ममता की चुनौती पर बंगाल पहुंचे पीएम मोदी, जानें कब-कब दीदी ने किया था प्रधानमंत्री का विरोध...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपील को स्वीकार करते हुए आज प्रदेश का दौरा किया. वे आज सुबह कोलकाता पहुंचे और ममता बनर्जी के साथ अम्फान तूफान के कारण वहां हुई तबाही का जायजा लिया. कल तूफान के बारे में जानकारी देते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि ऐसी तबाही आज तक नहीं देखी थी पीएम मोदी आयें और हालात का जायजा लें. ममता बनर्जी ने एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए यह कहा था कि वे बंगाल आयें और देखें कि यहां क्या हालात हैं, जिसके बाद पीएम मोदी कोलकाता पहुंचे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपील को स्वीकार करते हुए आज प्रदेश का दौरा किया. वे आज सुबह कोलकाता पहुंचे और ममता बनर्जी के साथ अम्फान तूफान के कारण वहां हुई तबाही का जायजा लिया. कल तूफान के बारे में जानकारी देते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि ऐसी तबाही आज तक नहीं देखी थी पीएम मोदी आयें और हालात का जायजा लें. ममता बनर्जी ने एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए यह कहा था कि वे बंगाल आयें और देखें कि यहां क्या हालात हैं, जिसके बाद पीएम मोदी कोलकाता पहुंचे.

गौरतलब है कि इससे पहले जब बंगाल में वर्ष 2019 में फोनी तूफान से तबाही हुई तो उस वक्त ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के साथ बैठक और सहायता दोनों को ठुकरा दिया था. पीएम मोदी ने जब ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ ममता बनर्जी को भी मीटिंग के लिए बुलाया था तो उन्होंने यह कहकर मीटिंग में शामिल होने से मना कर दिया था कि वे राहत कार्यों में व्यस्त हैं. इसके अतिरिक्त भी कई ऐसे मौके आये हैं, जब ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़ी रहीं हैं.

सीएए और एनआरसी का मसला भी जब देश में गरमाया हुआ था तो ममता बनर्जी ने पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करना शुरू कर दिया था. उनका नारा छि: छि: मोदी भी उस दौरान बहुत चर्चा में रहा था.

लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान भी जिस तरह से बंगाल में हिंसा हुई थी और ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह पर दोषारोपण किया था, वह लोगों के स्मरण में ताजा है. चुनाव के वक्त तो ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को झूठा तक कहा था और यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो वे पीएम मोदी को जेल भी भेज सकती हैं.

कोलकाता के पुलिस कमिशनर राजीव कुमार पर सीबीआई ने जब सारधा घोटाला मामले में कार्रवाई की थी तो ममता बनर्जी सीबीआई और केंद्र सरकार का विरोध करते हुए धरना पर बैठ गयीं थीं. उस वक्त उन्होंने यह आरोप लगाया था कि पीएम मोदी और अमित शाह बदले की कार्रवाई कर रहे हैं.

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Author: Rajneesh Anand

Published by: Prabhat Khabar

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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