राज्यसभा चुनाव आज: कांग्रेस के आबू नासेर व सुशील चंद्र का तृणमूल के पक्ष में मतदान का एलान

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कोलकाता: शुक्रवार को राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले गुरुवार को जोड़तोड़ का जबरदस्त खेल चला. कांग्रेस के दो विधायकों आबू नासेर खानचौधरी और सुशील चंद्र राय ने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अहमद हसन के पक्ष में न सिर्फ मतदान करने का एलान किया, बल्कि तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की […]

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कोलकाता: शुक्रवार को राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले गुरुवार को जोड़तोड़ का जबरदस्त खेल चला. कांग्रेस के दो विधायकों आबू नासेर खानचौधरी और सुशील चंद्र राय ने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अहमद हसन के पक्ष में न सिर्फ मतदान करने का एलान किया, बल्कि तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा भी की. खानचौधरी मालदा के सुजापुर और सुशील चंद्र इसी जिले के गाजोल से विधायक हैं.

यही नहीं, वाममोरचा और कांग्रेस समर्थित निर्दल उम्मीदवार अहमद सईद मलीहाबादी पर तृणमूल प्रत्याशी अहमद हसन की जीत सुनिश्चित करने के लिए वाम मोरचा के विधायकों पर भी डोरे डाले गये हैं. सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में पैसे और पद का प्रलोभन दिया गया है.

इससे विपक्षी खेमे में खलबली मच गयी है. वाममोरचा के घटक दल आरएसपी के जलपाईगुड़ी के विधायक अनंत अधिकारी के लापता होने की शिकायत वाममोरचा नेता नर्मदा राय ने पार्क स्ट्रीट थाने में दर्ज करायी है. उधर, देर रात श्री अधिकारी ने कहा कि वह लापता नहीं हुए हैं. शुक्रवार को राज्यसभा चुनाव में वोट देने विधानसभा जायेंगे. उन्हें नहीं मालूम कि पार्टी उन्हें लापता क्यों बता रही है. वाममोरचा से जुड़े अन्य दो विधायक फॉरवर्ड ब्लॉक के सुनील मंडल तथा आरएसपी के दशरथ तिर्की भी ‘लापता’ बताये गये हैं. इन दोनों के मोबाइल बंद हैं. उनके संबंध में कोई जानकारी नहीं है कि वे कहां हैं. माकपा नेता रवीन देव ने तृणमूल पर उनके विधायकों को भय दिखाने, नियम का उल्लंघन करने व खरीद-फरोख्त करने का आरोप लगाया है, जबकि तृणमूल के महासचिव मुकुल राय ने आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि कांग्रेस व वाममोरचा के नापाक गंठबंधन को विधायक नहीं मानेंगे. तृणमूल के पांचवें उम्मीदवार को 51 मत मिलेंगे और उसकी जीत होगी.

पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार हैं मैदान में
राज्य से विधानसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव मैदान में छह उम्मीदवार हैं. विधायकों की संख्या के अनुसार, तृणमूल के पहले तीन उम्मीदवार अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती, चित्रकार योगेन चौधरी और कारोबारी केडी सिंह की जीत तय है. वाममोरचा के उम्मीदवार ऋतब्रत बनर्जी का जीतना भी निश्चित है. समस्या पांचवीं सीट को लेकर है. तृणमूल कांग्रेस के चौथे उम्मीदवार अहमद हसन की जीत के लिए पर्याप्त मत नहीं हैं, जबकि वाममोरचा व कांग्रेस समर्थित निर्दल उम्मीदवार अहमद सईद मलीहाबादी आंकड़ों के अनुसार भारी पड़ रहे हैं. लेकिन तृणमूल कांग्रेस पासा पलटने की तैयारी में दिख रही है. कांग्रेस के दो विधायकों के साथ ही वाम मोरचा के घटक दलों के तीन विधायकों का समर्थन मिल जाता है तो उसके उम्मीदवार अहमद हसन का रास्ता आसान हो सकता है.

