सरकारी सुविधा की आस में टाटी पंचायत के लोग

Updated at : 17 Nov 2017 12:04 PM (IST)
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सरकारी सुविधा की आस में टाटी पंचायत के लोग

जलडेगा : प्रखंड मुख्यालय से करीब 21 किमी दूर जंगलों व पहाड़ों के बीच टाटी ग्राम पंचायत अवस्थित है. यहां के लोग आज भी विकास के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं. टाटी पंचायत में नौ राजस्व ग्राम हैं. इनमें तितलिंग, तुरूपडेगा, बाड़ीबृंगा, पैतानो, हुटुबदा, बरबेड़ा, फिरका, टोनिया व टाटी शामिल हैं. पंचायत […]

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जलडेगा : प्रखंड मुख्यालय से करीब 21 किमी दूर जंगलों व पहाड़ों के बीच टाटी ग्राम पंचायत अवस्थित है. यहां के लोग आज भी विकास के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाये बैठे हैं. टाटी पंचायत में नौ राजस्व ग्राम हैं. इनमें तितलिंग, तुरूपडेगा, बाड़ीबृंगा, पैतानो, हुटुबदा, बरबेड़ा, फिरका, टोनिया व टाटी शामिल हैं. पंचायत की आबादी लगभग 5043 (सरकारी आंकड़े के अनुसार) है.

ग्रामीण वन उत्पाद व कृषि कार्य कर जीविकोपार्जन करते हैं. पंचायत में सड़क की स्थिति दयनीय है. आजादी के इतने वर्षों बाद भी पंचायत को जोड़ने वाली मुख्य सड़क तक नहीं बन सकी है. जलडेगा प्रखंड के ओडगा के बाद टाटी में रेलवे स्टेशन है, पर दो-तीन पैसेंजर ट्रेन को छोड़ कर अन्य नहीं रुकती है. पंचायत में एक प्राथमिक विद्यालय है, जहां वर्ग पांच तक की पढ़ाई होती है. इसके उपरांत 15 किमी दूर कुटंगिया या 20 किमी दूर लचरागढ़ जंगलों के बीच से होकर बच्चों को पढ़ने के लिए जाना पड़ता है.

स्वास्थ्य सुविधा भी बेहाल : यहां के लोग स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने से परेशान है़ं बीमार पड़ने पर लोगों को राउरकेला जाना पड़ता है़ जो नहीं जा पाते हैं, उन्हें स्थानीय डॉक्टर व वैद्य पर निर्भर रहना पड़ता है. यहां के ग्रामीण विकास की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. सड़क, चिकित्सा व शिक्षा के साथ-साथ गांव में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा भी नहीं है.

बिजली की सुविधा भी नहीं : टाटी पंचायत के ग्राम प्रधान स्वास्थ्य कुमार लुगून, कुशो सिंह, अगस्तु सुरीन, गुणा सुरीन, जानेरियुस लूगून, सिलबेसतर सुरीन, दाऊद लूगून, सदान बागे व सुदर्शन बड़ाइक सहित कई अन्य ग्रामीणों ने कहा कि यहां काफी असुविधा के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं. बिजली, सड़क, चिकित्सा व शिक्षा आदि का घोर अभाव है़ सरकार यहां के लोगों के बारे भी सोचे. मनरेगा से भी श्रमिकों को 365 दिन काम नहीं मिल रहा है. काम मिलता भी है, तो मजदूरी भुगतान के लिए बैंक का चक्कर काटना पड़ता है. वृद्धा, दिव्यांग पेंशनधारियों को भी पेंशन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. राशन तो गांव में मिल जाता है, लेकिन समस्याओं का यहां मकड़जाल लगा है.

टाटी पंचायत में 132 प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं: बीडीओ संजय कुमार कोंगाड़ी ने बताया कि टाटी पंचायत में 132 प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं. जमीन समतलीकरण का काम मनरेगा के तहत चल रहा है. पर सड़कों की स्थिति ठीक नहीं होने से सामग्री पहुंचाने में परेशानी हो रही है.

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