्रीनलैंड US से नहीं मिलना चाहता

वहीं ग्रीनलैंड के लोगों ने बार-बार अमेरिका का हिस्सा बनने से इनकार किया है. 2025 के एक सर्वे के अनुसार, वहाँ की 85 प्रतिशत आबादी इस विचार को खारिज करती है. वहीं, अमेरिका में किए गए सर्वे बताते हैं कि केवल 7 प्रतिशत अमेरिकी ही इस क्षेत्र पर अमेरिकी सैन्य कब्जे का समर्थन करते हैं. यूरोप ने भी डेनमार्क का ही साथ दिया है, उसने यूरोपीय देश के साथ एकजुटता दिखाते हुए अमेरिकी एग्रेशन को नकारा है. ग्रीनलैंड के जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने भी इस मुद्दे पर अपने देश की राय सामने रखते हुए बातचीत से मुद्दे को सुलझाने की अपील की. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते ग्रीनलैंड प्रशासन से बातचीत करेंगे. 

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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