कांग्रेस के होश उड़े
राज्यसभा की पांच सीटों के चुनाव के 24 घंटे पहले कांग्रेस के दो विधायकों ने पार्टी के खिलाफ बगावत करते हुए तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की. साथ ही इन विधायकों ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्यसभा के चुनाव में वे लोग तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में मतदान करेंगे. दो विधायकों की बगावत ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है. इन दोनों विधायकों में गाजोल के विधायक सुशील चंद्र राय व सुजापुर से विधायक आबू नासेर खान चौधरी (लेबू) शामिल हैं. सुशील चंद्र राय ने पहली बार गाजोल से चुनाव जीता था. यह पहले माकपा का गढ़ माना जाता था.

उन्होंने वर्ष 2011 में माकपा के उम्मीदवार गोविंद मंडल को 5584 वोट से हरा कर चुनाव जीता था. दूसरी ओर आबू नासेर खान चौधरी दो बार विधायक चुने गये हैं. इन दोनों विधायकों के तृणमूल में शामिल होने की खबर फैलते ही मालदा जिला कांग्रेस के शिविर में निराशा छा गयी. गुरुवार दोपहर बाद से ही दोनों विधायक अपना मोबाइल फोन नहीं उठा रहे हैं. जिले के कांग्रेस नेता उनसे लगातार संपर्क बनाने की कोशिश में जुटे थे. उनके विधानसभा क्षेत्र से भी लोग उन्हें फोन कर रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस के नेता भी उनसे बात करने की कोशिश में लगे थे, लेकिन दोनों ही विधायक किसी से बात करने को तैयार नहीं हैं. नयी दिल्ली से सांसद मौसम नूर ने फोन पर बताया कि दक्षिण मालदा से सांसद व केंद्रीय मंत्री आबू हाशेम खान चौधरी (डालू) ने विधायक से संपर्क किया है. सुजापुर केंद्र दक्षिण मालदा के अंतर्गत आता है. इसे देखते हुए डालू बाबू उन्हें मनाने की कोशिश में जुटे हैं. मौसम नूर ने बताया कि अचानक उनके पार्टी छोड़ने से वे हैरान हैं.

उन्होंने कहा कि सुशील चंद्र राय से उनकी नियमित बात होती है. पार्टी में कोई विवाद भी कभी सामने नहीं आया. उन्हें फोन कर रही हूं, लेकिन वे फोन नहीं उठा रहे हैं. लोकसभा चुनाव के पूर्व विधायकों के पार्टी छोड़ने से पार्टी को नुकसान हो सकता है. इसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है. दूसरी ओर विधायक सुशील राय ने बताया कि मालदा में कांग्रेस को नेतृत्व देने जैसा कोई नेता नहीं है. समस्या होने पर कोई दिखाई नहीं देता है. यहां से दो सांसद हैं, लेकिन वे कभी मिलते ही नहीं है. फोन करने पर वे लोग फोन तक नहीं उठाते हैं. यहां विकास पूरी तरह से थम गया है. इससे परेशान होकर ही तृणमूल कांग्रेस में जाने का फैसला लिया है. वहीं आबू नासेर खान चौधरी ने कहा कि वह कांग्रेस में रहना नहीं चाहते हैं. बिना कोई बातचीत किये ही मौसम नूर को जिला कांग्रेस का दायित्व दे दिया गया, इसे वह स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. उन्होंने कहा कि यदि विकास करना है तो ममता बनर्जी जैसी मुख्यमंत्री का होना जरूरी है.

विधानसभा में सुबह नौ बजे से शुरू होगा मतदान
विधानसभा में सुबह नौ बजे से मतदान शुरू होगा. मतदान शाम चार बजे तक चलेगा. शाम पांच बजे से मतों की गणना शुरू होगी. विधानसभा के सभी सदस्यों का मतदान गुप्त होता है. विधानसभा सदस्य ही संसद की ऊपरी सदन राज्यसभा के सदस्यों का चयन करते हैं.

फॉरवर्ड ब्लॉक के सुनील मंडल भी तृणमूल कांग्रेस में!

