दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर कल होगा महाफैसला, 46 लाख वोटरों के नाम कटने के बाद क्या बदलेगा समीकरण?

West Bengal Election 2021 vs 2026: बंगाल चुनाव 2026 के अंतिम चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होगा. कोलकाता, हावड़ा और उत्तर एवं 24 परगना में टीएमसी के गढ़ में भाजपा की सेंधमारी की कोशिश. जानें SIR और वोटर लिस्ट से नाम हटने का पूरा गणित.

West Bengal Election: बंगाल चुनाव 2026 का सबसे बड़ा और निर्णायक दिन शुक्रवार यानी 29 अप्रैल को है. दूसरे और अंतिम चरण के तहत राज्य की 142 सीटों पर मतदान होगा. यह चरण तय करेगा कि ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाते हुए ‘जीत का चौका’ लगायेंगी या भाजपा दक्षिण बंगाल के इस ‘लाल और हरे’ गढ़ में सेंध लगाकर पहली बार राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ तक का सफर तय करेगी. कोलकाता, हावड़ा, हुगली, नदिया, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और पूर्व बर्धमान जैसे जिलों में होने वाली यह वोटिंग असल मायनों में बंगाल का भविष्य लिखेगी.

दक्षिण बंगाल में टीएमसी का है एकछत्र राज

आंकड़े गवाह हैं कि दक्षिण बंगाल की इन 142 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का पलड़ा हमेशा भारी रहा है. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने इन 142 सीटों में से 123 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की थी. भाजपा को केवल 18 और आईएसएफ को 1 सीट मिली थी.

किस जिले में कितनी सीटें

जिले का नामविधानसभा सीट की संख्या
उत्तर 24 परगना33 सीट
दक्षिण 24 परगना31 सीट
हुगली18 सीट
नदिया17 सीट
हावड़ा16 सीट
पूर्व बर्धमान16 सीट
उत्तर कोलकाता07 सीट
दक्षिण कोलकाता04 सीट
कुल142 सीट

भवानीपुर में ममता का मुकाबला शुभेंदु से

इसी चरण में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपनी सीट भवानीपुर पर भी वोट डाले जायेंगे. भवानीपुर में ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा के फायरब्रांड नेता शुभेंदु अधिकारी से है. 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में 1956 वोट से पराजित किया था.

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46 लाख से ज्यादा नाम कटने से मची खलबली

इस चुनाव का सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, इन प्रमुख जिलों से लाखों नाम हटाये गये हैं. यह चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं.

  • उत्तर 24 परगना में सबसे अधिक 12.6 लाख नाम हटाये गये.
  • दक्षिण 24 परगना में 10.91 लाख नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए.
  • कोलकाता से 6.97 लाख, हावड़ा से 6 लाख और हुगली-नदिया से करीब 9 लाख नाम काटे गये हैं.
  • विपक्षी दल इसे धांधली बता रहे हैं, तो प्रशासन इसे सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया कह रहा है.

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बीजेपी की चुनौती : दक्षिण के बिना अधूरी है जीत

भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि उत्तर बंगाल में उनकी पकड़ मजबूत है, लेकिन जब तक वे दक्षिण बंगाल के शहरी और ग्रामीण बेल्ट में अच्छा प्रदर्शन नहीं करते, तब तक सत्ता का सपना अधूरा है. भाजपा नेता का कहना है कि बदलाव की शुरुआत इसी ‘युद्धक्षेत्र’ से होगी. दूसरी ओर, टीएमसी का दावा है कि पहले चरण की 152 सीटों में ही वे 100 का आंकड़ा पार कर चुके हैं. दूसरे चरण की वोटिंग उन्हें दो-तिहाई बहुमत की ओर ले जायेगी.

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West Bengal Election: सुरक्षा और मतदान का रिकॉर्ड

23 अप्रैल को पहले चरण में रिकॉर्ड 93.19 प्रतिशत मतदान हुआ था. 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये हैं. कोलकाता और आसपास के जिलों में केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गयी है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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