बंगाल को जल्द मिल सकता है स्थायी डीजीपी, यूपीएससी ने मांगे आईपीएस के नाम

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से राज्य के स्थायी डीजीपी के लिए जिन आईपीएस ऑफिसर्स की लिस्ट यूपीएससी को भेजी जा सकीत है, उनमें कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे के अलावा होम गार्ड के महानिदेशक नटराजन रमेश बाबू, राज्य सुधार सेवा के महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता व सिविल डिफेंस के महानिदेशक संजय सिंह के भी नाम शामिल हो सकते हैं.

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस विभाग के सबसे बड़े पद पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हो गयी है. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने राज्य सरकार से भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों के नाम मांगे हैं. इनमें से एक को राज्य का नया स्थायी डीजीपी नियुक्त किया जायेगा.

2023 के बाद बंगाल को नहीं मिला स्थायी डीजीपी

वर्तमान में 1993 बैच के आइपीएस अधिकारी पीयूष पांडे कार्यवाहक डीजीपी के रूप में पुलिस का कामकाज देख रहे हैं. पश्चिम बंगाल के अंतिम स्थायी डीजीपी मनोज मालवीय थे, जो वर्ष 2023 में रिटायर हुए थे. उसके बाद से यह पद स्थायी रूप से खाली है.

अनुज शर्मा का नाम सबसे आगे

यूपीएससी से पत्र मिलने के बाद राज्य सचिवालय नबान्न में संबंधित विभाग ने संभावित नामों की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वरिष्ठता के आधार पर 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी अनुज शर्मा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. फिलहाल, वह पश्चिम बंगाल अग्निशमन व आपातकालीन सेवा विभाग के महानिदेशक हैं.

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बंगाल के डीजीपी के लिए इन नामों पर भी हो सकती है चर्चा

संभावित सूची में कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे के अलावा होम गार्ड के महानिदेशक नटराजन रमेश बाबू, राज्य सुधार सेवा के महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता व सिविल डिफेंस के महानिदेशक संजय सिंह के भी नाम शामिल हो सकते हैं.

31 जनवरी को रिटायर हुए कार्यवाहक डीजीपी राजीव कुमार

31 जनवरी को तत्कालीन कार्यवाहक डीजीपी राजीव कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार ने पीयूष पांडे को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया था. उस समय केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने तय समय-सीमा के भीतर यूपीएससी को नामों की सूची नहीं भेजी, जिसके कारण स्थायी नियुक्ति को मंजूरी नहीं मिल सकी.

डीजीपी की नियुक्ति पर केंद्र और राज्य के बीच गतिरोध

डीजीपी की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से केंद्र और राज्य के बीच गतिरोध बना हुआ था. अब माना जा रहा है कि उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में समाधान की राह खुल सकती है. चुनावी माहौल में पुलिस प्रमुख की स्थायी नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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By Mithilesh Jha

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