पांच जिलों को जोड़ने वाले रामकृष्ण पुल का एक हिस्सा ढहा

पांच दिन पहले जिस पुल पर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला गुजरा था, उसी पुल की गार्डवॉल का एक हिस्सा टूट कर नदी में गिर गया.

प्रतिनिधि, हुगली.

पांच दिन पहले जिस पुल पर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला गुजरा था, उसी पुल की गार्डवॉल का एक हिस्सा टूट कर नदी में गिर गया. ब्रिज पर भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गयी है. आरामबाग में द्वारकेश्वर नदी पर बने रामकृष्ण सेतु की गार्डवॉल का एक हिस्सा शनिवार देर रात अचानक ढह जाने से इलाके के लोग स्तब्ध हैं.

जिस हिस्से में दरार पड़ी और गार्डवॉल टूटा, उसके ठीक बाद वाले हिस्से में भी दरारें देखी गयी हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं. कई दिनों से इस पुल की हालत खराब थी, यह बात सामने आयी थी. इसके बावजूद पांच अगस्त को मुख्यमंत्री आरामबाग से इसी रामकृष्ण सेतु से होकर कामारपुकुर होते हुए घाटाल गयी थीं. यह रामकृष्ण सेतु दक्षिण बंगाल के बांकुड़ा, पुरुलिया, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर को अरामबाग, बर्दवान और कोलकाता से जोड़ता है. इस पुल से रोजाना हजारों यात्री बसें, ट्रक और अन्य वाहन गुजरते हैं. रविवार सुबह सुरक्षा के लिए पुलिस ने यहां बैरिकेड लगा दिये. गौरतलब है कि इस पुल से पांच-छह जिलों की यात्री बसों समेत अन्य वाहनों का आवागमन होता है. दक्षिण बंगाल के लिए यह पुल बेहद महत्वपूर्ण है.

इसके बंद होने से पूरे दक्षिण बंगाल का यातायात ठप हो जायेगा. साथ ही इस उपमंडल और आसपास के क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं, दैनिक यात्री सभी का आना-जाना रुक जायेगा. स्कूल, कॉलेज भी बंद हो सकते हैं. ऐसी आशंका स्थानीय लोग और नियमित यात्री जता रहे हैं. पुल की हालत की जांच करने और गार्डवॉल टूटने के कारणों का पता लगाने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे. मौके पर पहुंच कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी जायजा लिया. आरामबाग नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन व आरामबाग संगठनात्मक जिला तृणमूल कांग्रेस के चेयरमैन सपन नंदी ने बताया कि लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर आये थे. उन्होंने पुल के नीचे उतर कर बारीकी से निरीक्षण किया और सीसीटीवी फुटेज भी देखी. फिलहाल एक हाइड बार लगा कर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही रोक दी गयी है, हालांकि बसें और छोटे वाहन चलेंगे. हमने पुल की शीघ्र मरम्मत की मांग की है. इस पुल के पास एक और पुल बनाने का प्रस्ताव पहले ही दिया गया था, जिस पर चर्चा जारी है. करीब छह दशक पहले बने इस पुल का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री और आरामबाग के गांधी कहे जाने वाले प्रफुल्ल सेन ने किया था.

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