West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आपके नाम पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग के बाबू नहीं, बल्कि न्यायिक अधिकारी (जज) करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने इस काम के लिए पश्चिम बंगाल के साथ-साथ झारखंड और ओडिशा के लीगल ऑफिसर्स को भी काम पर लगाने के निर्देश दिये हैं. इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है. यदि आपका नाम वोटर लिस्ट (SIR) से कट गया है और अंतिम मतदाता सूची में आपका नाम नहीं है, तो आपके पास क्या रास्ते हैं, यहां जानें. इन 4 चरणों को ध्यान से समझें.
1. न्यायिक अधिकारी का फैसला ही अंतिम
अब तक चुनाव आयोग के अधिकारी तय करते थे कि नाम रहेगा या नहीं. अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी (जिला और दीवानी न्यायाधीश) इन दावों का निपटारा कर रहे हैं. अगर जज ने आपके दस्तावेजों को सही मान लिया है, तो आयोग का कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उसे बदल नहीं सकेगा.
2. जज का फैसला आपके खिलाफ हो, तो क्या करें?
सुप्रीम कोर्ट ने एक ‘अपीलीय निकाय’ (Appellate Body) गठित करने का निर्देश दिया है. यदि स्थानीय स्तर पर न्यायिक अधिकारी आपका दावा खारिज कर देते हैं, तो आप इस अपीलीय निकाय में गुहार लगा सकते हैं. इसके लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जजों की एक विशेष पीठ सुनवाई करेगी.
3. पोर्टल पर ‘लॉग-इन आईडी’ की नयी सुविधा
अदालत ने आयोग को नये ‘लॉग-इन आईडी’ बनाने को कहा है. इसका मतलब है कि अब आपकी अर्जी पर कार्रवाई तेजी से होगी. आप चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने एप्लीकेशन का स्टेटस चेक कर सकते हैं कि आपकी आईडी जनरेट हुई है या नहीं.
4. दस्तावेजों की जांच में रखें इन बातों का ध्यान
चूंकि 10 लाख से ज्यादा दावों पर सुनवाई हो चुकी है, कोर्ट ने ‘तार्किक विसंगतियों’ पर नरमी बरतने का संकेत दिया है. यदि माता-पिता के नाम की स्पेलिंग में मामूली गलती है या उम्र का अंतर तकनीकी कारणों से है, तो न्यायिक अधिकारी को स्पष्ट रूप से बताएं. वो आपकी बात सुनेंगे और आपके नाम को वोटर लिस्ट में शामिल करने के आदेश देंगे.
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अफवाह पर न दें ध्यान, बीडीओ-एसडीओ कार्यालय जायें
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल सरकार आपको कानूनी सहायता देने के लिए बाध्य है. इसलिए किसी अफवाह पर ध्यान न दें. न ही हताश होकर कोई गलत कदम उठाएं (जैसा बादुरिया की घटना में हुआ). सुप्रीम कोर्ट स्वयं इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है. अपने पास आधार कार्ड, पुराना वोटर आईडी और जन्म प्रमाण पत्र तैयार रखें और बीडीओ (BDO) या एसडीओ (SDO) कार्यालय में तैनात न्यायिक अधिकारी से ही संपर्क करें.
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