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केंद्र की मनमानी नीतियों से दम तोड़ रहा उत्तर बंगाल का चाय उद्योग

Updated at : 23 Feb 2020 2:11 AM (IST)
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केंद्र की मनमानी नीतियों से दम तोड़ रहा उत्तर बंगाल का चाय उद्योग

सिलीगुड़ी : केंद्र सरकार की मनमानी नीतियों से उत्तर बंगाल का चाय उद्योग दम तोड़ रहा है. यह कहना है चाय उद्योग से जुड़े कारोबारियों की संस्था तराई इंडियन प्लांटर्स एसोसिएशन (टिपा) के अध्यक्ष महेंद्र बंसल का. वे शनिवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान मीडिया को संबोधित कर रहे थे. प्रेस […]

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सिलीगुड़ी : केंद्र सरकार की मनमानी नीतियों से उत्तर बंगाल का चाय उद्योग दम तोड़ रहा है. यह कहना है चाय उद्योग से जुड़े कारोबारियों की संस्था तराई इंडियन प्लांटर्स एसोसिएशन (टिपा) के अध्यक्ष महेंद्र बंसल का. वे शनिवार को सिलीगुड़ी जर्नलिस्ट क्लब में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान मीडिया को संबोधित कर रहे थे. प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि हाल ही में सरकार ने चाय उद्योग से जुड़े कारोबारियों से दो फीसदी टीडीएस शुल्क लेना शुरू किया है.

यह चाय कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ है. अगर सरकार 0.01 फीसदी टीडीएस लेती है तो चाय कारोबारियों को सुविधा होगी. साथ ही चाय उद्योग भी और विकसित होगा. उन्होंने केंद्र द्वारा संचालित टी बोर्ड की कार्य पद्धति पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि टी बोर्ड चाय उद्योग के लिए निर्धारित सौ फीसदी रियायत का 80 फीसदी अकेले असम को देती है. बाकी 20 फीसदी अन्य राज्यों को दिया जाता है.
बंसल का कहना है कि एक काम के लिए एक ही देश में अलग-अलग राज्यों के लिए नीतियां कैसे अलग हो सकती है. उन्होंने नये चाय के पौधे में बंटवारे की राशि में भी टी बोर्ड पर मनमानी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि टी बोर्ड के निर्देशानुसार उत्तर बंगाल के सौ से भी अधिक चाय बागान मालिकों ने पुराने चाय के पौधे हटाकर नये चाय के पौधे लगा लिये.
लेकिन पांच वर्ष बीतने के बाद भी टी बोर्ड से अभी तक किसी भी बागान मालिकों को नये पौधे की लागत राशि आवंटित नहीं हुई है. उन्होंने केंद्र सरकार की उदासीनता से चाय बागानों व उद्योग को हो रहे नुकसान व अन्य समस्याओं से मीडिया को रूबरू कराया.
उन्होंने कहा कि इन सभी समस्याओं को लेकर टिपा की ओर से उत्तर बंगाल के चारों भाजपा सांसदों से मुलाकात कर समस्याओं से अवगत कराया गया है. लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया, लेकिन आज तक समस्या का कोई हल नहीं निकला.
राज्य सरकार की ‘चाय सुंदरी’ योजना की तारीफ की
महेंद्र बंसल ने ममता सरकार द्वारा उत्तर बंगाल के चाय उद्योग को और विकसित करने के लिए इस बार के बजट में कई योजनाओं को चालू करने का एलान किये जाने की काफी तारीफ की. टी टूरिज्म को विकसित करने के मकसद से राज्य सरकार की कई योजनाओं के साथ ही ‘चाय सुंदरी’ योजना की भी तारीफ की.
उन्होंने कहा कि ‘चाय सुंदरी’ योजना के जरिये उत्तर बंगाल के सभी चाय बागानों के श्रमिकों के छप्पर वाले घरों को पक्का मकान में तब्दील किया जायेगा. इससे बागान श्रमिक मौसम की मार झेलने से बच सकेंगे. प्रेस-वार्ता के दौरान टिपा के पूर्व अध्यक्ष प्रवीर शील, शुभंकर मित्तल व अन्य सदस्य भी मौजूद थे.
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