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कूचबिहार में बोले धनखड़- संविधान की रक्षा मेरी जिम्मेदारी, लोग बोले- राष्ट्रपति भी ऐसे ही हालात संभालें

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
कूचबिहार में राज्यपाल जगदीप धनखड़
कूचबिहार में राज्यपाल जगदीप धनखड़
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ कूचबिहार जिला में चुनाव के बाद हुई हिंसा का जायजा लेने पहुंचे. न्यूज एजेंसी ने जब इसकी जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट पर इस न्यूज को फ्लैश किया, तो प्रतिक्रिया की बाढ़ आ गयी. लोगों ने राज्यपाल को ट्रोल करना शुरू कर दिया.

राज्यपाल ने कूचबिहार पहुंचने के बाद कहा कि संविधान की संरक्षा, सुरक्षा और रक्षा उनकी जिम्मेदारी है. राज्यपाल श्री धनखड़ के इसी बयान पर सोशल मीडिया में लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया. राकेश मीणा ने कहा कि राष्ट्रपति को भी देश मे ऐसे ही हालात संभालना चाहिए.

इससे पहले, अभिनव ने लिखा- वॉयलेंस थोड़ा शांत हो गया ना अब? प्रो फूल बड्डी ने लिखा- कांस्टिट्यूशन ही डिफेंड करना, लोगों को तो नहीं कर पाओगे. बोर्ड पार्टिकल के नाम से ट्विटर हैंडल चलाने वाले शख्स ने लिखा- लोग फिर से जन्म ले सकते हैं, संविधान फिर से प्रिंट करने में टाइम और पैसा लगेगा.

किरीट शाह ने कहा कि राज्यपाल को ऐसे बयान देने से पहले कलकत्ता हाइकोर्ट के उस बयान को पढ़ लेना चाहिए था, जिसमें चुनाव के बाद हुई हिंसा से निबटने के लिए ममता बनर्जी की तारीफ की गयी है.

फॉरएवर कांग्रेस ने पूछा कि राज्यपाल और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल कोरोना से मरने वाले लोगों के परिवार के सदस्यों से कब मिलेंगे. अभिषेक कटियार ने लिखा- राजनीति. और फिर तो आपको कोरोना से मरने वालों के घर जाना चाहिए, पर शायद वो आपकी definition to 'preserve, protect and defend the constitution' के अंतर्गत नहीं आती होगी. कोई नहीं साहब, आप कुछ भी कर और कह सकते हो, क्योंकि आप राज्यपाल जो हो.

चुनाव जीतने का मतलब लोकतंत्र को बंधक बनाने का अधिकार नहीं

सुनील हटवाल ने ममता बनर्जी को नसीहत देते हुए लिखा- राज्य यह न सोचे कि चुनाव जीतने का मतलब लोकतंत्र को बंधक बनाने का अधिकार मिल गया. और बंगाल भारत में है और भारत का हर नागरिक कोई भी, किसी भी समय भारत के हर राज्य में घूमने का अधिकार रखता है, जिसके लिए किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. अगर है भी, तो अपने मन के अंदर रखें आपत्ति.

Posted By: Mithilesh Jha

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