दो साल बाद बर्दवान की नाबालिग राजस्थान से बरामद, पांच अरेस्ट

राजस्थान के पाली जिले से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने एक नाबालिग को रेस्क्यू कर मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है.

दो बार शादी के लिए बेची गयी थी पीड़िता संवाददाता, कोलकाता. राजस्थान के पाली जिले से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने एक नाबालिग को रेस्क्यू कर मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पश्चिम बंगाल के बर्दवान की रहने वाली यह लड़की करीब दो साल से लापता थी. एजेंसी ने इस ऑपरेशन में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर जाली दस्तावेज बनाकर लड़की को वयस्क दिखाने और दो बार शादी के लिए बेचने का आरोप है. गिरफ्तार आरोपियों में भरत कुमार, जगदीश कुमार, मीना दापुबेन, राता राम और दिलीप कुमार शामिल हैं. इन्हें शनिवार को पाली के मारवाड़ जंक्शन के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से तीन दिनों के ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया. अब इन्हें बंगाल के पूर्व बर्दवान की अदालत में पेश किया जायेगा. ट्यूशन के लिए घर से निकली थी, हुई लापता : यह मामला नौ अगस्त, 2023 का है, जब पीड़िता ट्यूशन पढ़ने घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. परिवार ने पहले स्थानीय पुलिस और फिर राज्य पुलिस की सीआइडी की मदद से उसे ढूंढ़ने की कोशिश की, मगर कोई नतीजा नहीं निकला. बेटी की तलाश में थक चुकी मां ने पिछले वर्ष फरवरी में कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आठ अगस्त को सीबीआइ को सौंपा, जिसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच को सौंप दी. डेढ़ साल की मेहनत के बाद सफलता सीबीआइ ने फोन कॉल डिटेल्स, लोकेशन ट्रैकिंग और गुप्त सूत्रों की मदद से लड़की का सुराग लगाया. पता चला कि पीड़िता को राजस्थान के पाली जिले में रखा गया है. गत शुक्रवार को छापेमारी कर उसे एक आरोपी के घर से सुरक्षित बचा लिया गया. गुमशुदगी के समय वह नाबालिग थी, लेकिन जाली हलफनामों के जरिये उम्र 18 वर्ष से ऊपर दिखाकर उसकी शादी करायी गयी. बाद में उसे दूसरी बार भी शादी के लिए बेच दिया गया. सीबीआइ ने बताया कि लड़की को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, जहां उसे काउंसेलिंग और मेडिकल सहायता दी जा रही है. एजेंसी का मानना है कि यह नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं. आगे की जांच में अंतरराज्यीय कनेक्शन और बाकी सदस्यों का पता लगाया जायेगा. पीड़िता की मां ने याचिका में आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस और सीआइडी ने जांच में लापरवाही की, जिससे बच्ची को बचाने में देर हुई. सीबीआइ की इस कार्रवाई ने न केवल एक पीड़िता को तस्करों के चंगुल से बचाया है, बल्कि तस्करों के नेटवर्क पर भी बड़ा प्रहार किया है. करीब दो साल बाद बेटी को सुरक्षित देखकर परिवार ने राहत की सांस ली और सीबीआइ का आभार जताया. उनका कहना है कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि किसी और बेटी के साथ ऐसा न हो.

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