संवाददाता, कोलकाता
राज्य में एसआइआर के तहत चार नवंबर से मतदाता सूची का घर-घर सर्वे जारी है, लेकिन कई क्षेत्रों से शिकायतें सामने आ रही हैं कि बूथ-लेवल अधिकारी (बीएलओ) मतदाताओं के घर नहीं जा रहे हैं. आरोप है कि कुछ बीएलओ एक ही स्थान पर बैठकर एनुमरेशन फॉर्म वितरित कर रहे हैं. यहां तक कि कुछ इलाकों में तृणमूल नेताओं के घर से फॉर्म बांटे जाने की शिकायतें भी मिली हैं. इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिये हैं. इस बीच तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि कई बीएलओ उम्रदराज हैं. कुछ की तबीयत ठीक नहीं रहती या वे चलने-फिरने में सक्षम नहीं हैं. संभव है कि तकनीकी रूप से यह गलत हो, लेकिन मजबूरी में उन्होंने एक ही जगह बैठकर फॉर्म दिये हों. उन्होंने आगे कहा कि राज्य की अधिकांश जनता तृणमूल का समर्थन करती है, इसलिए कई बीएलओ भी स्वाभाविक रूप से पार्टी समर्थक हो सकते हैं. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बीएलओ का दायित्व हर मतदाता के घर जाकर फॉर्म वितरित करना है और इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी.वोटर लिस्ट से बांग्लादेशियों के नाम हटाने के लिए आयोग को पत्र
कोलकाता. विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से छह बांग्लादेशी नागरिकों के नाम हटाने के लिए चुनाव आयोग को पत्र भेजा है. यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन संस्था है. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) कार्यालय को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि हाल ही में छह लोगों को बांग्लादेशी होने के संदेह में हिरासत में लिया गया था. दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि उनके पास बांग्लादेशी पासपोर्ट हैं, जबकि उनके वोटर कार्ड और अन्य पहचान पत्र पश्चिम बंगाल के पते पर जारी हुए थे. एफआरआरओ ने आग्रह किया है कि इन सभी के नाम तुरंत मतदाता सूची से हटाए जायें. सूत्रों के अनुसार, एफआरआरओ ने इससे पहले भी सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिकों के नाम हटाने के लिए आयोग को पत्र भेजे थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