पानागढ़. गलसी के फारवर्ड ब्लॉक विधायक सुनील कुमार मंडल तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये हैं. शीघ्र ही इसकी औपचारिक घोषणा की जायेगी. इसकी जानकारी पार्टी की बर्दवान जिला कमेटी के सदस्य व कांकसा जोनल सचिव अनिल दास ने दी. लगातार रिंग करने के बाद भी श्री मंडल ने फोन नहीं उठाया. पार्टी नेता श्री दास ने कहा कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के भी फोन रिसीव नहीं कर रहे है. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के साथ उनकी घनिष्ठता पिछले एक वर्ष से काफी बढ़ गयी थी. उन्होंने गुरुवार को पार्टी की जिला कमेटी की बैठक में भी भाग नहीं लिया.

उनके नजदीकी सूत्रों ने पार्टी नेतृत्व को बताया कि वे तृणमूल में शामिल होंगे. पार्टी समर्थकों ने इसके बाद उनके घर के सामने विक्षोभ प्रदर्शन किया. उस समय विधायक की पत्नी और उनके छोटे पुत्र ही घर में थे. विरोध देख कर वे घर से निकल कर चले गये. उन्होंने कहा कि दल-बदल के लिए बड़ी डील हुई है. काफी समय से वे पार्टी के कार्यक्रमों के प्रति दिलचस्पी नहीं ले रहे थे. दल के कार्यकर्ताओं में भी मिलना-जुलना कम कर दिया था. बर्दवान जिले में दलबदल करने वाले वे वाममोर्चा के किसी घटक दल के पहले विधायक हैं. बहरहाल, उनके घर के सामने सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गयी है.

क्या है वोटों का गणित

बंगाल से राज्यसभा की पांच सीटें भरी जानी है

छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं

तृणमूल कांग्रेस तीन और माकपा एक सीट आसानी से जीत जाने की स्थिति में है

वोटों के आंकड़े पक्ष में न रहने के बावजूद तृणमूल ने पांचवीं सीट झटकने का दावं खेला है

वाम मोरचा और कांग्रेस समर्थित निर्दल प्रत्याशी उर्दू अखबार आजाद हिंद के पूर्व संपादक अहमद सईद मलीहाबादी के खिलाफ

पत्रकार अहमद हसन को मैदान में उतारा है

जीत के लिए 49 मतों की जरूरत
राज्य विधानसभा में विधायकों की संख्या 294 है. कांग्रेस के शांतिपुर के विधायक अजय दे इस्तीफा देकर तृणमूल में शामिल हो गये. इस कारण कुल मतों की संख्या 293 है. एक उम्मीदवार को जीत के लिए 49 मतों की जरूरत है. तृणमूल 187 विधायक हैं. 147 मतों से उसके पहले तीन उम्मीदवारों की जीत तय है. बाकी 40 मत बचते हैं.

गोरखा जनमुक्ति मोरचा के तीन व तृणमूल में शामिल होने वाले चांद मोहम्मद व हमीदुर रहमान को जोड़ लें तो उसके अतिरिक्त मतों की संख्या हो जायेगी 45. इसके बावजूद चौथे उम्मीदवार की जीत के लिए उसे चार और मतों की जरूरत पड़ेगी. कांग्रेस से बगावत करने वाले आबू नासेर और सुशील चंद्र राय के मतों को जोड़ लिया जाये तो वाम मोरचा के दो विधायकों की क्रास वोटिंग से तृणमूल अपने लिये चौथी सीट निकाल सकती है.

फॉरवर्ड ब्लॉक के सूत्रों के अनुसार, पार्टी विधायक सुनील मंडल ने तृणमूल में शामिल होने का लगभग मन बना लिया है. वाम मोरचा नेतृत्व का अपने दो-एक विधायकों से संपर्क स्थापित नहीं हो पा रहा है. आशंका है कि ये विधायक क्रास वोटिंग कर सकते हैं. दूसरी ओर, वाममोरचा के विधायकों की संख्या 61 है तथा कांग्रेस के पास 38 विधायक हैं. वाममोरचा 49 मतों की मदद से अपने उम्मीदवार ऋतब्रत बनर्जी को आसानी से जीता सकता है. उसके बाद मोरचा के पास 12 अतिरिक्त मत बचेंगे. क्रास वोटिंग न हो तो कांग्रेस के 38 तथा वाममोरचा के 12 वोट यानी कुल 50 मत से वाममोरचा व कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार अहमद सईद मलीहाबादी को जीत की उम्मीद है.

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