Malda Judicial Officers Attack NIA Investigation: बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. सोमवार को शीर्ष अदालत ने अपनी ‘असीमित शक्तियों’ का इस्तेमाल करते हुए इस पूरे मामले की जांच एनआईए (NIA) को सौंप दी. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य की नौकरशाही में राजनीति घुस गयी है और इसकी विश्वसनीयता लगातार गिर रही है.
मुख्य सचिव को फटकार – चीफ जस्टिस का फोन क्यों नहीं उठाया?
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की पीठ ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुश्यंत नरियाला को कड़ी फटकार लगायी. कोर्ट इस बात से नाराज था कि 1 अप्रैल को जब मालदा में जजों को भीड़ ने घेर रखा था, तब मुख्य सचिव ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस का फोन तक नहीं उठाया. कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस लापरवाही के लिए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से तुरंत माफी मांगें. पीठ ने कहा कि यह घटना पूरी तरह से जिला प्रशासन की विफलता को दर्शाती है.
26 आरोपियों से पूछताछ करेगी NIA
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि मालदा हिंसा के सिलसिले में राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये 26 आरोपियों से अब एनआईए पूछताछ करेगी. कोर्ट ने साफ किया कि भले ही आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हों, एनआईए उनसे सवाल-जवाब कर सकती है. कोर्ट का मानना है कि एसआईआर (SIR) कार्य में लगे जजों को घंटों बंधक बनाना एक ‘पूर्व-नियोजित’ साजिश थी, जिसका मकसद किसी विशेष उद्देश्य को पूरा करना था.
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Malda Judicial Officers Attack NIA Investigation: 700 जजों की फौज निपटा रही है 60 लाख दावे
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के कुल 700 न्यायिक अधिकारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में लगाया गया है. ये अधिकारी मतदाता सूची से बाहर किये गये 60 लाख से अधिक लोगों के दावों और आपत्तियों का निपटारा कर रहे हैं. मालदा में इसी काम के दौरान 7 जजों को करीब 9 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और उन पर हमला हुआ था.
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जजों की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की इस कार्रवाई से बंगाल के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जायेगा.
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