सिमडेगा. रक्षाबंधन पर्व को लेकर जिले की ग्रामीण महिलाएं राखी निर्माण के जरिए स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं. जलडेगा और सदर प्रखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इन दिनों आकर्षक और विभिन्न डिजाइनों की राखियां तैयार कर रही हैं.
महिलाएं रंग-बिरंगे रेशमी धागों, मोतियों, सजावटी सामग्री समेत अन्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर बाजार की मांग के अनुरूप राखियां बना रही हैं. इस कार्य से उन्हें अपने कौशल को निखारने के साथ घर के नजदीक रहकर आय अर्जित करने का अवसर भी मिल रहा है.
राखी निर्माण की पहल को केवल त्योहार तक सीमित रखने के बजाय इसे महिला उद्यमिता और आय सृजन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. राखियां तैयार करने के दौरान महिलाओं को डिजाइनिंग, गुणवत्ता, फिनिशिंग, पैकेजिंग और विपणन की व्यावहारिक जानकारी भी मिल रही है. तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय बाजारों के साथ सामुदायिक संस्थाओं और अन्य विपणन माध्यमों का उपयोग किया जाएगा.
इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को अपने श्रम का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद है. साथ ही स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और महिला समूहों को छोटे उद्यम विकसित करने में मदद मिलेगी.
जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कृषि के अलावा कई गैर-कृषि गतिविधियों को अपनाकर आजीविका के नए साधन विकसित कर रही हैं. राखी निर्माण इसी कड़ी की एक महत्वपूर्ण पहल है. इसके माध्यम से स्थानीय उत्पादन को स्थानीय बाजार से जोड़कर महिलाओं की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
आने वाले समय में राखी निर्माण जैसी मौसमी गतिविधियों को अन्य त्योहारों और स्थानीय मांग वाले उत्पादों से जोड़कर महिलाओं के लिए वर्षभर आय के अवसर विकसित किए जा सकते हैं. इससे ग्रामीण एवं जनजातीय महिलाओं के छोटे उद्यमों को स्थायी स्वरूप देने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी.
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