आयकर के रडार पर फरजी कंपनियां
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Feb 2017 7:47 AM
कोलकाता: महानगर में बड़ी संख्या में फरजी कंपनियों की मौजूदगी के कारण यह शहर देश में टैक्स बचाने के गढ़ के रूप में उभरा है. आय कर विभाग शहर की फरजी कंपनियों पर कार्रवाई की योजना बना रहा है. केंद्र सरकार ने काले धन पर लगाम कसने के लिए हाल ही में फरजी कंपनियों पर […]
इससे तुरंत कंपनी का मूल्यांकन एक लाख रुपये से एक करोड़ रुपये हो जायेगा. फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से यह राशि कंपनी के असली मालिक तक पहुंच जायेगी. अक्सर इन कंपनियों के निदेशक चाय बेचने वाले या सिक्योरिटी गार्ड होते हैं. पूंजी जितनी ज्यादा होगी, कंपनी के पंजीकरण की लागत उतनी ही ज्यादा होगी. आय कर विभाग के अधिकारी ने कहा कि कोलकाता में चार्टर्ड अकाउंटेंट अच्छी तादाद में हैं. निदेशक ढूंढना आसान हैं जो पांच हजार रुपये लेकर कहीं भी हस्ताक्षर कर देंगे. दलाल और एंट्री ऑपरेटर भी उपलब्ध हैं जो एक ही जगह और एक ही लैपटॉप से कई कंपनियां चलाते हैं. सूत्रों के मुताबिक आय कर विभाग ने कोलकाता में डेढ़ लाख से अधिक फरजी कंपनियों और करीब 6000 चार्टर्ड अकाउंटेंट की पहचान की है. कोलकाता में विभाग के मुख्य आयुक्त सुब्रत कुमार दास ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया.
जालसाजी का यह आलम है कि इस प्रकार की कंपनियों के रजिस्टर्ड ऑफिस तक नहीं मिलते हैं. दिल्ली की भारत शिपिंग लिमिटेड नामक कंपनी के पास हमारे एक क्लायंट का दस लाख रुपये का एक चेक बाउंस हो गया था. इस संबंध में हम लोगों ने कंपनी आैर उसके तीन डायरेक्टरों पर मामला दायर किया था. उस वक्त हम लोग हैरत में रह गये, जब हमारे द्वारा किये गये एक आरटीआइ के जवाब में पुलिस ने बताया कि उस कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस पिछले तीन वर्ष से खुला तक नहीं है आैर न ही उसके निदेशकों का कोई अता-पता है. हालांकि श्री सराफ ने बताया कि अब थोड़ी स्थिति बदल रही है. थोड़ी सख्ती देखने को मिल रही है. पर अभी भी सिस्टम में काफी कमी है. जिसका लोग फायदा उठा कर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं.
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