खास बातें
TMC Statewide Agitation West Bengal: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी भीषण उठापटक के बीच अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने रक्षात्मक रवैया छोड़कर सीधे सड़क पर उतरने का मन बना लिया है. शनिवार को सोनारपुर में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और हुगली में सांसद कल्याण बनर्जी पर हुए कथित हमलों के विरोध में टीएमसी ने पूरे राज्य में चौतरफा आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है.
रानी रासमणि रोड पर ममता बनर्जी का महा-धरना
इस सियासी संग्राम को धार देने के लिए खुद पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी मंगलवार यानी 2 जून को कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित रानी रासमणि रोड पर एक दिवसीय महा-धरने (Sit-in Protest) पर बैठेंगी. सत्ता परिवर्तन के बाद इसे ममता बनर्जी का पहला सबसे बड़ा जमीनी शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है.
सड़कों पर उतरे कार्यकर्ता, वार्ड और ब्लॉकों में रैलियां
- पार्टी के शीर्ष सांसदों पर हुए हमले के बाद तृणमूल कांग्रेस का कैडर पूरी तरह आक्रोशित है. इसके लिए बाकायदा एक विस्तृत विरोध खाका तैयार किया गया है.
- सोमवार सुबह से राज्य के सभी नगर पालिका वार्डों और ग्रामीण ब्लॉकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने काले झंडे लेकर विरोध मार्च निकाला.
- रैलियों में नयी भाजपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई. टीएमसी का आरोप है कि राज्य में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए राज्य प्रायोजित आतंक फैलाया जा रहा है.
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सिर्फ सांसदों पर हमला नहीं, बुलडोजर अभियान भी बना मुद्दा
आमतौर पर माना जा रहा था कि टीएमसी का यह गुस्सा केवल अभिषेक बनर्जी पर हुए पथराव को लेकर है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने इस धरने के जरिये जनता से जुड़े एक और संवेदनशील मुद्दे को शामिल कर मास्टरस्ट्रोक खेला है.
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हॉकर्स के आंसू बनेंगे हथियार
हाल ही में दमदम स्टेशन और कोलकाता के अन्य हिस्सों में बिना किसी पुनर्वास के आधी रात को चलाये गये ‘बुलडोजर अभियान’ को टीएमसी ने बड़ा मुद्दा बनाया है. ममता बनर्जी इस धरना के जरिये नयी सरकार को ‘गरीब विरोधी’ और ‘बुलडोजर प्रेमी’ साबित करने की कोशिश करेंगी. टीएमसी का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हजारों छोटे दुकानदारों की आजीविका को इस तरह बेरहमी से कुचलना पूरी तरह अमानवीय है.
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TMC Statewide Agitation West Bengal: वोट बैंक बचाने की कवायद
शहरी क्षेत्रों में हॉकर्स और फुटपाथ दुकानदार टीएमसी का बड़ा कोर वोट बैंक रहे हैं. इस मुद्दे को उठाकर ममता बनर्जी अपने बिखरते हुए वोट बैंक को दोबारा एकजुट करने की कोशिश में हैं.
60 विधायकों की गुमशुदगी और गिरफ्तारियों के बीच अटेंडेंस टेस्ट
महा-धरना ऐसे समय पर हो रहा है, जब रविवार को कालीघाट में ममता की बैठक में 80 में से सिर्फ 20 विधायक ही पहुंचे थे. इसके साथ ही तपन चट्टोपाध्याय और खोकन दास जैसे पूर्व विधायकों और म्युनिसिपल चेयरमैनों की गिरफ्तारियों से पार्टी बैकफुट पर है. टीएमसी ने राज्य के सभी मौजूदा विधायकों, सांसदों और जिला अध्यक्षों को 2 जून को रानी रासमणि रोड पहुंचने का सख्त निर्देश दिया है.
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अंदरूनी ताकत का आकलन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार का यह धरना केवल भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि टीएमसी के लिए एक अटेंडेंस टेस्ट भी है. इससे यह साफ हो जायेगा कि केंद्रीय एजेंसियों के खौफ और राज्यव्यापी धर-पकड़ के बीच कितने नेता अब भी मजबूती से ममता बनर्जी के पीछे खड़े हैं.
यह जनता का स्वतःस्फूर्त गुस्सा : भाजपा
भारतीय जनता पार्टी ने टीएमसी के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. भाजपा का कहना है कि अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर कोई सुनियोजित हमला नहीं हुआ था, बल्कि यह स्थानीय जनता का स्वतःस्फूर्त गुस्सा था, जो टीएमसी के सालों के सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुकी है.
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