दिल्ली में अमित शाह के घर पर प्रदर्शन कर रहे TMC सांसदों को सुरक्षा बलों ने हटाया, ममता बनर्जी बोलीं- लोकतंत्र पर हमला
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजधानी कोलकाता में अवैध कोयला खनन और कोयला तस्करी मामले में आई-पैक के ऑफिस और उसके प्रमुख के आवास पर हुई छापेमारी के खिलाफ तृणमूल सांसदों ने नयी दिल्ली में गृह मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन किया. उन्हें सुरक्षा बलों ने जबरन हटाया, तो बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया.
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Mamata Banerjee: कोलकाता में आई-पैक के ऑफिस और उसके मालिक के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद बंगाल की राजनीति गरमा गयी है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो का गुस्सा सातवें आसमान पर है. ममता बनर्जी खुद कोलकाता की सड़कों पर उतरकर ईडी की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहीं हैं, तो इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने दिल्ली में अमित शाह के घर पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कर रहे सांसदों को सुरक्षा बलों ने जबरन वहां से हटा दिया. ममता बनर्जी ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया है.
भारत एक लोकतंत्र है, भाजपा की जागीर नहीं – बंगाल की सीएम
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि नयी दिल्ली में पार्टी सांसदों के साथ हुए दुर्व्यवहार की वह कड़ी निंदा करती हैं. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे निर्वाचित सांसदों को सड़कों पर घसीटना कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि सत्ता के नशे में वर्दीधारियों के अहंकार की कार्रवाई है. उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जागीर नहीं.
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Mamata Banerjee: बीजेपी के लोकतंत्र में आज्ञाकारिता स्वीकार, असहमति नहीं
मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा या आराम से नहीं चलता. जब भाजपा नेता प्रदर्शन करते हैं, तो उनके लिए रेड कारपेट और विशेष सुविधाएं होती हैं. वहीं, दूसरी ओर जब विपक्षी सांसद अपनी आवाज उठाते हैं, तो उन्हें घसीटा जाता है. हिरासत में लिया जाता है. उन्हें अपमानित किया जाता है. यह दोहरा मापदंड लोकतंत्र के बारे में भाजपा की सोच को उजागर करता है, जहां आज्ञाकारिता को स्वीकार किया जाता है, असहमति को नहीं.
गृह मंत्री तय नहीं करेंगे कि लोकतंत्र में किसे गरिमा मिलेगी
ममता बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सम्मान आपसी होता है. अगर आप हमें सम्मान देंगे, तो हम भी सम्मान देंगे. अगर आप हमें सड़क पर घसीटेंगे, तो हम आपको संवैधानिक सहिष्णुता, असहमति और लोकतांत्रिक नैतिकता के रास्ते पर वापस खींच लायेंगे. यह हमारा भारत है. हम अधिकार से नागरिक हैं, किसी कुर्सी, बैज या सत्ता के पद की दया पर नहीं. उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार, कोई भी पार्टी और कोई भी गृह मंत्री यह तय नहीं कर सकता कि लोकतंत्र में किसे गरिमा मिलेगी और किसे नहीं.
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