Jharkhand Municipal Election Result 2026, पश्चिमी सिंहभूम (शीन अनवर, चक्रधरपुर) : पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर नगर परिषद सीट पर अध्यक्ष पद के प्रत्याशी सन्नी उरांव ने जीत दर्ज की है. वे झामुमो विधायक सुखराम उरांव के बेटे हैं. सन्नी के जीत के पीछे की वजह देखें तो कई परतें दिखायी देती हैं, जिनमें सबसे प्रमुख भूमिका उनके पिता सह विधायक सुखराम उरांव की रaणनीतिक तैयारी रही. नगर निकाय चुनाव में जिस प्रकार चुनावी बिसात बिछायी गयी, वह विधानसभा चुनाव की रणनीति की झलक देती है. छगनलाल बागान स्थित चुनावी कार्यालय से पूरे अभियान की मॉनिटरिंग की गयी, जहां बैठकर विधायक ने बूथ स्तर तक मैनेजमेंट की कमान संभाली.
रणनीतिक प्रबंधन की भूमिका
विधायक सुखराम उरांव ने स्वयं चुनावी कमान संभाली और संगठन, समर्थकों तथा विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच समन्वय स्थापित किया. वहीं सन्नी उरांव ने जनसंपर्क की कमान संभाली. घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात, संवाद और समर्थन की अपील उनका मुख्य फोकस रहा. इस ‘फ्रंट और बैकएंड’ मॉडल ने चुनाव को व्यवस्थित रूप दिया.
सभी का मिला समर्थन
चुनाव में एक उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि विभिन्न धर्म, जाति और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों का समर्थन सन्नी उरांव को मिला. स्थानीय स्तर पर आरएसएस, भाजपा, अंजुमन इस्लामिया, मुस्लिम, ईसाई और आदिवासी समाज के लोगों का सहयोग उनके पक्ष में एक व्यापक सामाजिक समीकरण के रूप में सामने आया. यह समर्थन केवल राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत संबंधों और विश्वास पर आधारित माना जा रहा है.
व्यक्तित्व का प्रभाव भी जीत की वजह रही
रणनीति के साथ-साथ सन्नी उरांव का व्यक्तिगत व्यवहार भी उनकी जीत का महत्वपूर्ण कारण बना. एक शिक्षित, मृदुभाषी और विनम्र प्रत्याशी के रूप में उनकी छवि मतदाताओं को आकर्षित करने में सफल रही. जनसंपर्क के दौरान वे बड़ों को ‘चाचा’ कहकर संबोधित करते रहे, आशीर्वाद लेते रहे और विरोधियों के प्रति भी मर्यादित भाषा का प्रयोग किया. इस व्यवहार ने उन्हें युवा होने के बावजूद परिपक्व और संस्कारी छवि प्रदान की. इस चुनाव परिणाम को केवल एक राजनीतिक जीत के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे सुविचारित रणनीति, मजबूत संगठनात्मक पकड़ और सकारात्मक व्यक्तिगत छवि के संयुक्त प्रभाव के रूप में समझा जाना चाहिए. विधायक पिता की रणनीतिक बिसात और बेटे की सादगी व सक्रिय जनसंपर्क इन दोनों ने मिलकर इस जीत की नींव रखी. चक्रधरपुर नगर राजनीति में यह परिणाम आने वाले समय में परिवार आधारित रणनीतिक प्रबंधन और जमीनी संपर्क मॉडल की प्रभावशीलता का उदाहरण बन सकता है.
Also Read: झारखंड निकाय चुनाव: दुमका का मिठाई वाला बना अध्यक्ष, यह अनोखा चुनावी मंत्र बना गेम चेंजर
